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Maharashtra Green Tax: अब पुरानी गाड़ियां रखना होगा महंगा, विधानसभा में पास हुआ ग्रीन टैक्स बिल, जानें नए नियम
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Jagriti
Updated Thu, 19 Mar 2026 02:30 PM IST
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सार
Maharashtra Green Tax Hike: महाराष्ट्र सरकार ने बढ़ते प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। विधानसभा में सर्वसम्मति से पारित महाराष्ट्र मोटर व्हीकल टैक्स (संशोधन) बिल 2026 के तहत अब पुरानी और प्रदूषण फैलाने वाली गाड़ियों पर लगने वाला पर्यावरण कर (ग्रीन टैक्स) सीधे दोगुना कर दिया गया है। दो-पहिया से लेकर डीजल कारों तक, अब आपको अपनी जेब ज्यादा ढीली करनी होगी। जानिए इस नए टैक्स ढांचे का आप पर क्या असर पड़ेगा और सरकार इस पैसे का इस्तेमाल कहां करेगी।
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : freepik
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विस्तार
महाराष्ट्र विधानसभा ने मोटर व्हीकल टैक्स (संशोधन) बिल, 2026 को सर्वसम्मति से पास कर दिया है। इसे राज्य के परिवहन मंत्री प्रताप सारनिक ने पेश किया है। इस बिल का मुख्य उद्देश्य बढ़ते वायु प्रदूषण पर नियंत्रण और पुराने, ज्यादा प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को कम करना है।
इस नई नीति के सरकार का मुख्य उद्देश्य पुराने और अधिक प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की संख्या को कम करना है, साथ ही BS-VI मानकों और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देकर शहरों की वायु गुणवत्ता में सुधार लाना है। भारत में बीएस-VI उत्सर्जन मानक दुनिया के सबसे सख्त नियमों में गिने जाते हैं, जो वाहनों से निकलने वाले हानिकारक उत्सर्जन को काफी हद तक नियंत्रित करने में मदद करते हैं।
अब कितना देना होगा ग्रीन टैक्स?
राज्य को कितना फायदा होगा?
इस नीति से राज्य सरकार को भी वित्तीय लाभ होने की उम्मीद है। अनुमान है कि इससे हर साल 160 करोड़ रुपये से अधिक अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होगा, जिसे सड़क सुरक्षा को मजबूत करने, आधुनिक परिवहन बुनियादी ढांचे के विकास, ऑटोमैटेड व्हीकल टेस्टिंग सिस्टम स्थापित करने और ड्राइवर प्रशिक्षण जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में निवेश किया जाएगा।
इंडस्ट्री को भी राहत
सरकार ने जहां एक ओर पुराने वाहनों पर टैक्स बढ़ाकर सख्ती दिखाई है, वहीं दूसरी ओर इंडस्ट्रियल एरिया को संतुलित राहत भी दी है। जैसे, क्रेन वाहनों पर मोटर टैक्स को 30 लाख रुपये तक सीमित रखा गया है, जिससे कंस्ट्रक्शन सेक्टर को सहूलियत मिलेगी और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को गति मिलने की संभावना है।
इन इलाको पर पड़ेगा असर
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इस नई नीति के सरकार का मुख्य उद्देश्य पुराने और अधिक प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की संख्या को कम करना है, साथ ही BS-VI मानकों और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देकर शहरों की वायु गुणवत्ता में सुधार लाना है। भारत में बीएस-VI उत्सर्जन मानक दुनिया के सबसे सख्त नियमों में गिने जाते हैं, जो वाहनों से निकलने वाले हानिकारक उत्सर्जन को काफी हद तक नियंत्रित करने में मदद करते हैं।
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अब कितना देना होगा ग्रीन टैक्स?
| वाहन की श्रेणी | पुराना टैक्स (लगभग) | नया टैक्स |
| दो-पहिया वाहन | 2,000 | 4,000 |
| पेट्रोल कार | 3,000 | 6,000 |
| डीजल कार | 3,500 | 7,000 |
राज्य को कितना फायदा होगा?
इस नीति से राज्य सरकार को भी वित्तीय लाभ होने की उम्मीद है। अनुमान है कि इससे हर साल 160 करोड़ रुपये से अधिक अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होगा, जिसे सड़क सुरक्षा को मजबूत करने, आधुनिक परिवहन बुनियादी ढांचे के विकास, ऑटोमैटेड व्हीकल टेस्टिंग सिस्टम स्थापित करने और ड्राइवर प्रशिक्षण जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में निवेश किया जाएगा।
इंडस्ट्री को भी राहत
सरकार ने जहां एक ओर पुराने वाहनों पर टैक्स बढ़ाकर सख्ती दिखाई है, वहीं दूसरी ओर इंडस्ट्रियल एरिया को संतुलित राहत भी दी है। जैसे, क्रेन वाहनों पर मोटर टैक्स को 30 लाख रुपये तक सीमित रखा गया है, जिससे कंस्ट्रक्शन सेक्टर को सहूलियत मिलेगी और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को गति मिलने की संभावना है।
इन इलाको पर पड़ेगा असर
- यह नीति अप्रत्यक्ष रूप से इलेक्ट्रिक वाहनों और नई ऑटोमोटिव तकनीकों को भी बढ़ावा देती है। जैसे-जैसे पुराने वाहनों का रखरखाव और टैक्स महंगा होगा, लोग स्वाभाविक रूप से ईवी या BS-VI मानक वाले नए वाहनों की ओर शिफ्ट करेंगे। इससे न केवल प्रदूषण कम होगा, बल्कि देश में स्वच्छ परिवहन की दिशा में भी तेजी आएगी।
- इसके अलावा, सरकार का मानना है कि इस नीति से ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। स्क्रैपिंग सेंटर, वाहन सर्विसिंग और ईवी इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में गतिविधियां बढ़ेंगी, जिससे स्थानीय स्तर पर आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।
- हालांकि यह योजना संतुलित मानी जा रही है, क्योंकि इससे सरकारी खजाने पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा, बल्कि राजस्व में वृद्धि होगी। यही वजह है कि इस बिल को विधानसभा में सभी राजनीतिक दलों का समर्थन मिला और यह सर्वसम्मति से पारित हो गया। प्रदूषण जैसी साझा समस्या से निपटने के लिए यह नीति सख्ती और संतुलन दोनों का एक प्रभावी उदाहरण पेश करती है।