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RC: वाहन खरीदा, लेकिन छह महीने तक आरसी ट्रांसफर नहीं कराई तो बदल सकता है मालिकाना हक! सरकार लाई मसौदा नियम

Mon, 27 Jul 2026 01:25 PM IST
Amar Sharma ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amar Sharma Updated Mon, 27 Jul 2026 01:25 PM IST
सार

वाहन खरीदने के बाद अगर खरीदार तय समय के भीतर रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेटअपने नाम ट्रांसफर नहीं कराता है, तो भविष्य में उसे बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है। सरकार ने एक ऐसा नया नियम प्रस्तावित किया है। यदि यह प्रस्ताव अंतिम रूप में लागू होता है, तो वाहन स्वामित्व ट्रांसफर की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक व्यवस्थित और जवाबदेह बन सकती है। अब तक कई खरीदार आरसी अपने नाम ट्रांसफर कराए बिना ही वाहन का इस्तेमाल करते रहे हैं।

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Vehicle Ownership to Automatically Revert to Dealers If Buyer Fails to Transfer RC Within 6 Months: Draft Rule
Vehicle Ownership Transfer - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

भारत में वाहन पंजीकरण प्रक्रिया में वर्षों से चली आ रही एक बड़ी खामी को दूर करने के लिए केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सरकार ने एक नए नियम का प्रस्ताव रखा है, जिसके तहत यदि कोई खरीदार वाहन खरीदने के 6 महीने के भीतर औपचारिक रूप से मालिकाना हक का ट्रांसफर पूरा नहीं करता है, तो उस वाहन का मालिकाना हक खुद-ब-खुद (स्वचालित रूप से) डीलर के नाम पर ट्रांसफर हो जाएगा।

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यह कदम भारत के वाहन बाजार में अक्सर देखी जाने वाली उस लापरवाही को खत्म करने के लिए उठाया गया है। जहां खरीदारी के बाद लंबे समय तक आरसी (रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट) ट्रांसफर नहीं कराई जाती है और क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) रिकॉर्ड में कानूनी देनदारियों का बोझ पुराने मालिक या डीलर पर ही बना रहता है। 

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वाहन स्वामित्व ट्रांसफर को लेकर सरकार का नया प्रस्तावित नियम क्या है?

सरकार के मसौदा प्रस्ताव के अनुसार, वाहन की आरसी और मालिकाना हक के ट्रांसफर को लेकर समय-सीमा और जवाबदेही तय की गई है:

  • 6 महीने की समय-सीमा:
    अगर कोई खरीदार वाहन खरीदने के बाद निर्धारित 6 महीने की अवधि के भीतर रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (आरसी) ट्रांसफर की प्रक्रिया पूरी नहीं करता है, तो वाहन का स्वामित्व स्वचालित रूप से उसी डीलर के पास वापस चला जाएगा (या माना जाएगा) जिससे वह खरीदा गया था।

  • मौजूदा समस्या का समाधान:
    भारत में वाहन खरीदने के बाद कई लोग औपचारिक ट्रांसफर प्रक्रिया में देरी करते हैं या इसे पूरी तरह छोड़ देते हैं। इससे आरटीओ रिकॉर्ड में वाहन से जुड़ी कानूनी जिम्मेदारियां पुराने मालिक या डीलर के नाम दर्ज रह जाती हैं। यह नियम इस खामी को दूर करेगा।

  • V2V कम्युनिकेशन का नया प्रस्ताव:
    इसी मसोदे के साथ, सरकार ने 1 अक्तूबर 2028 से सभी नई L, M और N श्रेणी के वाहनों के लिए अनिवार्य व्हीकल-टू-व्हीकल (V2V) कम्युनिकेशन तकनीक का भी प्रस्ताव रखा है।

Vehicle Ownership to Automatically Revert to Dealers If Buyer Fails to Transfer RC Within 6 Months: Draft Rule
Vehicle RC Transfer - फोटो : Freepik

स्वामित्व ट्रांसफर के लिए पात्रता के नए और कड़े नियम क्या हैं?

प्रस्ताव के तहत सरकार ने स्वामित्व हस्तांतरण की प्रक्रिया को और सख्त बनाते हुए कुछ अनिवार्य शर्तें जोड़ी हैं:

  • वैध दस्तावेजों की अनिवार्यता:
    वैध रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट, वैध बीमा (इंश्योरेंस), या प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र (पीयूसी सर्टिफिकेट) के बिना आने वाले वाहन अब मालिकाना हक ट्रांसफर के पात्र नहीं होंगे।

  • बकाया और पेंडिंग चालान पर रोक:
    जिन वाहनों पर कोई ट्रैफिक चालान पेंडिंग है या कर/टैक्स बकाया है, उनके ट्रांसफर पर तब तक रोक रहेगी जब तक कि ये सभी बकाए पूरी तरह चुकता न कर दिए जाएं।

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इस नए नियम का खरीदारों और डीलरों पर क्या असर पड़ेगा?

यह प्रस्ताव व्यक्तिगत खरीदारों और सेकेंड-हैंड वाहन डीलरों, दोनों के इकोसिस्टम पर सीधा असर डालेगा। और समय पर कागजी कार्रवाई पूरी करने की जवाबदेही तय करेगा:

  • डीलरों के लिए मजबूत इंसेंटिव:
    डीलरों के लिए यह नियम एक बड़ा प्रोत्साहन या प्रेशर बनाएगा कि वे लंबित आरसी ट्रांसफर के मामलों में खरीदारों के साथ लगातार फॉलो-अप करें।

  • जिम्मेदारी और देनदारी का जोखिम:
    अगर 6 महीने में ट्रांसफर पूरा नहीं होता है, तो वाहन के स्वामित्व के साथ-साथ उससे जुड़ी सभी कानूनी और वित्तीय देनदारियां भी वापस डीलर के सिर आ जाएंगी।

Vehicle Ownership to Automatically Revert to Dealers If Buyer Fails to Transfer RC Within 6 Months: Draft Rule
Vehicle RC Transfer - फोटो : AI

इस ड्राफ्ट नियम की वर्तमान स्थिति क्या है और इसका अंतिम स्वरूप कब तय होगा?

यह बदलाव अभी एक ड्राफ्ट नोटिफिकेशन के जरिए पेश किया गया है। जिसका मतलब है कि यह अभी कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है:

  • 30 दिनों का समय:
    सरकार ने नोटिफिकेशन जारी होने की तारीख से 30 दिनों की अवधि के भीतर डीलरों, उद्योग निकायों और आम जनता सहित सभी हितधारकों से सुझाव और प्रतिक्रियाएं मांगी हैं।

  • अंतिम नियम और समीक्षा:
    इस नियम का अंतिम स्वरूप सार्वजनिक और इंडस्ट्री से मिलने वाले फीडबैक पर निर्भर करेगा। सड़क परिवहन मंत्रालय द्वारा इन प्रतिक्रियाओं की समीक्षा के बाद आगे के ब्योरे सामने आएंगे।

इस नियम के पूरी तरह लागू होने पर क्या-क्या सुधार देखने को मिलेंगे?

एक बार अंतिम रूप से लागू हो जाने के बाद, यह नियम अनौपचारिक रूप से चल रही प्रक्रियाओं में बड़ी अनुशासनबद्धता लाएगा:

  • अनौपचारिक आदतों पर लगाम:
    अक्सर खरीदार अपने नाम पर आधिकारिक तौर पर आरसी ट्रांसफर कराए बिना ही वाहन चलाते रहते हैं। नया नियम इस ढिलाई को खत्म करेगा।

  • विवादों से मुक्ति:
    पुराने मालिक या डीलर से जुड़े पेंडिंग चालान, दुर्घटना से जुड़ी कानूनी देनदारियों, ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन और टैक्स बकाए को लेकर होने वाले कानूनी विवादों पर लगाम लगेगी।

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