Automobile Market: महंगी होती कारें, बढ़ता ईवी क्रेज और AI का असर... जानिए कैसे बदल रहा है दुनिया का ऑटो बाजार
बढ़ती महंगाई और वित्तीय चिंताओं के बीच वैश्विक ऑटोमोटिव और परिवहन क्षेत्र में एक अभूतपूर्व बदलाव देखा जा रहा है। मैकिन्से की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, जेब पर पड़ता आर्थिक दबाव, इलेक्ट्रिक वाहनों के प्रति बढ़ता रुझान, उन्नत प्रौद्योगिकियां और मोबिलिटी की बदलती प्राथमिकताएं वैश्विक वाहन बाजार का नया चेहरा तय कर रही हैं।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
दुनियाभर में ऑटोमोबाइल और परिवहन क्षेत्र तेजी से बदल रहा है। वाहन खरीदने वालों की प्राथमिकताएं अब पहले जैसी नहीं रहीं। बढ़ती कीमतों के कारण लोग बजट को लेकर ज्यादा सतर्क हो गए हैं, वहीं इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और नई मोबिलिटी सेवाओं में दिलचस्पी लगातार बढ़ रही है।
मैकिन्से (McKinsey) की हालिया रिपोर्ट में कहा गया है कि किफायती विकल्प, नई तकनीक और बदलती मोबिलिटी जरूरतें आने वाले समय में वैश्विक ऑटो बाजार की दिशा तय करेंगी।
यह रिपोर्ट चीन, जर्मनी, जापान, यूनाइटेड किंगडम और अमेरिका के 20,000 से अधिक मोबिलिटी यूजर्स पर किए गए सर्वे के आधार पर तैयार की गई है।
महंगाई और बजट की चिंताएं खरीदारों के फैसलों को कैसे प्रभावित कर रही हैं?
रिपोर्ट बताती है कि आर्थिक दबाव अब लोगों के वाहन खरीदने के फैसलों को सीधे प्रभावित कर रहा है। कई ग्राहक नई कार खरीदने की योजना तो बना रहे हैं, लेकिन बजट की वजह से अपने फैसले बदल रहे हैं।
32% लोगों ने खरीद टालने की बात कही: सर्वे में शामिल करीब एक-तिहाई लोगों ने कहा कि आर्थिक कारणों से वे अपनी अगली गाड़ी की खरीद फिलहाल टाल सकते हैं।
45% छोटे वाहन पर विचार कर रहे हैं: लगभग आधे उत्तरदाताओं ने कहा कि बजट के भीतर रहने के लिए वे अपनी पहले की योजना की तुलना में छोटा वाहन खरीदने पर विचार करेंगे।
क्या ग्राहक अब गुणवत्ता से समझौता करेंगे?
बजट की चिंता बढ़ने के बावजूद ग्राहक तकनीक और गुणवत्ता के मामले में समझौता करने के पक्ष में नहीं दिख रहे हैं। उनके लिए कीमत के साथ-साथ आधुनिक फीचर्स भी उतने ही महत्वपूर्ण बने हुए हैं।
60% के लिए 'वैल्यू फॉर मनी' सबसे अहम: सर्वे में शामिल 60 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वाहन खरीदते समय उन्हें सबसे ज्यादा महत्व उस उत्पाद को मिलता है, जो कीमत के मुकाबले बेहतर मूल्य प्रदान करे।
एडवांस फीचर्स की मांग बरकरार: आर्थिक दबाव के बावजूद उपभोक्ता आधुनिक तकनीक और नए फीचर्स से लैस वाहन ही चाहते हैं।
किन देशों में EV की मांग सबसे ज्यादा है?
रिपोर्ट के मुताबिक इलेक्ट्रिक वाहनों की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है, हालांकि अलग-अलग देशों में इसकी रफ्तार अलग है।
चीन सबसे आगे: 80 प्रतिशत से अधिक लोगों ने कहा कि उनका अगला वाहन इलेक्ट्रिक होने की संभावना है।
यूरोप में लगभग आधे खरीदार तैयार: यूरोप में करीब 50 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने ईवी खरीदने में दिलचस्पी दिखाई।
जापान: यहां 37 प्रतिशत लोगों ने इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने की संभावना जताई।
अमेरिका: अमेरिका में यह आंकड़ा 36 प्रतिशत रहा।
EV खरीदने वालों की सोच में क्या बदलाव आया है?
रिपोर्ट बताती है कि अब इलेक्ट्रिक वाहन केवल शुरुआती तकनीक अपनाने वाले ग्राहकों तक सीमित नहीं हैं। धीरे-धीरे यह आम ग्राहकों की पसंद भी बनते जा रहे हैं।
मिडिल क्लास परिवार भी जुड़ रहे हैं: अब मध्यमवर्गीय परिवार और व्यवहारिक सोच रखने वाले ग्राहक भी संभावित ईवी खरीदारों में शामिल हो रहे हैं।
रेंज एंग्जायटी कम हुई: पहले की तुलना में बैटरी खत्म होने की चिंता काफी कम हुई है।
फिर भी कुछ चिंताएं बाकी हैं: चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, बैटरी की लंबी उम्र और वाहन की कीमत अभी भी कई ग्राहकों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।
AI और ADAS क्यों बन रहे हैं नए गेम चेंजर?
रिपोर्ट के अनुसार अब केवल इंजन या डिजाइन ही ग्राहकों का फैसला तय नहीं करेंगे। AI, एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम (ADAS) और डिजिटल व्हीकल इकोसिस्टम जैसी तकनीकें भी कंपनियों के बीच बड़ा अंतर पैदा कर रही हैं।
बेहतर सेल्फ-ड्राइविंग के लिए ब्रांड बदलने को तैयार: सर्वे में शामिल हर चार में से लगभग एक व्यक्ति ने कहा कि यदि किसी दूसरे ब्रांड में बेहतर सेल्फ-ड्राइविंग तकनीक मिलती है तो वह ब्रांड बदल सकता है।
चीन में सबसे ज्यादा दिलचस्पी: सेल्फ-ड्राइविंग तकनीक को लेकर सबसे अधिक उत्साह चीन के ग्राहकों में देखा गया।
क्या ग्राहकों की ब्रांड लॉयल्टी कमजोर पड़ रही है?
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि अब ग्राहक पहले की तुलना में किसी एक ब्रांड से लंबे समय तक जुड़े रहने के लिए उतने प्रतिबद्ध नहीं हैं।
28% ग्राहक ब्रांड बदल सकते हैं: सर्वे में शामिल 28 प्रतिशत लोगों ने कहा कि अगली बार वाहन खरीदते समय वे दूसरे ब्रांड का विकल्प चुन सकते हैं।
चीनी कंपनियां तेजी से आकर्षित कर रहीं ग्राहक: प्रतिस्पर्धी कीमत और आधुनिक तकनीक के कारण नए ऑटोमोबाइल ब्रांड, खासकर चीन की कंपनियां, ग्राहकों का ध्यान तेजी से अपनी ओर खींच रही हैं।
वाहन खरीदने का तरीका कैसे बदल रहा है?
नई पीढ़ी के ग्राहक अब केवल शोरूम पर निर्भर नहीं हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म और ऑनलाइन टूल्स वाहन खरीदने की प्रक्रिया का अहम हिस्सा बनते जा रहे हैं।
AI टूल्स का बढ़ता इस्तेमाल: युवा ग्राहक और ईवी खरीदने वाले लोग वाहन चुनने की प्रक्रिया में AI आधारित टूल्स का अधिक उपयोग कर रहे हैं।
ओम्नीचैनल खरीदारी का बढ़ता चलन: ग्राहक ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों का इस्तेमाल करके वाहन खरीदने का फैसला ले रहे हैं।
भविष्य की मोबिलिटी कैसी होगी?
रिपोर्ट के मुताबिक आने वाले वर्षों में केवल निजी वाहन ही नहीं, बल्कि नई मोबिलिटी सेवाएं भी परिवहन व्यवस्था का अहम हिस्सा बनेंगी।
शेयर्ड ऑटोनॉमस वाहन: साझा उपयोग वाले स्वचालित वाहनों की भूमिका बढ़ने की संभावना है।
माइक्रोमोबिलिटी का विस्तार: छोटे दूरी के परिवहन विकल्प भी भविष्य के मोबिलिटी इकोसिस्टम का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकते हैं।
McKinsey ने कंपनियों को क्या सलाह दी?
रिपोर्ट के अनुसार आने वाले समय में वही ऑटोमोबाइल निर्माता और मोबिलिटी सेवा प्रदाता प्रतिस्पर्धा में आगे रह पाएंगे, जो किफायती कीमत, एडवांस टेक्नोलॉजी, ग्राहकों के लिए व्यक्तिगत अनुभव और लचीले मोबिलिटी समाधान, इन सभी का संतुलित मेल ग्राहकों को उपलब्ध करा सकेंगे।
बदलती उपभोक्ता अपेक्षाओं के बीच कंपनियों के लिए केवल अच्छा उत्पाद बनाना पर्याप्त नहीं होगा। बल्कि ग्राहकों की नई जरूरतों के अनुसार खुद को लगातार विकसित करना भी उतना ही जरूरी होगा।