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Off Road Vehicles: रेगिस्तान से बर्फीले रास्तों तक, कहीं नहीं रुकतीं सेना की ये गाड़ियां; जानें क्यों है खास
Sun, 09 Aug 2026 01:59 PM IST
जागृति शुक्ला
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: जागृति शुक्ला
Updated Sun, 09 Aug 2026 01:59 PM IST
सार
Indian Army vehicles: भारतीय सेना दुनिया के कठिन इलाकों में ऑपरेशंस करती है। कहीं बर्फ से ढके पहाड़ होते हैं, तो कहीं रेगिस्तान, ऊंचे पहाड़ी रास्ते और दलदली इलाके। ऐसे क्षेत्रों में सामान्य कारें धोखा दे सकती हैं। इसीलिए सेना को ऐसे वाहनों की जरूरत होती है जो खराब रास्तों पर भी मजबूती से चल सकें और लंबे समय तक भरोसेमंद प्रदर्शन दें। इसी वजह से भारतीय सेना में समय-समय पर कई दमदार वाहन शामिल किए गए हैं। आइए जानते हैं वह वाहन कौन से हैं और इन गाड़ियों में क्या खासियत है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : एआई जनरेटेड
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विस्तार
Indian Army SUVs: भारतीय सेना को देश की सीमाओं की सुरक्षा के लिए दुनिया के सबसे कठिन और अनेक भौगोलिक इलाकों में ऑपरेशन चलाने पड़ते हैं। बर्फीले पहाड़ हों, तपता रेगिस्तान हो या फिर उत्तर-पूर्व के घने और दलदली रास्ते, इन जगहों पर आम गाड़ियां कुछ ही किलोमीटर में जवाब दे जाती हैं।
यही वजह है कि भारतीय सेना ऐसे वाहनों का चयन करती है जो शक्तिशाली इंजन और बेजोड़ ऑफ-रोडिंग क्षमता से लैस हों। आइए विस्तार से जानते हैं भारतीय सेना के इतिहास और वर्तमान का हिस्सा रहीं सबसे शक्तिशाली गाड़ियों के बारे में:
Maruti Suzuki Gypsy: सेना की पहचान बनी कॉम्पैक्ट 4x4
Tata Safari Storme GS800: ज्यादा पेलोड के साथ मजबूत SUV
महिंद्रा स्कॉर्पियो: सेना और सुरक्षा बलों का भरोसेमंद वाहन
निसान पेट्रोल जोंगा: सेना के इतिहास की खास गाड़ी
महिंद्रा ALSV: आधुनिक दौर का बख्तरबंद वाहन
Toyota Fortuner और Hilux: ऊंचाई वाले सीमावर्ती इलाकों में उपयोग
टाटा सूमो: सैनिकों और रसद के लिए भरोसेमंद MPV
मित्सुबिशी पजेरो : बर्फीले और दुर्गम इलाकों का साथी
आखिर सेना को इन गाड़ियों में क्या खास पसंद आता है?
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यही वजह है कि भारतीय सेना ऐसे वाहनों का चयन करती है जो शक्तिशाली इंजन और बेजोड़ ऑफ-रोडिंग क्षमता से लैस हों। आइए विस्तार से जानते हैं भारतीय सेना के इतिहास और वर्तमान का हिस्सा रहीं सबसे शक्तिशाली गाड़ियों के बारे में:
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Maruti Suzuki Gypsy: सेना की पहचान बनी कॉम्पैक्ट 4x4
- मारुति सुजुकी जिप्सी दशकों तक भारतीय सेना की पहचान रही है। यह 1991 में सेना के बेड़े में शामिल हुई थी। हल्के वजन, कॉम्पैक्ट डिजाइन और बेहतरीन ऑफ-रोडिंग क्षमता की वजह से यह सेना के लिए काफी उपयोगी साबित हुई।
- जिप्सी ने सियाचिन जैसे बेहद ठंडे इलाकों से लेकर थार के तपते रेगिस्तान तक अलग-अलग परिस्थितियों में काम किया। इसका इस्तेमाल गश्त और ट्रांसपोर्टेशन दोनों के लिए किया गया। सेना की जरूरतों के अनुसार इस गाड़ी को विशेष रूप से तैयार भी किया जाता था।
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Tata Safari Storme GS800: ज्यादा पेलोड के साथ मजबूत SUV
- इसके बाद मारुति जिप्सी की जगह लेने के लिए टाटा सफारी स्टॉर्म GS800 को सेना की कठोर जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया। यह SUV 800 किलोग्राम तक का पेलोड ले जाने में सक्षम है।
- इसमें 2.2-लीटर टर्बो-डीजल इंजन और 4x4 ड्राइवट्रेन दी गई है। कठिन रास्तों पर बेहतर क्षमता के साथ इसमें आराम, सुरक्षा और ज्यादा पेलोड ले जाने की क्षमता पर भी ध्यान दिया गया। यही वजह है कि यह सेना के अधिकारियों के लिए भी एक महत्वपूर्ण वाहन रही।
महिंद्रा स्कॉर्पियो: सेना और सुरक्षा बलों का भरोसेमंद वाहन
- महिंद्रा स्कॉर्पियो भारतीय सेना और सुरक्षा बलों के लिए लंबे समय से एक भरोसेमंद वाहन रही है। सेना की ओर से इस्तेमाल किए जाने वाले स्कॉर्पियो मॉडल में शक्तिशाली mHawk डीजल इंजन और 4x4 क्षमता मिलती है।
- इसका इस्तेमाल चुनौतीपूर्ण एरिया और संकरे पहाड़ी रास्तों पर गश्त के साथ-साथ वरिष्ठ अधिकारियों के आवागमन के लिए भी किया जाता है।
- स्कॉर्पियो के कई बुलेटप्रूफ मॉडल्स का इस्तेमाल संवेदनशील सीमावर्ती और उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में भी किया जाता है, जहां सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता होती है।
निसान पेट्रोल जोंगा: सेना के इतिहास की खास गाड़ी
- निसान पेट्रोल जोंगा भारतीय सेना के इतिहास की सबसे प्रतिष्ठित और एतिहासिक गाड़ियों में से एक रही है। इस 4x4 वाहन ने 1969 से 1999 तक सेना में सेवाएं दीं। जोगा का नाम जबलपुर ऑर्डनेंस और गन कैरिज असेंबली के शॉटकट से बना था। यह वाहन अपनी मजबूती और ताकत के लिए जाना जाता था।
- ऊंचे पहाड़ों, कीचड़ और दुर्गम इलाकों में भारी वजन खींचने की क्षमता के कारण जोंगा सेना के लिए बेहद उपयोगी रही। कठिन परिस्थितियों में इसकी मजबूती ने इसे लंबे समय तक खास बनाए रखा।
महिंद्रा ALSV: आधुनिक दौर का बख्तरबंद वाहन
- महिंद्रा ALSV यानी आर्मर्ड लाइट स्पेशलिस्ट व्हीकल भारतीय सेना की आधुनिक सामरिक क्षमताओं को दिखाने वाला बख्तरबंद वाहन है।
- इसे युद्धक्षेत्र और गश्ती अभियानों में सैनिकों को सुरक्षा देने के लिए तैयार किया गया है। इसमें 3.2-लीटर डीजल इंजन, बैलिस्टिक और ब्लास्ट प्रोटेक्शन के साथ सेंट्रलाइज्ड टायर इन्फ्लेशन सिस्टम दिया गया है।
- अत्यधिक खतरनाक सीमावर्ती इलाकों में जहां गोलियों और बारूदी सुरंगों का खतरा हो सकता है, वहां इस तरह की सुरक्षा क्षमताएं वाहन को महत्वपूर्ण बनाती हैं।
Toyota Fortuner और Hilux: ऊंचाई वाले सीमावर्ती इलाकों में उपयोग
- टोयोटा फॉर्च्यूनर और हिलक्स की 4x4 गाड़ियों का चीन सीमा से जुड़े इलाकों में ITBP और भारतीय सेना द्वारा व्यापक इस्तेमाल किया जाता है।
- लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश जैसे क्षेत्रों में बेहद ऊंचाई, शून्य से नीचे तापमान और उबड़-खाबड़ रास्ते बड़ी चुनौती होते हैं। ऐसे इलाकों में गश्त के लिए इन वाहनों का इस्तेमाल किया जाता है।
- फॉर्च्यूनर SUV के तौर पर उपयोगी है, जबकि हिलक्स पिकअप बॉडी की वजह से अलग तरह की जरूरतों को पूरा करने में सक्षम है।
टाटा सूमो: सैनिकों और रसद के लिए भरोसेमंद MPV
- टाटा सूमो ने भी लंबे समय तक भारतीय सेना में MPV के तौर पर भूमिका निभाई है। इसके विशाल केबिन और मजबूत बॉडी फ्रेम की वजह से इसका इस्तेमाल सैनिकों के परिवहन के अलावा रसद सामग्री ले जाने के लिए किया जाता था।
- इसे एम्बुलेंस के रूप में भी इस्तेमाल किया गया। दूर-दराज के सैन्य बेस तक राशन और चिकित्सा सहायता पहुंचाने में टाटा सूमो ने भरोसेमंद और सरल मेंटेनेंस वाले वाहन की भूमिका निभाई।
मित्सुबिशी पजेरो : बर्फीले और दुर्गम इलाकों का साथी
- मित्सुबिशी पजेरो का इस्तेमाल भारतीय सेना और सीमा सुरक्षा बलों की ओर भारत-चीन सीमा के बेहद दुर्गम और बर्फीले इलाकों में गश्त के लिए किया जाता रहा है।
- इसमें 2.8-लीटर टर्बो-डीजल इंजन और 4WD सिस्टम दिया गया था। इसकी मजबूती और ऑफ-रोड क्षमता के कारण यह माइनस डिग्री तापमान और पथरीले ढलानों जैसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में उपयोगी रही।
- इसकी विश्वसनीयता, मजबूती और छत पर हथियार लगाने की सुविधा जैसी खूबियों ने इसे कठिन सैन्य अभियानों के लिए महत्वपूर्ण बनाया।
आखिर सेना को इन गाड़ियों में क्या खास पसंद आता है?
- सेना के लिए किसी वाहन की सिर्फ स्पीड या डिजाइन मायने नहीं रखती। उसे ऐसे वाहन की जरूरत पड़ती है जो कठिन इलाके में लगातार काम कर सके।
- इसी वजह से इन गाड़ियों में 4x4 क्षमता, मजबूत बॉडी, बेहतर ऑफ-रोडिंग, पेलोड क्षमता और अलग-अलग मौसम में काम करने की क्षमता जैसे गुण महत्वपूर्ण होते हैं।