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EV: BEV, Hybrid, PHEV और REEV में क्या अंतर है? कार खरीदने से पहले आसान भाषा में समझें चारों टेक्नोलॉजी

Sat, 18 Jul 2026 08:04 PM IST
Amar Sharma ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amar Sharma Updated Sat, 18 Jul 2026 08:04 PM IST
सार

ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री तेजी से इलेक्ट्रिफिकेशन की ओर बढ़ रही है। पहले जहां कंपनियां पूरी तरह इलेक्ट्रिक कारों पर जोर दे रही थीं, वहीं अब उनकी रणनीति बदल रही है। अब फोकस केवल 'Electric Only' नहीं, बल्कि 'Electric First' पर है। यानी ग्राहकों की जरूरत और इस्तेमाल के हिसाब से अलग-अलग तरह की इलेक्ट्रिफाइड तकनीकों वाली कारें बाजार में उतारी जा रही हैं। यहां हम जानेंगे EV, Hybrid, PHEV और REEV में क्या अंतर है?

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EV vs Hybrid vs PHEV vs REEV: Understanding Key Differences Between Electrified Cars
Car Technologies - फोटो : Amar Ujala

भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में कार निर्माताओं का ध्यान अब केवल 'इलेक्ट्रिक-ओनली' (सिर्फ इलेक्ट्रिक) गाड़ियों से हटकर 'इलेक्ट्रिक-फर्स्ट' (यानी इलेक्ट्रिक को प्राथमिकता देने वाली) तकनीकों की ओर तेजी से बढ़ रहा है। हाल ही में जेएसडब्ल्यू एमजी (JSW MG) द्वारा पेश की गई 'ADAPT' तकनीक इसका एक ताजा उदाहरण है।

ADAPT का पूरा नाम 'Advance Drive Architecture Platform Technology' है। यह दावा किया जा रहा है कि यह भारत का पहला ऐसा अनोखा प्लेटफॉर्म है जो एक ही फ्रेमवर्क (ढांचे) पर चार अलग-अलग तरह के इलेक्ट्रिफाइड पावरट्रेन (इंजन और ड्राइविंग सिस्टम) को सपोर्ट कर सकता है। इनमें BEVs, HEVs, PHEVs और REEVs शामिल हैं।

आइए, आसान शब्दों में समझते हैं कि ये चारों तकनीकें क्या हैं और एक-दूसरे से कितनी अलग हैं। 

EV vs Hybrid vs PHEV vs REEV: Understanding Key Differences Between Electrified Cars
Mercedes-Benz EQS Sedan - फोटो : Mercedes-Benz

1. BEVs (बैटरी इलेक्ट्रिक व्हीकल्स) क्या होते हैं?

यह पूरी तरह से पारंपरिक इलेक्ट्रिक गाड़ियां होती हैं, जो पूरी तरह बैटरी पर चलती हैं।

  • काम करने का तरीका:
    इन कारों में कोई पेट्रोल या डीजल इंजन नहीं होता। इन्हें चलाने के लिए केवल एक बड़ी बैटरी होती है। जिसे किसी बाहरी बिजली के स्रोत (प्लग या चार्जर) से चार्ज करना पड़ता है।

  • बैटरी का गणित:
    कार की बैटरी जितनी बड़ी होगी, गाड़ी एक बार चार्ज करने पर उतनी ही लंबी दूरी (रेंज) तय करेगी। हालांकि, बैटरी का आकार बढ़ने से गाड़ी की कीमत और उसका वजन दोनों ही बढ़ जाते हैं।

  • भारतीय बाजार में उदाहरण:
    भारत में इस रेंज की शुरुआत छोटे आकार की MG Comet (बैटरी: 17.3 kWh, कीमत: 7.63 लाख रुपये) से होती है और यह लग्जरी श्रेणी की Mercedes-Benz EQS 450 SUV (बैटरी: 122 kWh, कीमत: 1.33 करोड़ रुपये) तक जाती है।

EV vs Hybrid vs PHEV vs REEV: Understanding Key Differences Between Electrified Cars
Toyota Urban Cruiser Hyryder - फोटो : Toyota

2. HEVs (हाइब्रिड इलेक्ट्रिक व्हीकल्स) क्या होते हैं?

इन्हें 'स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड' गाड़ियां भी कहा जाता है, जो पेट्रोल और बिजली दोनों के तालमेल से चलती हैं।

  • काम करने का तरीका:
    इन कारों में एक बहुत छोटी बैटरी (1 से 2 kWh) और एक पेट्रोल इंजन होता है। पेट्रोल इंजन कार के पहियों को घुमाता भी है और साथ ही गाड़ी चलते-चलते इस छोटी बैटरी को खुद-ब-खुद चार्ज भी करता रहता है।

  • इलेक्ट्रिक मोड पर सफर:
    जब बैटरी पूरी तरह चार्ज हो जाती है, तो इंजन बंद हो जाता है और बैटरी एक मोटर के जरिए कार को कुछ किलोमीटर तक इलेक्ट्रिक मोड पर चलाती है। इसके बाद जैसे ही बैटरी डिस्चार्ज होती है, यह साइकिल (चक्र) दोबारा शुरू हो जाता है।

  • शानदार माइलेज और उदाहरण:
    इस अनूठी तकनीक के कारण इन गाड़ियों का माइलेज (ईंधन दक्षता) अविश्वसनीय रूप से बेहतरीन होता है। भारत में Honda City e:HEV और Toyota Hyryder Hybrid जैसी कारें इसके बड़े उदाहरण हैं। जो 15-20 लाख रुपये की रेंज में आती हैं और 27-28 किमी/लीटर तक का जबरदस्त माइलेज देती हैं।

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EV vs Hybrid vs PHEV vs REEV: Understanding Key Differences Between Electrified Cars
BYD Seal - फोटो : Amar Sharma

3. PHEVs (प्लग-इन हाइब्रिड इलेक्ट्रिक व्हीकल्स) क्या होते हैं?

यह तकनीक पारंपरिक हाइब्रिड और पूरी तरह इलेक्ट्रिक कार का एक बेहतरीन मिश्रण है।

  • काम करने का तरीका:
    इन कारों में सामान्य हाइब्रिड के मुकाबले काफी बड़ी बैटरी (20 kWh या उससे अधिक) होती है और साथ में एक पेट्रोल इंजन भी दिया जाता है।

  • शहर और हाईवे के लिए दोहरा फायदा:
    शहर के भीतर रोजमर्रा की ड्राइविंग के लिए आप इस कार को किसी बाहरी पावर सोर्स (प्लग) से चार्ज कर सकते हैं। और इसे पूरी तरह इलेक्ट्रिक मोड पर लगभग 100 किलोमीटर तक चला सकते हैं। वहीं जब आप हाईवे पर लंबी दूरी के सफर पर निकलते हैं, तो इसका पेट्रोल इंजन काम संभाल लेता है।

  • भारत में आने वाले मॉडल:
    जल्द ही भारतीय बाजार में इस तकनीक से लैस Mercedes-Benz S-Class PHEV और BYD Seal U PHEV जैसी शानदार कारें दस्तक देने वाली हैं।

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EV vs Hybrid vs PHEV vs REEV: Understanding Key Differences Between Electrified Cars
Electric Car - फोटो : Freepik

4. REEVs (रेंज एक्सटेंडर इलेक्ट्रिक व्हीकल्स) क्या होते हैं?

यह एक अनोखी और नई तकनीक है, जिसमें गाड़ी चलती तो बिजली से है लेकिन उसका जनरेटर पेट्रोल से चलता है।

  • काम करने का तरीका:
    इन कारों में पहियों को घुमाने का पूरा काम सिर्फ और सिर्फ इलेक्ट्रिक मोटर (बैटरी) ही करती है। जो इन्हें बिल्कुल एक शुद्ध इलेक्ट्रिक कार (BEV) जैसा अहसास देती है।

  • पेट्रोल इंजन का अनोखा रोल:
    इस कार में भी एक पेट्रोल इंजन होता है, लेकिन वह कभी भी सीधे पहियों को नहीं घुमाता। इसका पेट्रोल इंजन केवल एक 'ऑनबोर्ड जनरेटर' की तरह काम करता है। जिसका एकमात्र काम चलती गाड़ी में बैटरी को लगातार चार्ज करना होता है।

  • भविष्य की तैयारी:
    फिलहाल भारतीय बाजार में कोई भी REEV गाड़ी बिक्री के लिए उपलब्ध नहीं है। लेकिन मारुति सुजुकी और एमजी जैसी कार निर्माता कंपनियां जल्द ही इस तकनीक वाली कारें भारत में लॉन्च करने की बड़ी योजना बना रही हैं।

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