Tyre Manufacturing Date: पुराने टायर हो सकते हैं खतरनाक, टायर कब बने थे, कैसे करें पहचान?
जब भी आप सड़क पर निकलते हैं, तो आपके टायर आपको सुरक्षित रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपके टायरों की उम्र भी उतनी ही मायने रखती है जितनी कि ट्रेड डेप्थ या हवा का प्रेशर?
विस्तार
सड़क पर चलते समय आपकी कार के टायर आपकी सुरक्षा में सबसे अहम भूमिका निभाते हैं। लेकिन सिर्फ टायर की ग्रिप या हवा का दबाव ही नहीं, टायर की उम्र भी उतनी ही जरूरी होती है। कई बार टायर देखने में ठीक लगते हैं, लेकिन ज्यादा पुराने होने की वजह से असुरक्षित हो सकते हैं। यहां जानिए टायर की मैन्युफैक्चरिंग डेट चेक करने का आसान तरीका।
टायर की मैन्युफैक्चरिंग डेट जानना क्यों जरूरी है
टायर रबर और अन्य कंपाउंड से बने होते हैं, जो समय के साथ कमजोर होते जाते हैं। भले ही टायर इस्तेमाल में न आए हों, उम्र बढ़ने के साथ उनकी परफॉर्मेंस घट सकती है।
ज्यादातर विशेषज्ञ मानते हैं कि छह साल से पुराने टायर, चाहे उनकी ट्रेड डेप्थ अच्छी ही क्यों न हो, बदल देना चाहिए। गर्मी, धूप, नमी और ज्यादा वजन टायर की उम्र को और कम कर देते हैं। मैन्युफैक्चरिंग डेट जानने से आप सुरक्षा, परफॉर्मेंस और सही समय पर टायर बदलने का फैसला ले सकते हैं।
यह भी पढ़ें - US Highways: अमेरिका में सड़कों के नंबर क्यों होते हैं? जानें हाईवे नंबरिंग सिस्टम की पूरी कहानी
टायर पर मैन्युफैक्चरिंग कोड कहां देखें
- हर टायर के साइडवॉल पर अक्षरों और अंकों का एक कोड होता है, जिसे आमतौर पर DOT कोड कहा जाता है।
- इस कोड के आखिर में चार अंकों का नंबर होता है, जो टायर की मैन्युफैक्चरिंग डेट बताता है।
- ध्यान रखें, यह कोड कभी बाहरी साइडवॉल पर होता है और कभी अंदर की तरफ, यह इस बात पर निर्भर करता है कि टायर कैसे फिट किया गया है।
टायर डेट कोड कैसे पढ़ें
चार अंकों का यह कोड टायर बनने का हफ्ता और साल बताता है:
- पहले दो अंक: साल का कौन-सा हफ्ता (01 से 52 तक)
- आखिरी दो अंक: मैन्युफैक्चरिंग का साल
उदाहरण
- 2419 -- साल 2019 का 24वां हफ्ता
- 0123 -- साल 2023 का पहला हफ्ता
अगर आपको बाहरी हिस्से पर यह कोड न दिखे, तो टायर के अंदरूनी साइडवॉल पर जरूर देखें।
यह भी पढ़ें - RHD: क्यों 75 देशों में चलती हैं राइट-हैंड-ड्राइव गाड़ियां, जानें भारत को इससे कैसे मिलता है वैश्विक फायदा
अगर आपके टायर पुराने हों तो क्या करें
अगर आपके टायर छह साल से ज्यादा पुराने हैं, तो उन्हें बदलने पर गंभीरता से विचार करें, भले ही वे देखने में ठीक लगें।
टायर पर दरारें, उभार या सूखा रबर जैसी निशानियां दिखें तो तुरंत जांच कराएं। लंबी यात्रा से पहले किसी भरोसेमंद मैकेनिक या टायर एक्सपर्ट से सलाह लेना बेहतर होता है।
पुराने टायरों की ग्रिप कम हो जाती है, जिससे खासकर गर्म मौसम या तेज रफ्तार में ब्लोआउट का खतरा बढ़ जाता है।
टायर की उम्र बढ़ाने के आसान टिप्स
टायर लंबे समय तक सुरक्षित रहें, इसके लिए कुछ बातों का ध्यान रखें:
- सही एयर प्रेशर बनाए रखें
- हर 5,000-7,000 किमी पर टायर रोटेशन कराएं
- गाड़ी को ओवरलोड न करें
- समय-समय पर व्हील अलाइनमेंट और बैलेंसिंग कराते रहें
निष्कर्ष
टायर की उम्र उतनी ही अहम है जितनी उनकी हालत। मैन्युफैक्चरिंग डेट चेक करने में बस कुछ सेकंड लगते हैं, लेकिन यह छोटी-सी जानकारी आपको बड़े हादसे से बचा सकती है। सुरक्षित ड्राइविंग के लिए टायर की सेहत पर हमेशा नजर रखें।
