CNG या Electric Car: 15 साल में किस पर होगा कम खर्च, लाखों रुपये बचाने वाला पूरा गणित समझिए
Which Saves More Money CNG vs Electric Car: अगर आप नई कार खरीदने का प्लान बना रहे हैं और रोजाना ऑफिस या अन्य काम के लिए लंबी दूरी तय करते हैं, तो सीएनजी और इलेक्ट्रिक कार के बीच सही चुनाव करना आसान नहीं है। इस लेख में हमनें 15 साल के आधार पर शुरुआती कीमत, रनिंग कॉस्ट, सर्विस, बैटरी रिप्लेसमेंट, रीसेल वैल्यू और लॉन्ग-ट्रिप जैसे सभी अहम पहलुओं की तुलना की है।
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नई कार लेने का सोच रहे हैं और प्लान उसे पूरे 15 साल तक चलाने का है? अगर हां, तो सिर्फ शोरूम की कीमत देखकर फैसला मत कीजिएगा। आज के समय में पेट्रोल-डीजल के महंगे होने के कारण लोग सीएनजी (CNG) और इलेक्ट्रिक कार (ईवी) की तरफ जा रहे हैं। लेकिन दोनों में से लंबे समय के लिए कौन सी कार आपकी जेब पर कम भारी पड़ेगी? आइए, आसान गणित में समझते हैं कि 15 साल के लिए आपके बजट और जरूरत के हिसाब से सीएनजी और ईवी में से कौन सा विकल्प बेस्ट है।
शोरूम में कौन सी सस्ती पड़ती है?
जब आप कार खरीदने जाते हैं, तो सीएनजी कारें आपके बजट में आसानी से फिट हो जाती हैं। वहीं, अगर आप उसी कार का इलेक्ट्रिक मॉडल लेते हैं, तो वह आपको 2 से 3 लाख रुपये तक महंगा पड़ता है। यानी ईवी लेने के लिए आपको शुरुआत में ही ज्यादा पैसे या बड़ा लोन लेना होगा।
15 साल का सीधा गणित
ईवी शुरुआत में महंगी जरूर है, लेकिन इसे चलाने का खर्च बेहद कम है। मान लीजिए आप साल में 15,000 किलोमीटर गाड़ी चलाते हैं, तो 15 साल में आप कुल 2,25,000 किलोमीटर चलेंगे। इसका गणित कुछ ऐसा होगा:
- इलेक्ट्रिक कार (ईवी): घर पर चार्ज करने पर 1 किमी का खर्च लगभग ₹1.5 आता है। यानी 15 साल का कुल चार्जिंग खर्च = ₹3,37,500
- सीएनजी कार (सीएनजी): 1 किमी का खर्च लगभग ₹4 आता है। यानी 15 साल का कुल सीएनजी खर्च = ₹9,00,000
- सीधा फायदा: ईंधन के मामले में ईवी आपको 15 साल में करीब 5.5 लाख रुपये की सीधी बचत कराती है।
सर्विस और मेंटेनेंस
- सीएनजी कार: इसमें पेट्रोल कार की तरह ही इंजन, क्लच और गियरबॉक्स होता है। समय-समय पर इंजन ऑयल बदलना और सीएनजी किट की टेस्टिंग कराना पड़ता है, जिसमें अच्छा-खासा खर्च आता है।
- इलेक्ट्रिक कार: इसमें कोई इंजन नहीं होता, सिर्फ मोटर और बैटरी होती है। इसलिए न इंजन ऑयल बदलने का झंझट और न ही महंगे पार्ट्स खराब होने का डर। इसकी सालाना सर्विस बेहद सस्ती होती है।
बैटरी का खर्च
ईवी में सबसे बड़ा खर्च उसकी बैटरी का है। कंपनियां बैटरी पर 8 साल (या 1.6 लाख किमी) की वारंटी देती हैं। 15 साल कार चलाने का मतलब है कि आपको कम से कम एक बार बैटरी बदलवानी पड़ सकती है। आज के समय में नई बैटरी का खर्च 2 से 4 लाख रुपये तक आता है। यानी आपने जो पैसा ईंधन में बचाया था, उसका एक बड़ा हिस्सा बैटरी बदलने में जा सकता है।
लंबे सफर की टेंशन और रीसेल वैल्यू
- लॉन्ग ट्रिप: सीएनजी भरवाने में 5 मिनट लगते हैं और हाईवे पर इसके पंप आसानी से मिल जाते हैं। वहीं, ईवी को चार्ज होने में 45-60 मिनट लगते हैं और लंबे सफर के लिए आपको पहले से चार्जिंग स्टेशन ढूंढकर प्लानिंग करनी पड़ती है।
- रीसेल वैल्यू: पुरानी सीएनजी कार आसानी से बिक जाती है। लेकिन पुरानी ईवी की कीमत इस बात पर तय होगी कि उस वक्त उसकी बैटरी की हालत कैसी है।
| फीचर्स | सीएनजी कार (CNG) | इलेक्ट्रिक कार (EV) |
| शुरुआती कीमत | बजट में आ जाती है | 2-3 लाख रुपये महंगी |
| चलाने का खर्च (1 किमी) | ₹3.50 से ₹4.00 | ₹1.00 से ₹1.50 |
| सर्विस का खर्च | मध्यम (इंजन ऑयल आदि) | बेहद कम |
| बूट स्पेस | सिलेंडर की वजह से कम मिलता है | पूरा स्पेस मिलता है |
| लॉन्ग ट्रिप (हाईवे) | 5 मिनट में गैस फुल, नो टेंशन | चार्जिंग स्टेशन ढूंढने की प्लानिंग जरूरी |
| सबसे बड़ा रिस्क | इंजन और किट की टेस्टिंग | बैटरी बदलने का लाखों का खर्च |
आपके लिए क्या है बेहतर विकल्प?
आपको इलेक्ट्रिक कार (ईवी) लेनी चाहिए अगर:
- आप रोजाना 50-60 किलोमीटर से ज्यादा चलते हैं।
- आपकी ड्राइविंग ज्यादातर शहर के ट्रैफिक में होती है।
- आपके घर या ऑफिस में कार चार्ज करने की सुरक्षित जगह है।
- आपको सीएनजी कार लेनी चाहिए अगर:
- आपका कार खरीदने का बजट लिमिटेड है।
- आप साल भर में 10,000 किलोमीटर से कम चलते हैं।
- आप अक्सर अपनी कार से हाईवे पर लंबी ट्रिप के लिए जाते हैं और चार्जिंग की झंझट से बचना चाहते हैं।