{"_id":"69d4aee233ccf87fc5040f88","slug":"indian-auto-domestic-car-makers-outperform-foreign-rivals-claim-market-share-2026-04-07","type":"story","status":"publish","title_hn":"FADA: भारतीय कारों का दबदबा, विदेशी दिग्गजों को पछाड़कर घरेलू कंपनियों ने मारी बाजी; बिक्री में हुई भारी बढ़त","category":{"title":"Automobiles","title_hn":"ऑटो-वर्ल्ड","slug":"automobiles"}}
FADA: भारतीय कारों का दबदबा, विदेशी दिग्गजों को पछाड़कर घरेलू कंपनियों ने मारी बाजी; बिक्री में हुई भारी बढ़त
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Jagriti
Updated Tue, 07 Apr 2026 12:46 PM IST
विज्ञापन
सार
EV market India growth: भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में एक बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है। मेड इन इंडिया का दम अब सड़कों पर साफ नजर आ रहा है, क्योंकि कई भारतीय दिग्गज कंपनियों ने विदेशी दिग्गजों को पछाड़ना शुरू कर दिया है। पिछले पांच वर्षों के डेटा विश्लेषण से साफ है कि भारतीय ग्राहकों का भरोसा अब स्थानीय ब्रांड्स पर तेजी से बढ़ा है। जानिए इसे लेकर फाडा की रिपोर्ट क्या कहती है...
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : एआई जनरेटेड
विज्ञापन
विस्तार
Indian auto market: फाडा (फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशंस) के वार्षिक आंकड़ों के अनुसार, भारतीय कार निर्माताओं जैसे टाटा और महिंद्रा की बाजार हिस्सेदारी FY22 के 18 प्रतिशत से बढ़कर FY26 में 27 प्रतिशत हो गई है। वहीं, जापानी दिग्गज मारुति सुजुकी 39.71% के साथ अब भी नंबर-1 है, लेकिन ह्ययूंदै को पछाड़कर अब महिंद्रा (13.4%) और टाटा (13%) दूसरे और तीसरे स्थान की जंग लड़ रहे हैं। विदेशी ब्रांड्स, खासकर यूरोपीय और कोरियाई कंपनियों की हिस्सेदारी में लगातार गिरावट देखी जा रही है।
टाटा और महिंद्रा की लंबी छलांग
भारतीय कंपनियों ने ग्राहकों की नब्ज पहचानते हुए एसयूवी और ईवी सेगमेंट पर ध्यान केंद्रिक किया है। महिंद्रा ने स्कॉर्पियो एन, एक्सयूवी 3एक्सओ और थार जैसे मॉडल्स के दम पर महिंद्रा की हिस्सेदारी वित्तीय वर्ष FY22 के 6.8% से दोगुनी होकर 13.4% पहुंच गई है। वहीं, टाटा मोटर्स की नेक्सन और पंच के जरिए ईवी सेगमेंट में बढ़त बनाते हुए टाटा की हिस्सेदारी 13 प्रतिशत हो गई है।
विदेशी दिग्गजों की गिरती साख
जेएसडब्ल्यू एमजी मोटर और बीवाईडी जैसे चीनी मूल के ब्रांड्स अभी छोटे हैं, लेकिन उनकी हिस्सेदारी शून्य से बढ़कर 1.5% हो गई है। बाजार एक्सपर्ट्स का कहना है कि विदेशी कंपनियां नए मॉडल्स लॉन्च करने की धीमी गति के कारण पिछड़ रही हैं।
कैसे आगे हुए भारतीय ब्रांड्स?
ऑटो एक्सपर्ट्स के अनुसार, भारतीय कंपनियां स्थानीय मांग, खासतौर पर एसयूवी के अनुसार खुद को ढालने की कोशिश कर रही हैं। महिंद्रा का आक्रामक एसयूवी अभियान और टाटा की इलेक्ट्रिक वाहन ने शहरी और ग्रामीण दोनों खरीदारों को अपनी ओर खींचा है, जिसका असर अब आंकड़ों में साफ नजर आ रहा है।
इसके अलावा भारतीय ऑटो कंपनियों ने तेज प्रोडक्ट लॉन्च और वैल्यू फॉर मनी रणनीति के जरिए बाजार में मजबूत पकड़ बनाई है। वे लगातार ऐसे मॉडल पेश कर रही हैं जिनमें एडवांस फीचर्स जैसे बड़े टचस्क्रीन, सेफ्टी टेक्नोलॉजी और सनरूफ शामिल हैं, साथ ही कनेक्टेड कार टेक्नोलॉजी जैसे मोबाइल एप कंट्रोल, रियल-टाइम ट्रैकिंग और ओटीए अपडेट्स को भी तेजी से अपनाया गया है। कम कीमत में ज्यादा फीचर्स देने की प्राइस-टू-वैल्यू रणनीति ने ग्राहकों को आकर्षित किया है। जबकि विदेशी कंपनियां इस तेजी और वैन्यू ड्रिवन अप्रोच के साथ तालमेल नहीं बैठा सकीं।
विदेशी कंपनियां की इनमें रह गईं पीछे
एक्सपर्ट्स कहते हैं कि विदेशी कंपनियों की सबसे बड़ी कमजोरी उनकी धीमी प्रोडक्ट लॉन्चिंग रही है, इसकी वजह से वे तेजी से बदलते बाजार में पीछे रह गईं। इसके अलावा भारतीय ग्राहकों की बदलती पसंद खासकर एसयूवी, फीचर्स और टेक्नोलॉजी की मांग को विदेशी कंपनियां देरी से समझ पाईं, जिसका फायदा भारतीय कंपनियों को हुआ। डीलर नेटवर्क की सीमित पहुंच और पोर्टफोलियो अपडेट में सुस्ती की वजह से वे ग्राहकों की मांग के अनुसार तुरंत प्रतिक्रिया देने में भी असफल रहीं, जिससे उनकी बाजार हिस्सेदारी पर नकारात्मक असर पड़ा।
Trending Videos
टाटा और महिंद्रा की लंबी छलांग
भारतीय कंपनियों ने ग्राहकों की नब्ज पहचानते हुए एसयूवी और ईवी सेगमेंट पर ध्यान केंद्रिक किया है। महिंद्रा ने स्कॉर्पियो एन, एक्सयूवी 3एक्सओ और थार जैसे मॉडल्स के दम पर महिंद्रा की हिस्सेदारी वित्तीय वर्ष FY22 के 6.8% से दोगुनी होकर 13.4% पहुंच गई है। वहीं, टाटा मोटर्स की नेक्सन और पंच के जरिए ईवी सेगमेंट में बढ़त बनाते हुए टाटा की हिस्सेदारी 13 प्रतिशत हो गई है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विदेशी दिग्गजों की गिरती साख
- विदेशी दिग्गज कंपनी की ह्यूंदै इस वर्ष दूसरे स्थान से नीचे गिरी है। माना जा रहा है कि पिछले 25 साल में पहली बार ऐसा हो रहा है। इसकी हिस्सेदारी 16.3% से घटकर 12.3% रह गई है, जिससे यह अब चौथे स्थान पर है।
- इसके अलावा मारुति सुजुकी अभी भी लीडर है, लेकिन उसकी हिस्सेदारी गिरकर 39.71 प्रतिशत पर आ गई है। हालांकि, टोयोटा (7.1%) की बढ़त ने जापानी ग्रुप को स्थिरता दी है। वहीं, यूरोपीय ब्रांड्स की हिस्सेदारी 6.2% से घटकर 4.3% रह गई है।
जेएसडब्ल्यू एमजी मोटर और बीवाईडी जैसे चीनी मूल के ब्रांड्स अभी छोटे हैं, लेकिन उनकी हिस्सेदारी शून्य से बढ़कर 1.5% हो गई है। बाजार एक्सपर्ट्स का कहना है कि विदेशी कंपनियां नए मॉडल्स लॉन्च करने की धीमी गति के कारण पिछड़ रही हैं।
कैसे आगे हुए भारतीय ब्रांड्स?
ऑटो एक्सपर्ट्स के अनुसार, भारतीय कंपनियां स्थानीय मांग, खासतौर पर एसयूवी के अनुसार खुद को ढालने की कोशिश कर रही हैं। महिंद्रा का आक्रामक एसयूवी अभियान और टाटा की इलेक्ट्रिक वाहन ने शहरी और ग्रामीण दोनों खरीदारों को अपनी ओर खींचा है, जिसका असर अब आंकड़ों में साफ नजर आ रहा है।
इसके अलावा भारतीय ऑटो कंपनियों ने तेज प्रोडक्ट लॉन्च और वैल्यू फॉर मनी रणनीति के जरिए बाजार में मजबूत पकड़ बनाई है। वे लगातार ऐसे मॉडल पेश कर रही हैं जिनमें एडवांस फीचर्स जैसे बड़े टचस्क्रीन, सेफ्टी टेक्नोलॉजी और सनरूफ शामिल हैं, साथ ही कनेक्टेड कार टेक्नोलॉजी जैसे मोबाइल एप कंट्रोल, रियल-टाइम ट्रैकिंग और ओटीए अपडेट्स को भी तेजी से अपनाया गया है। कम कीमत में ज्यादा फीचर्स देने की प्राइस-टू-वैल्यू रणनीति ने ग्राहकों को आकर्षित किया है। जबकि विदेशी कंपनियां इस तेजी और वैन्यू ड्रिवन अप्रोच के साथ तालमेल नहीं बैठा सकीं।
विदेशी कंपनियां की इनमें रह गईं पीछे
एक्सपर्ट्स कहते हैं कि विदेशी कंपनियों की सबसे बड़ी कमजोरी उनकी धीमी प्रोडक्ट लॉन्चिंग रही है, इसकी वजह से वे तेजी से बदलते बाजार में पीछे रह गईं। इसके अलावा भारतीय ग्राहकों की बदलती पसंद खासकर एसयूवी, फीचर्स और टेक्नोलॉजी की मांग को विदेशी कंपनियां देरी से समझ पाईं, जिसका फायदा भारतीय कंपनियों को हुआ। डीलर नेटवर्क की सीमित पहुंच और पोर्टफोलियो अपडेट में सुस्ती की वजह से वे ग्राहकों की मांग के अनुसार तुरंत प्रतिक्रिया देने में भी असफल रहीं, जिससे उनकी बाजार हिस्सेदारी पर नकारात्मक असर पड़ा।
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें ऑटोमोबाइल समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। ऑटोमोबाइल जगत की अन्य खबरें जैसे लेटेस्ट कार न्यूज़, लेटेस्ट बाइक न्यूज़, सभी कार रिव्यू और बाइक रिव्यू आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन