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EV Retrofit: दिल्ली में ईवी रेट्रोफिटिंग पर सरकार व ऑटो उद्योग में तकरार, प्रदूषण घटाने का ये तरीका खतरनाक?

ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: जागृति Updated Sun, 18 Jan 2026 06:23 PM IST
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सार

Delhi EV Policy: दिल्ली सरकार की ईवी पॉलिसी 2.0 के तहत पुरानी पेट्रोल-डीजल कारों को इलेक्ट्रिक में बदलने के लिए 50 हजार रुपये की सब्सिडी का एलान होते ही ऑटो सेक्टर में बहस छिड़ गई है। जहां सरकार इसे प्रदूषण के खिलाफ ब्रह्मास्त्र मान रही है, वहीं कई बड़ी कंपनियां इसे सुरक्षा से खिलवाड़ बता रहे हैं।

Government  auto industry clash over EV retrofitting in Delhi this method reducing pollution dangerous?
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : adobe stock
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विस्तार
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दिल्ली सरकार की ईवी पॉलिसी 2.0 के तहत पुरानी पेट्रोल-डीजल कारों को इलेक्ट्रिक में बदलने के लिए 50 हजार रुपये की सब्सिडी का एलान होते ही ऑटो सेक्टर में बहस छिड़ गई है। जहां सरकार इसे प्रदूषण के खिलाफ ब्रह्मास्त्र मान रही है, वहीं कई बड़ी कंपनियां इसे सुरक्षा से खिलवाड़ बता रहे हैं। बहस इस बात पर है कि क्या बिना फैक्ट्री-इंजीनियरिंग के एक भारी बैटरी को पुरानी कार में फिट करना सड़क पर जानलेवा साबित हो सकता है?

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दिल्ली सरकार की ईवी रेट्रोफिटिंग नीति ने राजधानी में स्वच्छ मोबिलिटी को बढ़ावा देने की नई बहस छेड़ दी है। जहां स्टार्टअप्स और स्वतंत्र रेट्रोफिटर्स इसे प्रदूषण कम करने और पुराने वाहनों की उम्र बढ़ाने का अवसर मान रहे हैं, वहीं बड़े ऑटोमेकर इसे सुरक्षा, तकनीक और बिजनेस मॉडल के लिए जोखिमपूर्ण बता रहे हैं। उद्योग अधिकारियों का कहना है कि ईवी रेट्रोफिटिंग, CNG या LPG किट्स जैसा सरल ईंधन परिवर्तन नहीं है।
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एक वरिष्ठ ऑटो उद्योग अधिकारी के अनुसार, EV रेट्रोफिटिंग में बैटरी प्लेसमेंट, वजन संतुलन, सॉफ्टवेयर इंटीग्रेशन और ड्राइवेबिलिटी में बड़े बदलाव होते हैं। इसके लिए प्लेटफॉर्म-लेवल इंजीनियरिंग चाहिए, जो रेट्रोफिटिंग मॉडल में संभव नहीं है। निर्माताओं का मानना है कि इससे वाहन की संरचनात्मक अखंडता और यात्रियों की सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ सकता है। वैश्विक स्तर पर भी ईवी रेट्रोफिटिंग को लेकर स्पष्ट समर्थन नहीं है। टोयोटा जैसे कुछ ऑटोमेकरों ने कुछ हद तक रुचि दिखाई है, लेकिन ज्यादातर कंपनियां इसे अपने मुख्य बिजनेस नए वाहन बिक्री के खिलाफ ही मान रही हैं। 

नीति सुधारों की मांग

रेट्रोफिटिंग को व्यावहारिक बनाने के लिए उद्योग कई बदलावों की मांग कर रहा है, जिनमें रेट्रोफिटेड EV पर GST में कटौती, स्क्रैपेज लिंक्ड सब्सिडी, रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को सरल बनाना, टाइप अप्रूवल सर्टिफिकेट की वैधता 3 से बढ़ाकर 5 साल और रेट्रोफिटेड वाहनों को अतिरिक्त 10 साल का रजिस्ट्रेशन विस्तार शामिल है।

कमर्शियल वाहनों में तेजी, पैसेंजर कारों में सुस्ती

एक ओर जहां यात्री कार सेगमेंट में ईवी रेट्रोफिटिंग अभी रफ्तार नहीं पकड़ पाई है, वहीं कमर्शियल व्हीकल्स, खासकर लोड कैरियर्स में इसका विस्तार तेजी से हो रहा है। इसकी वजह कम सख्त सुरक्षा मानक और स्पष्ट लागत लाभ बताए जा रहे हैं।

EV अपनाने में दिल्ली तीसरे नंबर पर

पीटीआई के अनुसार, दिल्ली FY 2024-25 में 11.6% EV पैठ के साथ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में तीसरे स्थान पर है। दोपहिया, तिपहिया और सार्वजनिक परिवहनतीनों सेगमेंट में दिल्ली का EV अपनाना मजबूत है, जबकि कई राज्यों में ये मुख्य रूप से तिपहिया तक सीमित है।

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