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CAFE 3 Norms: छोटी कार महंगी होने वाली है? नए नियमों को लेकर कंपनियों में छिड़ा विवाद, सरकार ने मांगी रिपोर्ट

ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: जागृति Updated Mon, 19 Jan 2026 10:10 AM IST
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सार

Small Car Emissions: केंद्र सरकार अब अमेरिका, चीन, जापान और यूरोपीय संघ जैसे विकसित बाजारों के CAFE नियमों की गहराई से जांच कर रही है। इसका मुख्य उद्देश्य भारत के आगामी ईंधन दक्षता नियमों को वैश्विक स्तर के बराबर लाना है। SIAM ने इस संबंध में एक विस्तृत रिपोर्ट भारी उद्योग मंत्रालय को सौंपी है।
 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : freepik
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विस्तार
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अप्रैल 2027 से भारत में लागू होने वाले CAFE-3 नियमों को लेकर कार कंपनियों में मतभेद साफ दिखने लगे हैं। मारुति सुजुकी का कहना है कि छोटी और हल्की कारों को नियमों में कुछ राहत मिलनी चाहिए, जबकि टाटा मोटर्स इसे CAFE नियमों की सोच के खिलाफ मानती है। इस विवाद के बीच केंद्र सरकार ये देख रही है कि अमेरिका, चीन, यूरोप, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों में छोटी कारों को नियमों में कैसी छूट दी जाती है। क्योंकि सरकार भारत के नियम भी दुनिया के बड़े ऑटो बाजार के बराबर करना चाहती है। हालांकि कार कंपनियों की संस्था SIAM के अंतरराष्ट्रीय आंकड़े देने के बाद तो ये सवाल और भी तेज हो गया कि क्या छोटी कारें सच में पर्यावरण के लिए बेहतर हैं या फिर उन्हें नियमों में ज्यादा फायदा मिलता है।

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दुनिया भर में छोटी कारों को कितनी छूट मिलती है?

SIAM के डेटा के अनुसार, दुनिया के बड़े ऑटोमोबाइल बाजारों में छोटी और कम वजन वाली कारों को विशेष रियायतें दी जाती हैं। जैसे अगर चीन की बात करें तो इसे 1090 किलो से कम वजन वाली कारों को उत्सर्जन में छूट मिलती है। यूरोप को 1115 किलो से कम वजन वाली गाड़ियों के लिए लक्ष्य थोड़े नरम हैं। अमेरिका को गाड़ी के फुटप्रिंट (क्षेत्रफल) के आधार पर प्रोत्साहन दिया जाता है। वहीं, दक्षिण कोरिया को 1100 किलो से कम वजन वाली कारों को लाभ मिलता है और जापान में वजन के हिसाब से धीरे-धीरे नियम बदलते हैं। इसी वजह से सरकार भारत के नियमों को भी इनके बराबर लाने पर सोच रही है।

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मारुति और टाटा में क्यों टकराव?
देखिए मारुति का कहना है कि छोटी कारें स्वभाव से अधिक ईंधन-कुशल होती हैं और एंट्री-लेवल ग्राहकों के लिए किफायती बनी रहनी चाहिए। इसलिए इन्हें वजन के आधार पर छूट मिलनी चाहिए। मारुति ने ये भी आरोप लगाया कि बड़ी गाड़ियां बनाने वाली कंपनियां गलत नैरेटिव फैला रही हैं। दूसरी तरफ टाटा मोटर्स के एमडी शैलेश चंद्रा का तर्क है कि उत्सर्जन नियम पूरी फ्लीट (सभी कारों) के लिए होने चाहिए, न कि किसी विशेष सेगमेंट के लिए। उन्होंने वजन-आधारित वर्गीकरण को सुरक्षा के लिहाज से जोखिम भरा और मनमाना करार दिया है।

सरकार का ड्राफ्ट नियम क्या कहता है?

ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी (BEE) के ड्राफ्ट के अनुसार, 4 मीटर से छोटी और 909 किलो से कम वजन वाली कारों को CO2 उत्सर्जन गणना में तीन ग्राम लाभ दिया जाना चाहिए और यही प्रस्ताव में भी है। दिलचस्प बात ये है कि 909 किलो से कम वजन वाली कारों की बिक्री में भारी गिरावट आई है। वित्त वर्ष 2018 में इनकी हिस्सेदारी 31.5% थी, जो अब घटकर केवल 7.5% रह गई है।

CAFE 3 का लक्ष्य क्या है?

कॉर्पोरेट एवरेज फ्यूल एफिशिएंसी (CAFE) मानदंडों की तीसरी कड़ी, यानी CAFE-3, अप्रैल 2027 से लागू होने जा रही है। इसका उद्देश्य वाहनों से होने वाले कार्बन उत्सर्जन को कम करना और वाहन निर्माताओं को इलेक्ट्रिक, हाइब्रिड और सीएनजी जैसे स्वच्छ ईंधन की ओर प्रेरित करना है। चूंकि CO₂ उत्सर्जन सीधे तौर पर ईंधन खपत से जुड़ा होता है, इसलिए ये नियम ऑटो निर्माताओं की वाहन रणनीति को पूरी तरह प्रभावित करेगा। वर्तमान की बात करें तो अभी CAFE औसत उत्सर्जन लक्ष्य प्रति किलोमीटर 113 ग्राम CO2 तय किया गया है। अब देखना होगा कि CAFE-3 में छोटी कारों को राहत मिलती है या नहीं।

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