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पेट्रोल के बाद अब डीजल की बारी: 15% आइसोब्यूटानॉल ब्लेंडिंग की तैयारी में सरकार, जानें वाहनों पर क्या होगा असर

Sun, 05 Jul 2026 08:57 AM IST
Jagriti ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Jagriti Updated Sun, 05 Jul 2026 08:57 AM IST
सार

पेट्रोल में  E20 ब्लेंडिंग के बाद अब सरकार डीजल के लिए भी बड़ा बदलाव करने जा रही है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने बताया कि डीजल में 15% Isobutanol मिलाने की तैयारी चल रही है। यह पहल देश में बायोफ्यूल के इस्तेमाल को बढ़ाने, विदेशी तेल पर निर्भरता घटाने और स्वदेशी ईंधन को बढ़ावा देने की रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। जानिए इसके बारे में विस्तार से...

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India Plans 15% Isobutanol Blend Diesel After E20 Petrol: What Means
कंद्रीय मंत्री का बड़ा एलान - फोटो : amarujala.com

विस्तार

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के अनुसार, E20 पेट्रोल (20% इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) की सफलता के बाद, अब भारत सरकार देश की सड़कों पर दौड़ने वाली डीजल गाड़ियों को भी हरा-भरा (Eco-friendly) बनाने की दिशा में काम कर कर रही है। हालांकि नितिन गडकरी ने यह बात कुछ समय पहले एक इवेंट में कही थी। जिसका वीडियो सोशल मीडिया अब वायरल हाे रहा है। उन्होंने बताया था कि जल्द ही डीजल में 15% आइसोब्यूटानॉल (Isobutanol) मिलाने की अनुमति दी जा सकती है। यह कदम भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में अधिक आत्मनिर्भर बनाने और पर्यावरण के अनुकूल ईंधन अपनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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सीधे नहीं मिल सकता इथेनॉल, इसलिए तैयार हुआ आइसोब्यूटानॉल
आमतौर पर गाड़ियों में पेट्रोल के साथ इथेनॉल मिलाया जाता है, लेकिन डीजल के मामले में ऐसा संभव नहीं होता। इस पीछे कंद्रीय मंत्री ने तकनीकी वजहें भी बताई हैं। गडकरी ने बताया कि इथेनॉल और डीजल की रासायनिक प्रकृति अलग होने की वजह से दोनों को सीधे मिलाना मुश्किल हो जाता है या यह कहें की संभव ही नहीं है। इसी कारण सरकार इथेनॉल का प्रोसेस करके उससे आइसोब्यूटानॉल तैयारी कर रही है।
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क्या है आइसोब्यूटानॉल और क्यों माना जा रहा है अगली पीढ़ी का बायोफ्यूल?
आइसोब्यूटानॉल को नई पीढ़ी के बायोफ्यूल के रूप में भी देखा जा रहा है। सरकार के अनुसार इसमें पारंपरिक बायोफ्यलू की तुलना भी कई फायदे हैं। जो इस प्रकार हैं...

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  • अधिक ऊर्जा घनत्व : यह कम मात्रा में भी इंजन को भरपूर ताकत प्रदान करने की क्षमता रखता है।
  • इंजन के साथ बेहतर अनुकूलता: इसके इस्तेमाल के लिए इंजन में किसी बहुत बड़े बदलाव की जरूरत नहीं पड़ती, यह मौजूदा इंजनों के साथ आसानी से तालमेल बिठा लेता है।
  • कम प्रदूषण: इसके जलने से पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली हानिकारक गैसों का उत्सर्जन बेहद कम होता है। इसलिए इसे भविष्य के स्वच्छ परिवहन ईंधन के रूप में भी देखा जा रहा है।




पायलट परीक्षण में मिले सकारात्मक नतीजे
यह जानकारी केंद्रीय मंत्री ने पायलट परीक्षण में मिले सकारात्मक नतीजे के बाद दी है। बताया कि दो जनरेटर सेट्स को 100% इथेनॉल और आइसोब्यूटानॉलपर सफलतापूर्वक चलाया जा चुका है। इन परीक्षणों से यह साबित हुआ है कि ऐसे इंजन विकसित किए जा सकते हैं, जो पूरी तरह इन वैकल्पिक ईंधनों पर काम कर सकें। सरकार का मानना है कि इन सफल परीक्षणों के आधार पर बड़े स्तर पर इस तकनीक को अपनाने की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है।

देश को क्या होगा फायदा?
अगर डीजल में 15% आइसोब्यूटानॉल ब्लेंडिंग लागू होती है, तो इसके कई बड़े फायदे हो सकते हैं।

  • सबसे बड़ा लाभ कच्चे तेल के आयात में कमी के रूप में सामने आ सकता है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है, ऐसे में घरेलू स्तर पर तैयार बायोफ्यूल का उपयोग विदेशी मुद्रा की बचत में मदद करेगा।
  • इसके अलावा देश में बायोफ्यूल उद्योग को बढ़ावा मिलेगा, कृषि आधारित कच्चे माल की मांग बढ़ेगी और स्वच्छ ईंधन के इस्तेमाल से पर्यावरण पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।


E20 की सफलता के बाद अगला कदम
भारत पहले ही E20 कार्यक्रम के जरिए पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य तय समय से पहले हासिल कर चुका है। अब सरकार उसी मॉडल को आगे बढ़ाते हुए डीजल के लिए भी वैकल्पिक बायोफ्यूल पर काम कर रही है। आइसोब्यूटानॉल ब्लेंडिंग को इसी रणनीति का अगला चरण माना जा रहा है, जिससे देश धीरे-धीरे पारंपरिक जीवाश्म ईंधन पर अपनी निर्भरता कम कर सके।

कब तक लागू होगा यह नियम?
फिलहाल इसके लागू होने को लेकर काेई बात सामने नहीं आई है। सरकार अभी सिर्फ 15 प्रतिशत आइसोब्यूटानॉल अनुमति देने की नीति और तकनीकी स्तर पर काम कर रही है। अभी इसकी आधिकारिक लॉन्च तारीख या लागू होने की समयसीमा घोषित नहीं की गई है।

वाहनों पर क्या असर होगा?

  • एक्सपर्ट्स कहते हैं कि अगर सरकार डीजल में 15% आइसोब्यूटानॉल मिश्रण (D15) को मंजूरी देती है, तो इसका सबसे बड़ा असर ईंधन और इंजन तकनीक पर पड़ सकत है। आइसोब्यूटानॉल को डीजल के साथ बेहतर संगत (Compatible) बायोफ्यूल माना जाता है, इसलिए भविष्य में नए इंजन इस मिश्रण के हिसाब से विकसित किए जा सकते हैं।
  • हालांकि, सरकार की मंजूरी के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि मौजूदा डीजल वाहनों में किसी तकनीकी बदलाव की जरूरत होगी या वे बिना किसी संशोधन के इस ईंधन का इस्तेमाल कर सकेंगे। फिलहाल सरकार ने केवल 15% मिश्रण की दिशा में काम करने की बात कही है, इसलिए अंतिम तकनीकी दिशा-निर्देश जारी होने बाकी हैं।
     
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