EV: सिर्फ ईवी खरीदने पर छूट ही नहीं, अब निर्माण और स्वदेशी तकनीक पर भी फोकस, केंद्र ने संसद में बताई नई रणनीति
भारत में हरित परिवहन को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार केवल गाड़ियों की खरीद पर छूट देने तक सीमित नहीं है। सरकार ने इस क्षेत्र में एक मजबूत और दूरगामी ढांचागत रोडमैप तैयार किया है। लोकसभा में भारी उद्योग राज्य मंत्री भूपतिराजू श्रीनिवास वर्मा ने इसके बारे में विस्तार से बताया। जानें पूरी डिटेल्स।
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विस्तार
केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश की नई इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) नीति केवल वाहन खरीदने पर प्रोत्साहन (इंसेंटिव) देने तक सीमित नहीं है। सरकार का कहना है कि इस नीति में घरेलू विनिर्माण (मैन्युफेक्चरिंग), नई तकनीक को बढ़ावा, स्वदेशीकरण और संस्थागत ढांचे को मजबूत करने जैसे कई अहम पहलुओं को शामिल किया गया है। ताकि भारत में स्वच्छ परिवहन को तेज गति से आगे बढ़ाया जा सके।
लोकसभा में पूछे गए एक सवाल के लिखित जवाब में भारी उद्योग राज्य मंत्री भूपतिराजू श्रीनिवास वर्मा ने सरकार की ईवी नीति और उससे जुड़े विभिन्न कार्यक्रमों की जानकारी दी।
नई ईवी नीति को सरकार ने व्यापक क्यों बताया?
सरकार का कहना है कि नई ईवी नीति केवल मांग बढ़ाने तक सीमित नहीं है। बल्कि वाहन निर्माण और सप्लाई चेन को भी मजबूत करने पर समान रूप से ध्यान देती है।
मंत्री ने अपने जवाब में कहा कि नई नीतियां EV निर्माण के मांग और आपूर्ति दोनों पक्षों को ध्यान में रखकर तैयार की गई हैं।
खरीदारों के लिए कौन-सी योजनाएं चल रही हैं?
सरकार के अनुसार, कुछ योजनाओं का उद्देश्य इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने वालों की शुरुआती लागत कम करना है।
FAME-II योजना:
इस योजना के जरिए ईवी खरीदने की शुरुआती लागत कम करने पर जोर दिया गया।
PM E-DRIVE योजना:
यह योजना भी इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने वाले उपभोक्ताओं की शुरुआती लागत घटाने के मकसद से लागू की गई है।
सरकार का कहना है कि इन दोनों योजनाओं के जरिए बाजार में इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।
मैन्युफैक्चरिंग को कैसे मजबूत किया जा रहा है?
सरकार ने बताया कि केवल वाहन खरीदने पर प्रोत्साहन देना ही लक्ष्य नहीं है, बल्कि देश के भीतर मजबूत ईवी उद्योग विकसित करने पर भी काम किया जा रहा है।
PLI योजना (ऑटोमोबाइल एवं ऑटो कंपोनेंट):
इस योजना के तहत कंपनियों को नई तकनीक अपनाने और घरेलू स्तर पर अधिक मूल्य संवर्धन करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
PLI योजना (ACC बैटरी स्टोरेज):
एडवांस केमिस्ट्री सेल (ACC) बैटरियों के घरेलू निर्माण को बढ़ावा देने के लिए भी अलग योजना लागू की गई है।
सरकार का कहना है कि इन योजनाओं के जरिए देश में आधुनिक तकनीक और स्वदेशी उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर फोकस किया गया है।
स्वदेशीकरण के लिए क्या रोडमैप तैयार किया गया है?
मंत्री ने बताया कि चरणबद्ध विनिर्माण कार्यक्रम (PMP) के जरिए इलेक्ट्रिक वाहनों के महत्वपूर्ण पुर्जों का निर्माण चरणबद्ध तरीके से भारत में करने की योजना बनाई गई है।
इस कार्यक्रम का उद्देश्य समय के साथ महत्वपूर्ण ईवी कंपोनेंट्स के घरेलू उत्पादन को बढ़ाना और स्वदेशीकरण को मजबूत करना है।
ईवी क्षेत्र पर सरकार कितना खर्च कर रही है?
सरकार ने संसद में बताया कि इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने के लिए बाजार तैयार करने और मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाने, दोनों पर बड़े स्तर पर सार्वजनिक निवेश किया जा रहा है।
FAME-II योजना: इस योजना का कुल बजटीय प्रावधान 11,500 करोड़ रुपये रहा।
PM E-DRIVE योजना: इसके लिए 10,900 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।
PLI योजना (ऑटोमोबाइल एवं ऑटो कंपोनेंट): इस योजना का बजट 25,938 करोड़ रुपये है।
PLI योजना (ACC बैटरी स्टोरेज): इसके लिए 18,100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
क्या सरकार ने 2047 तक ईवी की कोई संख्या तय की है?
इस सवाल पर सरकार ने साफ किया कि 2047 तक भारतीय सड़कों पर कितने इलेक्ट्रिक वाहन होंगे, इसके लिए कोई निर्धारित लक्ष्य तय नहीं किया गया है।
यानी फिलहाल सरकार ने किसी निश्चित संख्या का आधिकारिक लक्ष्य घोषित नहीं किया है।
देश में ईवी को बढ़ावा देने वाली अन्य प्रमुख केंद्रीय योजनाएं कौन-कौन सी हैं?
मंत्रालय ने बताया कि देश में इलेक्ट्रिक वाहनों को तेजी से अपनाने के लिए कई केंद्रीय योजनाओं के माध्यम से काम किया जा रहा है:
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FAME इंडिया फेज-II और PM E-DRIVE: ईवी की शुरुआती मांग और इन्फ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देना।
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ऑटो और ACC बैटरियों के लिए PLI योजनाएं: घरेलू मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को मजबूत करना।
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PM e-Bus Sewa-Payment Security Mechanism (PSM): ई-बसों के संचालन को सुगम बनाने के लिए 3,435.33 करोड़ रुपये के बजट के साथ शुरू की गई योजना।
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SPMEPCI योजना: भारत में इलेक्ट्रिक पैसेंजर कारों के निर्माण को बढ़ावा देने के लिए 'स्कीम फॉर प्रमोशन ऑफ मैन्युफैक्चरिंग ऑफ इलेक्ट्रिक पैसेंजर कार्स इन इंडिया' (SPMEPCI) को लागू किया गया है।
सरकार का कहना है कि इन योजनाओं का उद्देश्य इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को अलग-अलग स्तर पर समर्थन देना है।
क्या राज्यों की भी इसमें भूमिका है?
केंद्र सरकार ने संसद को बताया कि कई राज्यों ने भी अपनी अलग ईवी नीतियां अधिसूचित की हैं। ताकि केंद्र सरकार की पहलों को राज्य स्तर पर सहयोग मिल सके।
हालांकि, सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि भारी उद्योग मंत्रालय की योजनाएं मांग आधारित हैं। इसलिए इनके तहत राज्यों के लिए अलग-अलग फंड आवंटित नहीं किए जाते।
पूरे जवाब का सबसे बड़ा संदेश क्या है?
सरकार के अनुसार, भारत की नई ईवी नीति का मकसद केवल इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने के लिए वित्तीय प्रोत्साहन देना नहीं है। इसके साथ-साथ घरेलू विनिर्माण, आधुनिक तकनीक अपनाने, बैटरी उत्पादन, स्वदेशीकरण और उद्योग के लिए मजबूत ढांचा तैयार करने पर भी समान रूप से काम किया जा रहा है। केंद्र का कहना है कि इसी व्यापक रणनीति के जरिए देश में स्वच्छ परिवहन को गति देने और इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग को मजबूत बनाने का प्रयास किया जा रहा है।