Flex Fuel Car India: देश की पहली फ्लेक्स-फ्यूल कार हुई लॉन्च, जानें इसमें क्या-क्या है खास
Maruti Suzuki Flex Fuel Car: भारत में प्रदूषण कम करने और महंगे कच्चे तेल के आयात को रोकने की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम उठाया गया है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने इंडिया गैस फ्लेक्स इवेंट में मारुति सुजुकी की देश की पहली फ्लेक्स-फ्यूल कार (Wagon R) को आधिकारिक तौर पर लॉन्च कर दिया है। आइए जानते हैं इस नई तकनीक और कार की खासियतों के बारे में विस्तार से...
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विस्तार
इंडिया गैस फ्लेक्स इवेंट के दौरान केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने मारुति सुजुकी की पहली फ्लेक्स-फ्यूल कार से पर्दा उठाया है। इस मौके पर उन्होंने साफ कहा कि भारत को अब वैकल्पिक ईंधन और बायोफ्यूल्स की तरफ तेजी से कदम बढ़ाना ही होगा। चूंकि देश का 40 फीसदी वायु प्रदूषण अकेले ट्रांसपोर्ट सेक्टर की वजह से होता है, इसलिए पर्यावरण को बचाने के लिए यह लॉन्चिंग काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इसके अलावा, भारत हर साल 22-23 लाख करोड़ रुपये का कच्चा तेल बाहर से मंगाता है। इस कार के आने से देश की विदेशी ईंधन पर निर्भरता कम होगी और 'आत्मनिर्भर भारत' के सपने को नई उड़ान मिलेगी।
जानिए इसमें क्या है खास?
मारुति सुजुकी ने अपनी सबसे ज्यादा बिकने वाली हैचबैक वैगनआर को इस नए और एडवांस अवतार में पेश किया है। आइए नजर डालते हैं इसके सबसे खास फीचर्स और मैकेनिज्म पर:
- फ्लेक्स-फ्यूल इंजन (ICE): इस कार की सबसे बड़ी खासियत इसका इंटरनल कंबशन इंजन को माना जा रही है। यह सामान्य पेट्रोल के साथ-साथ E85 (85% एथेनॉल और 15% पेट्रोल मिश्रण) वाले ईंधन पर भी पूरी ताकत से दौड़ सकती है।
- मजबूत और अपडेटेड पार्ट्स: एथेनॉल के इस्तेमाल को सुरक्षित बनाने के लिए कार के फ्यूल सिस्टम, इंजन कंपोनेंट्स और इलेक्ट्रॉनिक्स को खास तौर पर अपग्रेड किया गया है, ताकि कार की लाइफ और परफॉर्मेंस पर कोई असर न पड़े।
- शानदार परफॉर्मेंस और बचत: यह कार न सिर्फ कार्बन उत्सर्जन (प्रदूषण) को भारी मात्रा में कम करेगी, बल्कि ग्राहकों के लिए पेट्रोल के मुकाबले बेहद किफायती साबित हो सकती है।
वायु प्रदूषण से निपटने के लिए जरूरी है नई ईंधन तकनीक
- कार्यक्रम में बोलते हुए नितिन गडकरी ने कहा कि वायु प्रदूषण देश के सामने एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बन चुका है। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए कहा कि स्वच्छ ईंधनों की ओर बढ़ना समय की मांग है। मंत्री का कहना है कि देश में होने वाले कुल वायु प्रदूषण का करीब 40 प्रतिशत हिस्सा परिवहन क्षेत्र से जुड़ा हुआ है।
- हालांकि यह क्षेत्र उनके मंत्रालय के अंदर आता है, इसलिए प्रदूषण को कम करना उनकी सबसे बड़ी जिम्मेदारियों में से एक है। उन्होंने यह भी माना कि फ्लेक्स फ्यूल वाहनों का विस्तार इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।
📍𝑵𝒆𝒘 𝑫𝒆𝒍𝒉𝒊 | Launching Maruti Suzuki's First Flex Fuel Car in India. https://t.co/9EqeYL0nap
— Nitin Gadkari (@nitin_gadkari) June 4, 2026
22 लाख करोड़ रुपये के तेल आयात पर चिंता
- इस दौरान गडकरी ने आर्थिक पहलू पर भी जोर दिया। उन्होंने बताया कि भारत हर साल फॉसिल फ्यूल के आयात पर करीब 22 से 23 लाख करोड़ रुपये खर्च करता है। ऐसे में आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए तेल आयात को कम करना बेहद जरूरी है।
- उन्होंने कहा कि अगर देश को आयात घटाना और निर्यात बढ़ाना है तो वैकल्पिक ईंधनों और बायोफ्यूल्स पर ज्यादा से ज्यादा काम करना होगा। यही आगे चलकर भारत की ऊर्जा सुरक्षा का आधार बन सकता है।
ऑटो बाजार में तीसरे स्थान पर पहुंचा भारत
- नितिन गडकरी ने जानकारी देते हुए कहा कि उद्योग का आकार लगभग 12 लाख करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर करीब 23 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। उन्होंने बताया कि भारत अब दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऑटोमोबाइल बाजार बन चुका है।
- पहले भारत सातवें स्थान पर था, लेकिन बाद में जापान को पीछे छोड़ते हुए तीसरे स्थान तक पहुंच गया। मंत्री ने यह भी कहा कि ऑटोमोबाइल उद्योग ने करीब 4.5 करोड़ युवाओं को रोजगार दिया है और जीएसटी के माध्यम से केंद्र व राज्य सरकारों को सबसे अधिक राजस्व देने वाले प्रमुख उद्योगों में शामिल है।
आखिर क्या है फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक?
फ्लेक्स-फ्यूल वाहन ऐसे इंटरनल कंबशन इंजन से लैस होते हैं जो पेट्रोल के साथ इथेनॉल या मेथनॉल मिश्रित ईंधन पर भी चल सकते हैं। यह तकनीक पारंपरिक ईंधनों की तुलना में अधिक पर्यावरण-अनुकूल मानी जाती है और आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम करने में मदद करती है।
मारुति सुजुकी के CEO ने क्या कहा?

- इस मौके पर मारुति सुजुकी इंडिया के प्रबंध निदेशक एवं CEO हिसाशी ताकेउची ने कहा कि फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक भारत के दो बड़े लक्ष्यों को पूरा करने में मदद कर सकती है। कच्चे तेल के आयात में कमी और कार्बन उत्सर्जन में कटौती।
- उन्होंने कहा कि फ्लेक्स-फ्यूल केवल ऑटोमोबाइल उद्योग के लिए नहीं बल्कि किसानों, इथेनॉल उत्पादकों, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पर्यावरण के लिए भी फायदेमंद है।
- मारुति सुजुकी ने अपनी Wagon R Flex-Fuel को पेश करते हुए इस दिशा में पहला कदम उठाया है। ताकेउची का मानना है कि जब इकोसिस्टम पूरी तरह विकसित नहीं हुआ हो, तब बाजार के अग्रणी खिलाड़ी की जिम्मेदारी होती है कि वह शुरुआत करे और बाकी उद्योग को प्रेरित करे।
बड़े स्तर पर अपनाने के लिए बनेगा पूरा इकोसिस्टम
- हालांकि ताकेउची ने स्वीकार किया कि फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक को देशभर में अपनाने में समय लगेगा। इसके लिए ईंधन की उपलब्धता, अधिक फ्लेक्स-फ्यूल मॉडल, ग्राहकों में जागरूकता और उपयुक्त मूल्य निर्धारण जैसी कई चुनौतियों पर मिलकर काम करना होगा।
- सीईओ ने ऑयल मार्केटिंग कंपनियों, इथेनॉल निर्माताओं और अन्य सभी संबंधित पक्षों से इस मिशन में भागीदारी की अपील की।
EV, हाइब्रिड, CNG और अब फ्लेक्स-फ्यूल पर भी फोकस
- मारुति सुजुकी ने स्पष्ट किया कि कंपनी कार्बन उत्सर्जन कम करने के लिए मल्टी-पाथवे पर काम कर रही है। इसमें इलेक्ट्रिक वाहन (EV), स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड, CNG और फ्लेक्स-फ्यूल जैसी तकनीकों को शामिल किया गया है। ताकेउची ने कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) को कार्बन न्यूट्रल मोबिलिटी का प्रभावी माध्यम बताया।
- उन्होंने जानकारी दी कि कंपनी नौ CBG प्लांट स्थापित करने की योजना पर काम कर रही है, जिनमें से दो पहले ही शुरू हो चुके हैं। इसके अलावा मारुति सुजुकी जरूरतों को देखते हुए हाइड्रोजन आधारित तकनीकों पर भी काम कर रही है।