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रिकॉर्ड ऊंचाई पर भारतीय टायर निर्यात: वैश्विक चुनौतियों के बीच 9% की वृद्धि, किस देश की कितनी रही हिस्सेदारी?
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Jagriti
Updated Thu, 04 Jun 2026 10:19 AM IST
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सार
Indian Tyre Export: अंतरराष्ट्रीय बाजारों में उतार-चढ़ाव और बढ़ती लागत के बावजूद वित्तीय वर्ष 2025-26 में भारत का टायर निर्यात 27,312 करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है, जो अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा माना जा रहा है। आइए जानते हैं कि वैश्विक सप्लाई चेन संकट के बावूजद कंपनियों ने ये सफलता कैसे हासिल की?
भारतीय टायर निर्यात में 9 प्रतिशत की वृद्धि
- फोटो : एआई जनरेटेड
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विस्तार
Tyre Export Record: वाणिज्य मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार, भारतीय टायर उद्योग ने वैश्विक स्तर पर शानदार प्रदर्शन किया है। ऑटोमोटिव टायर मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन यानी एटीएमए की ओर से जारी रिपोर्ट के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2025-26 में देश का कुल टायर निर्यात 27,312 करोड़ रुपये रहा। यह पिछले वित्तीय वर्ष (FY2024-25) के मुकाबले 9% अधिक है। पिछले साल कुल 25,057 करोड़ रुपये टायरों का निर्यात हुआ था।
चुनौतियों के बीच कैसे छुआ रिकॉर्ड स्तर?
ऑटोमोटिव टायर मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के चेयरमैन अरुण माम्मेन का कहना है कि दुनिया के कई हिस्सों में सामान की सप्लाई प्रभावित रही, माल ढुलाई का खर्च बढ़ा और कई देशों में व्यापार को लेकर अनिश्चितता भी बनी रही। लेकिन इन सभी चुनौतियों के बावजूद भारतीय टायर उद्योग का निर्यात लगातार बढ़ा है, जो इसकी मजबूती को दिखाता है।
कहां सबसे ज्यादा बिक्री हुई?
यूरोप और ब्राजील में भी बढ़ी मांग
भारतीय टायरों की मांग अमेरिका तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि यूरोप और दूसरे बड़े बाजारों में भी अपनी मजबूत पहचान बनाई हैं। जर्मनी में भी इसकी काफी डिमांड रही और इसी के साथ यह दूसरा सबसे बड़ा बाजार बना।
यहां कुल निर्यात का 7 फीसदी हिस्सा गया। इसके बाद इटली और ब्राजील में 5-5 फीसदी तथा फ्रांस में 4 फीसदी हिस्सेदारी दर्ज की गई।
उद्योग ने लगाए 30,000 करोड़
चुनौतियों के बीच कैसे छुआ रिकॉर्ड स्तर?
ऑटोमोटिव टायर मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के चेयरमैन अरुण माम्मेन का कहना है कि दुनिया के कई हिस्सों में सामान की सप्लाई प्रभावित रही, माल ढुलाई का खर्च बढ़ा और कई देशों में व्यापार को लेकर अनिश्चितता भी बनी रही। लेकिन इन सभी चुनौतियों के बावजूद भारतीय टायर उद्योग का निर्यात लगातार बढ़ा है, जो इसकी मजबूती को दिखाता है।
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कहां सबसे ज्यादा बिक्री हुई?
- भारतीय टायरों के लिए अमेरिका सबसे बड़ा बाजार साबित हुआ। यहां पर 4,082 करोड़ रुपये के टायर निर्यात किए गए। कुल निर्यात में अमेरिका की हिस्सेदारी 15 फीसदी रही। हालांकि पिछले वर्ष के मुकाबले थोड़ा सा कम है, क्योंकि वित्त वर्ष 2024-25 में इसकी हिस्सेदारी 17 फीसदी थी। इसकी एक बड़ी वजह अमेरिका की ओर से भारतीय टायरों पर आयात शुल्क बढ़ाना माना जा रहा है।
- अगस्त 2025 में अमेरिकी प्रशासन ने भारतीय टायरों पर टैरिफ 25 फीसदी से बढ़ाकर 50 फीसदी कर दिया था। इससे भारतीय टायर अमेरिकी बाजार में अपेक्षाकृत महंगे हो गए और दूसरे देशों के उत्पादों को फायदा मिला। हालांकि फरवरी 2026 में अमेरिका ने अधिकतर भारतीय प्रोडक्ट्स पर टैरिफ घटाकर 18 फीसदी कर दिया था, जिससे भारतीय निर्यातकों को कुछ राहत मिली।
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यूरोप और ब्राजील में भी बढ़ी मांग
भारतीय टायरों की मांग अमेरिका तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि यूरोप और दूसरे बड़े बाजारों में भी अपनी मजबूत पहचान बनाई हैं। जर्मनी में भी इसकी काफी डिमांड रही और इसी के साथ यह दूसरा सबसे बड़ा बाजार बना।
यहां कुल निर्यात का 7 फीसदी हिस्सा गया। इसके बाद इटली और ब्राजील में 5-5 फीसदी तथा फ्रांस में 4 फीसदी हिस्सेदारी दर्ज की गई।
उद्योग ने लगाए 30,000 करोड़
- अरुण माम्मेन के मुताबिक, कोरोना महामारी के बाद भारतीय टायर उद्योग ने तेजी से विकास किया है। पिछले चार से पांच वर्षों में कंपनियों ने नए प्लांट लगाने और पुराने संयंत्रों का विस्तार करने पर करीब 30,000 करोड़ रुपये का निवेश किया है। उनका कहना है कि यह निवेश भारत की अर्थव्यवस्था और देश के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर कंपनियों के भरोसे को दर्शाता है।
- भारत का टायर उद्योग आज करीब एम लाख करोड़ रुपये के सालाना कारोबार वाला सेक्टर बन चुका है। यह देश के सबसे बड़े विनिर्माण उद्योगों में शामिल है और ऑटोमोबाइल सेक्टर की जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ निर्यात से भी देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रहा है।