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NHAI:'यह आंखों को खटकता है', किरण मजूमदार-शॉ ने बंगलूरू में NH44 की खराब हालत पर जताई चिंता, NHAI ने दिया जवाब

ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amar Sharma Updated Mon, 06 Apr 2026 07:44 PM IST
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सार

'यह आँखों को खटकता है': किरण मजूमदार-शॉ ने बेंगलुरु में NH44 की खराब हालत पर चिंता जताई, NHAI ने दिया जवाब

Kiran Mazumdar-Shaw Flags Poor NH44 Condition in Bengaluru: NHAI Responds on Traffic, Maintenance and Overpass
किरण मजूमदार शाॅ - फोटो : instagram
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विस्तार

दवा कंपनी बायोकॉन की प्रमुख किरण मजूमदार-शॉ ने बंगलूरू के NH44 (होसुर रोड) की खराब स्थिति को लेकर सवाल उठाए थे। जिसके बाद इस मुद्दे को लेकर बड़े स्तर पर चर्चा छिड़ गई है। सोशल मीडिया पर की गई उनकी टिप्पणी के बाद भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने भी स्थिति पर अपनी प्रतिक्रिया दी।

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क्या है पूरा मामला?
बायोकॉन लिमिटेड की एग्जीक्यूटिव चेयरपर्सन और उद्योगपति किरण मजूमदार-शॉ ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर होसुर रोड पर सड़कों की खराब हालत को उजागर किया। इस पोस्ट में उन्होंने केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को टैग किया था।
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अपने पोस्ट में शॉ ने लिखा, "एक तरफ जहां NHAI पूरे देश में अपने सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर पर गर्व करता है, वहीं देश का अहम IT कॉरिडोर NH44 - होसुर रोड इतना खराब तरीके से क्यों डिजाइन किया गया है और उसकी देखरेख इतनी बुरी क्यों है? यह आंखों को खटकता है - सड़कों के बीच के डिवाइडर और बैरिकेड्स बहुत खराब हैं, और सड़कों के किनारे (शोल्डर्स) पर डामर नहीं बिछाया गया है। पिछले कई वर्षों से कई शिकायतें मिलने के बावजूद, इस पर कोई जवाब नहीं मिला है।"

NHAI ने क्या जवाब दिया?
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने X पर किरण मजूमदार-शॉ के पोस्ट पर उन्हें जवाब देते हुए कहा कि यह हिस्सा 2010 में पूरा हो गया था। और तब से यहां तेजी से शहरी और औद्योगिक विकास हुआ है।

प्राधिकरण ने बताया कि फिलहाल इस हिस्से पर ट्रैफिक का दबाव बहुत ज्यादा है, जहां रोजाना एक लाख से ज्यादा लोग आते-जाते हैं। जिससे इसके संचालन और रखरखाव में चुनौतियां बढ़ गई हैं।

हालांकि, कंसेशनर द्वारा नियमित रखरखाव का काम किया जा रहा है। लेकिन समय-समय पर नवीनीकरण के काम, जिनमें ओवरले भी शामिल है, अप्रैल 2025 में पूरे कर लिए गए थे। NHAI ने चार व्हीकुलर ओवरपास (Vehicular Overpasses) (VOPs) बनाने का प्रस्ताव रखा है। जिनमें वीरासंद्रा (Biocon) भी शामिल है, और तीन जगहों पर काम चल रहा है।

 

 

क्या अन्य एजेंसियों का काम भी बना रहा है बाधा?
NHAI ने बताया कि इस मार्ग पर अन्य एजेंसियों के काम का भी असर पड़ रहा है।

BMRCL द्वारा मेट्रो और सर्विस रोड का काम जारी है, जबकि KPTCL के केबल कार्यों से भी कुछ नुकसान हुआ है।

इन सभी को संबंधित एजेंसियों द्वारा ठीक किया जा रहा है।

क्या कुछ प्रोजेक्ट फिलहाल रुके हुए हैं?
बायोकॉन के पास एक रिटेनिंग वॉल का काम शुरू हुआ था। लेकिन कर्नाटक सरकार, ट्रैफिक पुलिस और मेट्रो प्रोजेक्ट से जुड़े सुझावों के बाद इसे अस्थायी रूप से रोक दिया गया।

फिलहाल उस हिस्से को भरकर अस्थायी रूप से ठीक किया गया है।

क्या लोगों की नाराजगी भी सामने आई?
इस मुद्दे पर सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रिया भी तेज रही।

कई लोगों ने खराब ड्रेनेज सिस्टम, अधूरी नालियां और कमजोर डिजाइन जैसी समस्याओं की ओर इशारा किया।कुछ यूजर्स ने यह भी कहा कि आम लोगों की शिकायतों को अक्सर गंभीरता से नहीं लिया जाता।
 

क्या यह समस्या केवल मेंटेनेंस की है या डिजाइन की भी?
यूजर्स और विशेषज्ञों का मानना है कि समस्या सिर्फ रखरखाव तक सीमित नहीं है। बल्कि सड़क की डिजाइन और निर्माण गुणवत्ता में भी खामियां हो सकती हैं।

इसमें जल निकासी की कमी, खराब ढलान और अधूरी संरचना जैसी समस्याएं शामिल हैं।

क्या आगे सुधार की उम्मीद है?
NHAI का कहना है कि सड़क की स्थिति सुधारने के लिए लगातार काम किया जा रहा है और भविष्य में ट्रैफिक को सुचारु बनाने के लिए अतिरिक्त इंफ्रास्ट्रक्चर भी विकसित किया जाएगा।

हालांकि, तेजी से बढ़ते ट्रैफिक और कई एजेंसियों के एक साथ काम करने के कारण यह चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।

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