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E20: ईंधन पर शंकाओं के बीच सज्जन जिंदल का बयान- ई20 पेट्रोल उपभोक्ताओं के खिलाफ नहीं, भारत के हित में है

Sat, 18 Jul 2026 06:59 PM IST
Amar Sharma ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amar Sharma Updated Sat, 18 Jul 2026 06:59 PM IST
सार

देश में E20 पेट्रोल को लेकर बहस लगातार तेज होती जा रही है। एक तरफ कुछ वाहन मालिक माइलेज में कमी, इंजन पर असर और रखरखाव की लागत बढ़ने जैसी चिंताएं जता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर JSW Group के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर सज्जन जिंदल ने इथेनॉल ब्लेंडिंग का समर्थन करते हुए इसे 'भारत के हित' से जुड़ा कदम बताया है।

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E20 Fuel Blending is Pro-India, Not Anti-Consumer Says JSW Group's Sajjan Jindal
E20 Fuel Energy Policy Debate India - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

देशभर में E20 ईंधन को लेकर वाहन चालकों के मन में तरह-तरह की शंकाएं और डर बने हुए हैं। इसी बीच, जेएसडब्ल्यू ग्रुप (JSW Group) के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर (एमडी) सज्जन जिंदल ने इस मुद्दे पर देश का ध्यान एक बड़े और सकारात्मक पहलू की ओर खींचा है। सज्जन जिंदल का साफ कहना है कि पेट्रोल में इथेनॉल का मिश्रण (E20/E25 ब्लेंडिंग) उपभोक्ता विरोधी नहीं, बल्कि 'प्रो-इंडिया' यानी भारत के हित में उठाया गया एक बड़ा कदम है। 

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E20 Fuel Blending is Pro-India, Not Anti-Consumer Says JSW Group's Sajjan Jindal
E20 पेट्रोल - फोटो : AI

सज्जन जिंदल ने E20/E25 ब्लेंडिंग को देश के हित में क्यों बताया है?

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर एक पोस्ट के जरिए जेएसडब्ल्यू ग्रुप के चेयरमैन ने इथेनॉल मिश्रण के फायदों को खुलकर देश के सामने रखा है। ये हैं उसकी खास बातें:

  • कच्चे तेल के आयात बिल में कमी:
    पेट्रोल में इथेनॉल के मिश्रण का हर एक प्रतिशत (1%) भारत के कच्चे तेल के आयात बिल को कम करता है। इससे विदेशों पर हमारी निर्भरता घटती है।

  • भारतीय किसानों की समृद्धि:
    इथेनॉल का उत्पादन भारत में ही होता है। इसलिए इस योजना के जरिए होने वाली कमाई सीधे देश के अन्नदाताओं यानी किसानों की जेब में जाती है, जिससे वे और अमीर होते हैं।

  • विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूती:
    घरेलू स्तर पर उत्पादित इथेनॉल और बिजली का उपयोग करने से देश से बाहर जाने वाला विदेशी मुद्रा का प्रवाह रुकता है। जिससे भारत का विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत होता है।

  • ऊर्जा आत्मनिर्भरता का रास्ता:
    सज्जन जिंदल के मुताबिक, E20/E25 को लेकर ज्यादा हाय-तौबा मचाने की जरूरत नहीं है, क्योंकि यह देश को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने का मार्ग है। यह पूरी तरह से राष्ट्रीय हित और देश की अर्थव्यवस्था के पक्ष में है।

  • वाहन मालिकों की बचत:
    उन्होंने यह भी साफ किया कि यह राष्ट्रीय एजेंडा न केवल देश को लाभ पहुंचाता है, बल्कि हर एक वाहन मालिक के पैसों की भी बचत करता है। इसलिए हमें इसकी शिकायत करने के बजाय इसे खुशी-खुशी अपनाना चाहिए।


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E20 Fuel Blending is Pro-India, Not Anti-Consumer Says JSW Group's Sajjan Jindal
E20 पेट्रोल - फोटो : AI

इंजन खराब होने के दावों पर IIT कानपुर की रिसर्च क्या कहती है?

माइलेज में कमी, इंजन में टूट-फूट और भारी-भरकम रिपेयरिंग खर्च के डर के बीच, आईआईटी कानपुर (IIT Kanpur) की एक नई रिसर्च ने वाहन चालकों को बहुत बड़ी राहत दी है:

  • इंजन डैमेज होने का कोई वैज्ञानिक सबूत नहीं:
    आईआईटी कानपुर के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग की 'इंजन रिसर्च लेबोरेटरी' के प्रोजेक्ट साइंटिस्ट ध्रुव राज काराना ने बताया कि व्यापक टेस्टिंग के बाद नई या पुरानी किसी भी गाड़ी के इंजन को नुकसान पहुंचने का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिला है।

  • दावे पूरी तरह निराधार:
    सोशल मीडिया पर चल रहे उन दावों को वैज्ञानिक रूप से पूरी तरह निराधार बताकर खारिज कर दिया गया है, जिनमें कहा जा रहा था कि E20 पेट्रोल से इंजन में जंग लगती है या मैकेनिकल खराबी होता है। वैज्ञानिकों ने वाहन मालिकों को केवल वाहन निर्माताओं और मंत्रालय के दिशा-निर्देशों का पालन करने की सलाह दी है।

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E20 Fuel Blending is Pro-India, Not Anti-Consumer Says JSW Group's Sajjan Jindal
E20 Petrol - फोटो : Amar Ujala

क्या E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से गाड़ी का माइलेज कम हो जाता है?

माइलेज (फ्यूल इकोनॉमी) पर पड़ने वाले असर को लेकर भी आईआईटी कानपुर की इस रिसर्च में बेहद महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं:

  • उम्मीद से बहुत कम असर:
    रिसर्च में पाया गया है कि ईंधन दक्षता (माइलेज) पर E20 का असर उतना बड़ा नहीं है जितना आम तौर पर लोग सोच रहे हैं।

  • 5% से भी कम की गिरावट:
    संस्थान के परीक्षणों के दौरान ईंधन दक्षता में आई कोई भी कमी 5 प्रतिशत से नीचे ही दर्ज की गई।

  • सामान्य टेस्टिंग वेरिएशन का हिस्सा:
    वैज्ञानिक ध्रुव राज काराना के अनुसार, यह मामूली कमी सामान्य टेस्टिंग वेरिएशन (परीक्षण के दौरान आने वाले साधारण उतार-चढ़ाव) के दायरे में आती है। यदि आप शुद्ध पेट्रोल के साथ भी लगातार दो बार बैक-टू-बैक टेस्ट दोहराएंगे, तो भी इतना मामूली अंतर देखने को मिल सकता है।

E20 Fuel Blending is Pro-India, Not Anti-Consumer Says JSW Group's Sajjan Jindal
FADA on E20 Petrol - फोटो : Amar Ujala

पेट्रोलियम मंत्रालय और शोधकर्ताओं का इस पर अंतिम नतीजा क्या है?

इस पूरे विषय पर सरकारी मंत्रालय और वर्षों से शोध कर रहे वैज्ञानिकों ने ये तथ्य सामने रखे हैं:

  • मंत्रालय का रुख:
    कुछ दिन पहले पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने भी कहा था कि E20 ईंधन से कुछ वाहनों की ईंधन दक्षता (माइलेज) में 5 प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है। हालांकि, मंत्रालय ने यह भी जोड़ा था कि इस मामूली कमी की भरपाई पर्यावरण को होने वाले लाभ यानी कम लाइफसाइकिल कार्बन उत्सर्जन से हो जाती है।

  • वर्षों की रिसर्च पर आधारित परिणाम: आईआईटी कानपुर की यह रिपोर्ट प्रोफेसर अविनाश कुमार अग्रवाल के नेतृत्व में प्रयोगशाला में किए गए कई वर्षों के काम पर आधारित है। जहां विभिन्न इथेनॉल मिश्रणों के प्रदर्शन, टिकाऊपन और उत्सर्जन का गहन अध्ययन किया गया है।

  • E85 मिश्रण का विशेष नोट:
    शोधकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि उन्होंने परीक्षणों के दौरान E85 मिश्रण का भी मूल्यांकन किया है। लेकिन उन्होंने साफ तौर पर नोट किया कि E85 केवल विशेष रूप से निर्मित वाहनों के लिए होता है। और इसकी तुलना सामान्य व्यावसायिक उपयोग में आने वाले E20 पेट्रोल से सीधे तौर पर नहीं की जा सकती। 

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