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Indore EV: इंदौर हादसे के लिए क्या सच में इलेक्ट्रिक कार जिम्मेदार थी? जानें घटना पर ऑटो विशेषज्ञ ने क्या कहा

टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Suyash Pandey Updated Wed, 18 Mar 2026 06:51 PM IST
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सार

Indore EV Fire Expert Opinion: इंदौर के भीषण ईवी हादसे के बाद इलेक्ट्रिक कारों की सुरक्षा को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, ऑटोमोबाइल एक्सपर्ट सुवासित श्रीवास्तव का मानना है कि ऐसे हादसों की मुख्य वजह कई बार कार नहीं, बल्कि अन्य वजहें होती हैं। इसके अलावा, उन्होंने सस्ते और गैर-मानक ई-रिक्शा को भी सड़क सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बताया है। आइए पढ़ते हैं उनके साथ हुए बातचीत के अंश....

Indore EV Fire Tragedy: Expert Says Fault May Lie in Wiring, Not Electric Cars
इंदौर आग हादसा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

इंदौर के बंगाली चौराहे के पास पुगलिया परिवार के घर हुए भीषण हादसे ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। इलेक्ट्रिक कार की चार्जिंग के दौरान हुए शॉर्ट सर्किट और उसके बाद घर में रखे गैस सिलेंडरों में हुए धमाकों से कई लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। इस घटना के बाद से ही इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) की सुरक्षा पर कई बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं। क्या वाकई इलेक्ट्रिक कारें सुरक्षित नहीं हैं? क्या सस्ते के चक्कर में सुरक्षा से समझौता हो रहा है? इन तमाम जरूरी सवालों पर 'अमर उजाला' ने ऑटोमोबाइल एक्सपर्ट सुवासित श्रीवास्तव से खास बातचीत की। उन्होंने इस हादसे की तह तक जाते हुए कई अहम तकनीकी पहलुओं और हमारी रोजमर्रा की लापरवाहियों पर रोशनी डाली है। आइए जानते हैं एक्सपर्ट की नजर में क्या है ईवी में आग लगने की असली वजह:

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ईवी कार का दोष या वायरिंग की कमी? जांच है जरूरी

इंदौर की दुर्घटना को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए सुवासित श्रीवास्तव कहते हैं, "इस हादसे के लिए सीधे तौर पर इलेक्ट्रिक कार को जिम्मेदार ठहराना जल्दबाजी होगी। यह एक गंभीर जांच का विषय है। सबसे बड़ा भ्रम तो इसी बात का है कि क्या आग की शुरुआत कार के अंदर हुए किसी ब्लास्ट या तकनीकी खराबी से हुई, या फिर यह पूरी तरह से चार्जिंग पॉइंट पर हुए बिजली के शॉर्ट सर्किट का मामला है?"

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उनका मानना है कि इस बात की आशंका काफी ज्यादा है कि इलेक्ट्रिक पॉइंट या घर की वायरिंग में किसी कमी की वजह से शॉर्ट सर्किट हुआ हो। उन्होंने एक सीधा उदाहरण देते हुए समझाया, "ये ठीक वैसा ही है जैसे हम अपने घर में हैवी मोटर पंप या एसी लगाते हैं, लेकिन अगर प्लग पॉइंट या वायरिंग में कम एंपियर का स्विच लगा दें तो हैवी लोड की वजह से शॉर्ट सर्किट होकर आग लगने का खतरा हमेशा बना रहता है। इंदौर के केस में भी इस एंगल से गहन जांच होनी चाहिए कि क्या चार्जिंग के लिए स्टैंडर्ड इक्विपमेंट का इस्तेमाल किया गया था या नहीं।"

तकनीकी गड़बड़ी या ग्राहकों की लापरवाही?

जब हमने पूछा कि क्या इलेक्ट्रिक वाहनों में आग लगने की वजह तकनीकी है, तो सुवासित श्रीवास्तव ने बताया कि, "इलेक्ट्रिक गाड़ियां अभी डेवलपमेंटल स्टेज में हैं। इनमें नई तकनीक का इस्तेमाल हो रहा है और ये सरकार के जरिए तय इंटरनेशनल मानकों तथा भारतीय मौसम और रोड कंडीशन के हिसाब से तैयार की जा रही हैं। ऐसे में सारा दोष कंपनियों पर मढ़ देना सही नहीं होगा।"

उन्होंने ये भी माना कि पहले भी कुछ कारों और स्कूटर्स में आग की घटनाएं हुई हैं, लेकिन कंपनियां अपने रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) के जरिए इन पर गंभीरता से काम कर रही हैं। हालांकि, उन्होंने ग्राहकों को भी आगाह किया: "ग्राहकों को हमेशा कंपनी की गाइडलाइन के मुताबिक ही वायरिंग, तार और प्लग का इस्तेमाल करना चाहिए। कई बार छोटी सी अनदेखी भारी पड़ जाती है। जैसे इंदौर की घटना में शॉर्ट सर्किट से लगी आग ने भीषण रूप तब ले लिया, जब वह घर में रखे एलपीजी सिलेंडरों और केमिकल के ड्रम तक पहुंच गई।"


 

क्या कंपनियों की मैन्युफैक्चरिंग में कोई परेशानी है?

इस सवाल पर सुवासित श्रीवास्तव का साफ कहना था कि, "महिंद्रा, टाटा, बीवाईडी और एमजी जैसी कई नामी कंपनियां आज बाजार में अपनी बेहतरीन इलेक्ट्रिक कारें उतार चुकी हैं और वे अच्छा परफॉर्म भी कर रही हैं। ऐसा कह पाना मुश्किल है कि कंपनियों के स्तर पर कोई परेशानी है क्योंकि सब कुछ तय मानकों पर बन रहा है। फिर भी, ऐसी घटनाएं कंपनियों और ध्यान दे सकती हैं।"

उन्होंने ये भी कहा कि, "सरकार लगातार इलेक्ट्रिक कारों को बढ़ावा दे रही है, इसीलिए इसे हमें सकारात्मक पहलू के रूप में देखना चाहिए। ईवी में आग लगने की बढ़ती घटनाओं को देखकर चिंताएं जायज हैंं। लेकिन इस पर सिर्फ कंपनियों या सेगमेंट पर सवाल उठाना सही नही हैं। सरकार व कंपनियां इस दिशा में सुरक्षित मानक लाने का प्रयास कर रही हैं।"

क्या सस्ते वाहनों के कारण सुरक्षा से हो रहा है समझौता?

सुवासित श्रीवास्तव ने स्पष्ट किया कि इलेक्ट्रिक कारों के मामले में कोई भी कंपनी सुरक्षा से समझौता नहीं कर सकती, क्योंकि उन पर सरकार की सख्त नजर रहती है। लेकिन, उन्होंने सड़क पर बे-लगाम दौड़ने वाले ई-रिक्शा और थ्री-व्हीलर्स को लेकर गहरी चिंता जताई।

उन्होंने कहा, "सस्ते के नाम पर सुरक्षा से समझौता ई-रिक्शा और लोकल लेवल पर बनने वाले इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर्स में जरूर हो रहा है। इनमें लोकली असेंबल किए गए सस्ते पार्ट्स और बिना मानकों वाली बैटरियों का इस्तेमाल हो रहा है। ये अनऑथोराइज्ड ई-रिक्शा न सिर्फ सड़क पर चलने वालों के लिए बल्कि सवारियों के लिए भी जानलेवा बन चुके हैं। आग लगने की सबसे ज्यादा घटनाएं इन्हीं ई-रिक्शा में देखी जा रही हैं। सरकार को जल्द से जल्द ऐसे ई-रिक्शा पर लगाम लगाने के लिए सख्त कदम उठाने चाहिए।"


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