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Budget 2026-27: कम उपयोग के बावजूद ऑटो PLI स्कीम के लिए आवंटन लगभग दोगुना, उत्पादन बढ़ने की उम्मीद

ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमर शर्मा Updated Sun, 01 Feb 2026 03:45 PM IST
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सार

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने यूनियन बजट 2026-27 पेश किया। जिसमें ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट्स के लिए प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम का खर्च 2026-27 के यूनियन बजट में लगभग दोगुना करके ₹5940 करोड़ कर दिया है।

How is Budget 2026 for Automotive Sector Budget 2026 Signals Long-Term Push as Auto PLI Funding Nearly Doubles
Car Plant - फोटो : Freepik
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विस्तार
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केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जब यूनियन बजट 2026–27 पेश किया, तो ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट सेक्टर के लिए प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) (पीएलआई) स्कीम के तहत आवंटन को लगभग दोगुना कर ₹5,940 करोड़ कर दिया गया है। यह राशि चालू वित्त वर्ष 2025-26 के बजट अनुमान ₹2,974.61 करोड़ से कहीं अधिक है।

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दिलचस्प बात यह है कि यह बढ़ोतरी ऐसे समय पर की गई है, जब FY26 में PLI के लिए किया गया आवंटन पूरी तरह खर्च नहीं हो पाया। संशोधित अनुमान के मुताबिक, FY26 में PLI का वास्तविक उपयोग केवल ₹2,104.57 करोड़ रहा। 
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मंत्रालय की मांग से भी ज्यादा आवंटन 
बजट दस्तावेजों के अनुसार, FY27 के लिए ऑटो PLI को मिला आवंटन उस राशि से भी अधिक है, जिसकी मांग भारी उद्योग मंत्रालय ने की थी। मंत्रालय ने पहले ₹5,800 करोड़ की मांग रखी थी।
एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, PLI स्कीम के तीसरे वर्ष में वाहनों और कंपोनेंट्स के उत्पादन में तेज बढ़ोतरी की उम्मीद है। इसी को देखते हुए ज्यादा आवंटन जरूरी माना गया। 
 

 

FY26 में पूरा उपयोग क्यों नहीं हो पाया 
FY26 में पूरा आवंटन खर्च न हो पाने के पीछे कई कारण बताए गए हैं। अधिकारी के मुताबिक,

  • कुछ OEM कंपनियां अपने टारगेटेड सेल्स हासिल नहीं कर पाईं
  • कई कंपनियां डोमेस्टिक वैल्यू एडिशन (DVA) की अनिवार्य शर्त पूरी नहीं कर सकीं

ऑटो PLI स्कीम का उद्देश्य एडवांस्ड ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी के घरेलू निर्माण को बढ़ावा देना और पूरी मैन्युफैक्चरिंग वैल्यू चेन में निवेश आकर्षित करना है। यह योजना 2022–23 से पांच साल के लिए लागू की गई थी, जिसे बाद में 31 मार्च 2028 तक बढ़ा दिया गया। 

अब तक की उपलब्धियां: निवेश, EV और नौकरियां 
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, ऑटो PLI स्कीम अब तक काफी सफल रही है।

  • ₹35,000 करोड़ से अधिक का निवेश
  • लगभग 14 लाख इलेक्ट्रिक वाहनों का उत्पादन
  • करीब 49,000 नौकरियां

अधिकारी ने बताया कि अब लगभग 100 ऑटोमोटिव प्रोडक्ट्स भारत में बनाए जा रहे हैं। स्कीम के तहत आए 82 आवेदनों में से 18 कंपनियां अब तक इंसेंटिव के लिए सफल रही हैं। 

यह भी पढ़ें - Budget 2026-27: सस्ते होंगे इलेक्ट्रिक वाहन! लिथियम-आयन सेल पर कस्टम ड्यूटी में छूट का एलान

 

PLI स्कीम की संरचना और शर्तें 
ऑटो PLI स्कीम के दो मुख्य हिस्से हैं:

  1. चैंपियन OEM इंसेंटिव स्कीम - बैटरी इलेक्ट्रिक और हाइड्रोजन फ्यूल सेल वाहनों के लिए
  2. कंपोनेंट चैंपियन स्कीम - हाई-टेक और हाई-वैल्यू ऑटो कंपोनेंट्स के लिए

EV और हाइड्रोजन टेक्नोलॉजी से जुड़े कंपोनेंट्स पर 13% से 18% तक इंसेंटिव मिलता है, जबकि अन्य उत्पादों पर यह 8% से 13% के बीच है। स्कीम के तहत किसी भी उत्पाद में कम से कम 50% घरेलू वैल्यू एडिशन अनिवार्य है। 

DVA बनी बड़ी चुनौती 
50% DVA की शर्त कई कंपनियों के लिए चुनौती बनी हुई है।
अधिकारी के अनुसार, FY26 में कुछ आवेदकों को कम लोकलाइजेशन के कारण DVA सर्टिफिकेट नहीं मिल सका। हालांकि, उम्मीद है कि FY27 में उत्पादन का स्केल बढ़ेगा, क्योंकि आमतौर पर PLI स्कीम के तीसरे साल में निवेश का असर दिखने लगता है। 

FY28 और FY29 के लिए और बड़ी मांग 
FY25 में जहां PLI के लिए आवंटन सिर्फ ₹300 करोड़ से थोड़ा अधिक था, वहीं FY27 में यह कई गुना बढ़ चुका है।
मंत्रालय FY28 में ₹9,000 करोड़ और स्कीम के अंतिम वर्ष FY29 (2027–28) में ₹9,500 करोड़ तक का आवंटन मांगने की तैयारी में है। 

किन कंपनियों को मिला लाभ
PLI स्कीम के तहत सफल OEM कंपनियों में शामिल हैं:
टाटा मोटर्स, महिंद्रा एंड महिंद्रा, मारुति सुजुकी, टोयोटा किर्लोस्कर, ह्यूंदै मोटर इंडिया, किआ इंडिया, पियाजियो, आयशर मोटर्स, हीरो मोटोकॉर्प, बजाज ऑटो और ओला इलेक्ट्रिक। 

स्टार्टअप्स की मांग: अलग इंसेंटिव विंडो 
नेटवर्थ और टर्नओवर शर्तों के कारण स्कीम से बाहर रह गए ईवी और टेक स्टार्टअप्स- जैसे एथर एनर्जी, रिवर और यूलर मोटर्स ने अब PLI में अलग इनोवेशन-लिंक्ड सब-विंडो की मांग की है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारी सूत्रों का कहना है कि, सरकार इस प्रस्ताव पर विचार के लिए तैयार है।

यह भी पढ़ें - Budget 2026-27: दुर्घटना पीड़ितों को बड़ी राहत, मोटर दुर्घटना मुआवजा ब्याज पर अब नहीं लगेगा टैक्स, टीडीएस खत्म

कड़ी पात्रता शर्तें बनी बाधा 
मौजूदा नियमों के अनुसार,

  • OEM का ग्लोबल टर्नओवर कम से कम ₹10,000 करोड़ (कंपोनेंट मेकर के लिए ₹500 करोड़)
  • ₹3,000 करोड़ का फिक्स्ड एसेट निवेश अनिवार्य

गैर-ऑटो कंपनियों के लिए न्यूनतम टर्नओवर ₹1,000 करोड़ है। ये शर्तें अधिकांश स्टार्टअप्स को स्वतः बाहर कर देती हैं। 

PLI स्कीम के पुनर्गठन की मांग 
स्टार्टअप्स और इंडस्ट्री के कुछ हिस्सों ने सवाल उठाया है कि 82 आवेदकों में से बहुत कम कंपनियां इंसेंटिव के लिए योग्य क्यों हो पाईं।
यहां तक कि पैसेंजर व्हीकल सेगमेंट की बड़ी कंपनियां, जैसे मारुति सुजुकी और ह्यूंदै मोटर इंडिया भी अभी तक लाभ के दायरे में नहीं आ पाई हैं।

उद्योग जगत का कहना है कि “दो-पहिया सेगमेंट में अभी तक कोई मोटरसाइकिल PLI के लिए योग्य नहीं हो पाई है,” और सरकार को स्कीम के ढांचे पर दोबारा विचार करना चाहिए। 



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