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Luxury Car Accidents: तेज रफ्तार, शराब और सुपरकारें.. भारत की कुख्यात लग्जरी कार दुर्घटनाएं, जिसने सबको झकझोरा
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Thu, 12 Feb 2026 07:12 PM IST
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सार
लगभग तीन दशकों में, लग्जरी कारों से जुड़े हाई-प्रोफाइल दुर्घटनाओं की एक सीरीज ने बार-बार देश को झकझोर दिया है। सिर्फ गाड़ियों की वजह से नहीं, बल्कि उन मुश्किल सवालों की वजह से जो वे पीछे छोड़ जाती हैं।
कानपुर लैंबॉर्गिनी कार एक्सीडेंट मामला
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
पिछले लगभग तीन दशकों में भारत में लग्जरी कारों से जुड़े कई हाई-प्रोफाइल सड़क हादसे सुर्खियों में रहे हैं। ये घटनाएं सिर्फ महंगी गाड़ियों की वजह से चर्चा में नहीं रहीं, बल्कि इसलिए भी कि हर बार वही असहज सवाल सामने आए। जैसे भीड़भाड़ वाली सड़कों पर बेकाबू रफ्तार, रसूख और विशेषाधिकार की छाया, और देर, संदेह व जनआक्रोश से जूझती न्याय व्यवस्था।
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1999 का BMW कांड: जब रफ्तार ने छह जिंदगियां छीन लीं?
10 जनवरी 1999 की तड़के दिल्ली के लोधी कॉलोनी इलाके में तेज रफ्तार BMW (बीएमडब्ल्यू) कार ने पुलिस चेकपोस्ट को रौंद दिया। इस हादसे में तीन पुलिसकर्मियों सहित छह लोगों की मौत हो गई और एक अन्य घायल हुआ। कार चला रहा संजीव नंदा, पूर्व नौसेना प्रमुख का पोता, मौके से फरार हो गया। बाद में जांच में सामने आया कि उसके साथियों ने गोल्फ लिंक्स स्थित एक कोठी में कार से खून के निशान साफ किए। इस कार से हो रहे तेल के रिसाव के जरिये उस तक पहुंचा जा सका था।
करीब 140 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हुए इस हिट-एंड-रन ने देशभर में गुस्सा भड़का दिया। लंबी कानूनी लड़ाई के बाद 2008 में नंदा को गैर-इरादतन हत्या का दोषी ठहराया गया। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने उसकी दो साल की सजा घटाकर पहले से काटी गई अवधि तक सीमित कर दी। साथ में भारी जुर्माना और सामुदायिक सेवा का आदेश दिया।
10 जनवरी 1999 की तड़के दिल्ली के लोधी कॉलोनी इलाके में तेज रफ्तार BMW (बीएमडब्ल्यू) कार ने पुलिस चेकपोस्ट को रौंद दिया। इस हादसे में तीन पुलिसकर्मियों सहित छह लोगों की मौत हो गई और एक अन्य घायल हुआ। कार चला रहा संजीव नंदा, पूर्व नौसेना प्रमुख का पोता, मौके से फरार हो गया। बाद में जांच में सामने आया कि उसके साथियों ने गोल्फ लिंक्स स्थित एक कोठी में कार से खून के निशान साफ किए। इस कार से हो रहे तेल के रिसाव के जरिये उस तक पहुंचा जा सका था।
करीब 140 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हुए इस हिट-एंड-रन ने देशभर में गुस्सा भड़का दिया। लंबी कानूनी लड़ाई के बाद 2008 में नंदा को गैर-इरादतन हत्या का दोषी ठहराया गया। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने उसकी दो साल की सजा घटाकर पहले से काटी गई अवधि तक सीमित कर दी। साथ में भारी जुर्माना और सामुदायिक सेवा का आदेश दिया।
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सलमान खान
- फोटो : ANI
क्या रसूख कानून से ऊपर है? सलमान खान केस की गूंज
इससे मिलती-जुलती तस्वीर 28 सितंबर 2002 को मुंबई के बांद्रा में दिखी, जब एक Toyota Land Cruiser (टोयोटा लैंड क्रूजर) फुटपाथ पर सो रहे लोगों को कुचलते हुए निकल गई। एक व्यक्ति की मौत हुई और चार घायल हुए। शुरुआत में ड्राइवर ने जिम्मेदारी ली, लेकिन अभियोजन ने उसे झूठा बताया और अभिनेता सलमान खान पर आरोप तय हुए। आखिरकार 2015 में बॉम्बे हाईकोर्ट ने संदेह का लाभ देते हुए उन्हें बरी कर दिया।
इससे मिलती-जुलती तस्वीर 28 सितंबर 2002 को मुंबई के बांद्रा में दिखी, जब एक Toyota Land Cruiser (टोयोटा लैंड क्रूजर) फुटपाथ पर सो रहे लोगों को कुचलते हुए निकल गई। एक व्यक्ति की मौत हुई और चार घायल हुए। शुरुआत में ड्राइवर ने जिम्मेदारी ली, लेकिन अभियोजन ने उसे झूठा बताया और अभिनेता सलमान खान पर आरोप तय हुए। आखिरकार 2015 में बॉम्बे हाईकोर्ट ने संदेह का लाभ देते हुए उन्हें बरी कर दिया।
पुणे पोर्श मामला
- फोटो : PTI
पुणे Porsche हादसा: 'निबंध पर जमानत' का आक्रोश क्यों?
2024 में पुणे में एक और भयावह हादसा सामने आया, जब नशे में धुत एक नाबालिग ने Porsche Taycan (पोर्शे टेयकन) कार से दो आईटी प्रोफेशनल्स को कुचल दिया। 200 किमी प्रति घंटे की रफ्तार, जमानत के बदले निबंध लिखने का आदेश, और बाद में ब्लड सैंपल बदलने जैसे आरोपों ने पूरे देश को झकझोर दिया।
नोएडा और आसपास: क्या हादसे रुकने का नाम नहीं ले रहे?
नोएडा क्षेत्र में भी ऐसी घटनाओं की कड़ी दिखी। मई 2024 में Audi (ऑडी) की टक्कर से 63 वर्षीय पैदल यात्री जनक देव शाह की मौत हो गई। मार्च 2025 में Lamborghini (लैंबॉर्गिनी) कार की टेस्ट ड्राइव के दौरान मजदूरों को कुचल दिया गया। जिसमें ड्राइवर को जल्द जमानत मिल गई। जुलाई 2025 में एक BMW हादसे में दो और लोगों की जान चली गई।
2024 में पुणे में एक और भयावह हादसा सामने आया, जब नशे में धुत एक नाबालिग ने Porsche Taycan (पोर्शे टेयकन) कार से दो आईटी प्रोफेशनल्स को कुचल दिया। 200 किमी प्रति घंटे की रफ्तार, जमानत के बदले निबंध लिखने का आदेश, और बाद में ब्लड सैंपल बदलने जैसे आरोपों ने पूरे देश को झकझोर दिया।
नोएडा और आसपास: क्या हादसे रुकने का नाम नहीं ले रहे?
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लैंबॉर्गिनी कार एक्सीडेंट मामला
- फोटो : Amar Ujala
कानपुर Lamborghini कांड 2026: क्या इतिहास खुद को दोहरा रहा है?
8 फरवरी 2026 को कानपुर में एक और सुपरकार हादसे ने सुर्खियां बटोरीं। करीब 10 करोड़ रुपये की Lamborghini Revuelto (लेम्बोर्गिनी रेवुएल्टो) ने जीटी रोड के पास पैदल यात्रियों, एक ऑटो-रिक्शा और बाइक को टक्कर मार दी। कम से कम छह लोग घायल हुए। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक कार बेहद तेज रफ्तार में थी। और हादसे के बाद बाउंसर ड्राइवर को वहां से ले गए।
बाद में कार तंबाकू कारोबारी उमेश मिश्रा के घर से जब्त की गई। उनके बेटे शिवम मिश्रा को मुख्य आरोपी बताया गया, हालांकि दावा किया गया कि गाड़ी एक किराये पर लिया हुआ ड्राइवर चला रहा था। पीड़ितों के बीच मुआवजे की बातचीत और न्याय की मांग के बीच पुलिस लापरवाह ड्राइविंग और मौके से फरार होने की जांच कर रही है।
8 फरवरी 2026 को कानपुर में एक और सुपरकार हादसे ने सुर्खियां बटोरीं। करीब 10 करोड़ रुपये की Lamborghini Revuelto (लेम्बोर्गिनी रेवुएल्टो) ने जीटी रोड के पास पैदल यात्रियों, एक ऑटो-रिक्शा और बाइक को टक्कर मार दी। कम से कम छह लोग घायल हुए। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक कार बेहद तेज रफ्तार में थी। और हादसे के बाद बाउंसर ड्राइवर को वहां से ले गए।
बाद में कार तंबाकू कारोबारी उमेश मिश्रा के घर से जब्त की गई। उनके बेटे शिवम मिश्रा को मुख्य आरोपी बताया गया, हालांकि दावा किया गया कि गाड़ी एक किराये पर लिया हुआ ड्राइवर चला रहा था। पीड़ितों के बीच मुआवजे की बातचीत और न्याय की मांग के बीच पुलिस लापरवाह ड्राइविंग और मौके से फरार होने की जांच कर रही है।
क्या 'VIP बच्चों' और आम पीड़ितों के लिए अलग न्याय है?
इन तमाम घटनाओं के बीच एक कड़वी सच्चाई उभरती है। अक्सर धनी और प्रभावशाली परिवारों से जुड़े आरोपी त्वरित जवाबदेही से बच निकलते हैं। शराब, तेज रफ्तार और कई बार बिना रजिस्ट्रेशन वाली महंगी गाड़ियों से जुड़े ये हादसे सिस्टम की खामियों को उजागर करते हैं। जिसमें देरी से ब्लड टेस्ट, सबूतों से छेड़छाड़, दबाव में बयान और राजनीतिक दखल जैसे न जानें कितने खेल नजर आते हैं।
जहां ट्रक ड्राइवर वर्षों जेल में सड़ते हैं, वहीं पॉर्शे कार से कुचलने वाले निबंध लिखकर जमानत पा लेते हैं। फिर भी जनआक्रोश ने कुछ सकारात्मक कदम भी दिलाए हैं। जिसमें पब सील हुए, अफसर निलंबित हुए और फास्ट-ट्रैक अदालतें सक्रिय हुईं। ये संकेत देते हैं कि सुधार संभव है, बशर्ते इच्छाशक्ति हो।
इन तमाम घटनाओं के बीच एक कड़वी सच्चाई उभरती है। अक्सर धनी और प्रभावशाली परिवारों से जुड़े आरोपी त्वरित जवाबदेही से बच निकलते हैं। शराब, तेज रफ्तार और कई बार बिना रजिस्ट्रेशन वाली महंगी गाड़ियों से जुड़े ये हादसे सिस्टम की खामियों को उजागर करते हैं। जिसमें देरी से ब्लड टेस्ट, सबूतों से छेड़छाड़, दबाव में बयान और राजनीतिक दखल जैसे न जानें कितने खेल नजर आते हैं।
जहां ट्रक ड्राइवर वर्षों जेल में सड़ते हैं, वहीं पॉर्शे कार से कुचलने वाले निबंध लिखकर जमानत पा लेते हैं। फिर भी जनआक्रोश ने कुछ सकारात्मक कदम भी दिलाए हैं। जिसमें पब सील हुए, अफसर निलंबित हुए और फास्ट-ट्रैक अदालतें सक्रिय हुईं। ये संकेत देते हैं कि सुधार संभव है, बशर्ते इच्छाशक्ति हो।