Auto Sales:जून 2026 में कार बाजार ने पकड़ी रफ्तार, सीएनजी, हाइब्रिड और ईवी कारों ने बिक्री को दिया बड़ा बढ़ावा
भारत में जून 2026 के दौरान यात्री वाहनों की रिटेल बिक्री में मजबूत बढ़ोतरी दर्ज की गई। फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन्स (FADA) के आंकड़ों के अनुसार, इस बढ़ोतरी में सबसे बड़ी भूमिका CNG, Hybrid और Electric कारों की रही।
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पश्चिम एशिया संकट और लगातार बढ़ती तेल की कीमतों के बीच भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। जून 2026 में देश के भीतर कारों की खुदरा (रिटेल) बिक्री में करीब 29 प्रतिशत की सालाना बढ़त दर्ज की गई है। इस शानदार रफ्तार को सबसे ज्यादा हवा पारंपरिक पेट्रोल-डीजल के बजाय सीएनजी, हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक जैसे वैकल्पिक ईंधनों ने दी है। ऑटोमोबाइल डीलरों के शीर्ष संगठन फाडा (FADA) द्वारा सोमवार को जारी आंकड़े इस बात की गवाही दे रहे हैं। आइए समझते हैं कि इस बार का ऑटो मार्केट का गणित क्या कहता है:
जून 2026 में पैसेंजर व्हीकल की रिटेल बिक्री के आंकड़े क्या रहे?
फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशंस (FADA) (फाडा) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, जून 2026 में भारतीय कार बाजार ने बिक्री के नए रिकॉर्ड बनाएं हैं:
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सालाना आधार पर भारी उछाल: जून 2026 में कारों की रिटेल बिक्री 4,10,853 यूनिट्स रही। यह पिछले साल के इसी महीने (जून 2025) की 3,19,412 यूनिट्स के मुकाबले 28.63 प्रतिशत अधिक है।
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महीने-दर-महीने भी बढ़त: अगर इस साल मई महीने से तुलना करें, तो मई 2026 में 4,02,591 गाड़ियां बिकी थीं, जिसके मुकाबले जून में बिक्री 2.05 प्रतिशत बढ़ी है।
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पहली तिमाही का शानदार प्रदर्शन: इस साल अप्रैल से जून के बीच भारतीय पैसेंजर व्हीकल मार्केट ने कुल 12,55,933 यूनिट्स की रिटेल बिक्री दर्ज की, जो पिछले साल की इसी अवधि के 10,24,101 यूनिट्स के मुकाबले 22.64 प्रतिशत की सालाना बढ़त को दर्शाती है।
वैकल्पिक ईंधनों ने कैसे रचा नया इतिहास?
इस जून महीने की सबसे बड़ी और दिलचस्प बात यह रही कि देश की कुल कार बिक्री में वैकल्पिक ईंधन से चलने वाली गाड़ियों (CNG, हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक) की हिस्सेदारी पहली बार 40 प्रतिशत की ऐतिहासिक सीमा को पार कर 40.35 प्रतिशत पर पहुंच गई। इन पॉइंट्स के जरिए समझिए कि किस सेगमेंट का कितना योगदान रहा:
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CNG कारों का सबसे बड़ा जलवा (24.33% हिस्सेदारी): कुल पैसेंजर व्हीकल बिक्री में सीएनजी (CNG) गाड़ियों का योगदान सबसे ज्यादा 24.33 प्रतिशत रहा। पेट्रोल की बढ़ती कीमतों के बीच ग्राहकों ने इसे सबसे किफायती विकल्प के रूप में चुना।
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हाइब्रिड तकनीक को मिला साथ (8.27% हिस्सेदारी): ईंधन की बचत और बेहतर परफॉर्मेंस देने वाली हाइब्रिड (Hybrid) कारों ने भी कुल बिक्री में 8.27 प्रतिशत की मजबूत हिस्सेदारी दर्ज कराई।
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इलेक्ट्रिक कारों की बढ़ती रफ्तार (7.75% हिस्सेदारी): पूरी तरह बिजली से चलने वाली यानी प्योर इलेक्ट्रिक कारों (EV) का कुल बिक्री में हिस्सा 7.75 प्रतिशत रहा, जो पर्यावरण के प्रति बढ़ते रुझान को दिखाता है।
अचानक क्यों बढ़ी ग्रीन और क्लीन गाड़ियों की मांग?
ग्राहकों का पारंपरिक गाड़ियों से मोहभंग होने और सीएनजी या इलेक्ट्रिक की तरफ तेजी से कदम बढ़ाने के पीछे कुछ बेहद ठोस कारण रहे हैं:
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पश्चिम एशिया संकट और पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दाम: पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें आसमान छूने लगीं। इसके चलते भारत सरकार को मई 2026 में कम से कम चार बार पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाने पड़े। इस महंगाई से बचने के लिए लोगों ने वैकल्पिक ईंधनों का रुख किया।
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इथेनॉल पेट्रोल को लेकर असमंजस: बाजार में इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल को लेकर बढ़ती भ्रम की स्थिति और अनिश्चितताओं ने भी ग्राहकों को पेट्रोल कारों से दूर कर सीएनजी और ईवी की तरफ मोड़ने का काम किया।
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सीएनजी कारों में बंपर बुकिंग: देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी ने पिछले महीने जानकारी दी थी कि जब से ईंधन के दामों में बढ़ोतरी हुई है, तब से उनकी सीएनजी कारों की बुकिंग में 40 प्रतिशत का भारी उछाल आया है।