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NHAI New Rules: बकाया टोल 72 घंटे में नहीं भरा तो देना होगा दोगुना टैक्स; RC ट्रांसफर व रिन्यूअल भी होगा ब्लॉक
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Jagriti
Updated Thu, 19 Mar 2026 02:38 PM IST
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सार
Barrier-less Toll Plaza Rules: सरकार ने नेशनल हाइवे टोलिंग सिस्टम को और सख्त बनाते हुए नए नियम लागू किए हैं। अब अगर फास्टैग में बैलेंस कम होने या तकनीकी गड़बड़ी की वजह से टोल नहीं कटता, तो 72 घंटे के भीतर भुगतान करना जरूरी होगा, नहीं तो आपको दोगुना शुल्क देना पड़ेगा। जानिए नए नियम के बारे में विस्तार से..
NHAI
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने नेशनल हाईवेज फी रूल्स में संशोधन किए हैं। ये नियम मंगलवार यानी 17 मार्च से प्रभावी हो गए हैं। इनका उद्देश्य बैरियर-मुक्त टोलिंग सिस्टम में होने वाली राजस्व हानि को रोकना और टोलिंग एजेंसियों को अधिक जवाबदेह बनाना है।
क्या है अपेड यूजर फी?
नए नियमों में एक नया शब्द जोड़ा गया है अपेड यूजर फी। इसका मतलब है कि जब आपकी गाड़ी बैरियर-लेस टोल से गुजरती है, तो सिस्टम आपकी गाड़ी को रिकॉर्ड कर लेता है, लेकिन बैलेंस न होने या टैग खराब होने की वजह से टोल का पैसा नहीं कट पाता। तो इसे अब बकाया माना जाएगा।
ये भी पढ़ें: NH Projects: क्यों नहीं बन पा रहे देश के 85 बड़े नेशनल हाइवे? जमीन से लेकर कानून तक, नितिन गडकरी ने बताईं वजह
ई-नोटिस और 72 घंटे की मोहलत
जैसे ही आप बिना टोल दिए गुजरेंगे, आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर एसएमएस, ईमेल या एप के जरिए एक ई-नोटिस आएगा। अगर आप इस नोटिस को तीन दिन यानी 72 घंटे की वजह से टोल चुका देते हैं, तो आपका केवल मूल राशि ही देनी होगी, लेकिन अगर आप ऐसा नहीं करते तो और समय समाप्त हो गया है, तो आपको सीधे दोगुना भुगतान करना होगा।
वाहन डेटाबेस से सीधा कनेक्शन
अब टोल सिस्टम को सीधे वाहन पोर्टल से जोड़ दिया गया है। अगर आपके टोल का बकाया 15 दिनों से ज्यादा समय तक पेडिंग रहता है, तो उस वाहन का विवरण ब्लैकलिस्ट श्रेणी में डाल दिया जाएगा। जब तक आप बकाया नहीं चुकाते, तब तक आप अपनी गाड़ी की आरसी का ट्रांसफर, रिन्यूअल या अन्य सरकारी सेवाएं नहीं ले पाएंगे।
टोल कंपनियों की भी बढ़ी जवाबदेही
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क्या है अपेड यूजर फी?
नए नियमों में एक नया शब्द जोड़ा गया है अपेड यूजर फी। इसका मतलब है कि जब आपकी गाड़ी बैरियर-लेस टोल से गुजरती है, तो सिस्टम आपकी गाड़ी को रिकॉर्ड कर लेता है, लेकिन बैलेंस न होने या टैग खराब होने की वजह से टोल का पैसा नहीं कट पाता। तो इसे अब बकाया माना जाएगा।
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ई-नोटिस और 72 घंटे की मोहलत
जैसे ही आप बिना टोल दिए गुजरेंगे, आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर एसएमएस, ईमेल या एप के जरिए एक ई-नोटिस आएगा। अगर आप इस नोटिस को तीन दिन यानी 72 घंटे की वजह से टोल चुका देते हैं, तो आपका केवल मूल राशि ही देनी होगी, लेकिन अगर आप ऐसा नहीं करते तो और समय समाप्त हो गया है, तो आपको सीधे दोगुना भुगतान करना होगा।
वाहन डेटाबेस से सीधा कनेक्शन
अब टोल सिस्टम को सीधे वाहन पोर्टल से जोड़ दिया गया है। अगर आपके टोल का बकाया 15 दिनों से ज्यादा समय तक पेडिंग रहता है, तो उस वाहन का विवरण ब्लैकलिस्ट श्रेणी में डाल दिया जाएगा। जब तक आप बकाया नहीं चुकाते, तब तक आप अपनी गाड़ी की आरसी का ट्रांसफर, रिन्यूअल या अन्य सरकारी सेवाएं नहीं ले पाएंगे।
टोल कंपनियों की भी बढ़ी जवाबदेही
- सरकार ने केवल जनता पर ही नहीं, बल्कि टोलिंग एजेंसियों पर भी नकेल कसी है। इसमें अगर किसी वाहन मालिक ने टोल कटौती को लेकर कोई शिकायत दर्ज की है, तो एजेंसी को 5 दिनों के भीतर उसका निपटारा करना होगा।
- नियम के तहत अगर एजेंसी ने पांच दिन में जांच पूरी नहीं की, तो टोल रिकवरी का क्लेम अपने आप समाप्त हो जाएगा। यानी यूजर को फिर वह पैसा नहीं देना होगा। वाहन मालिक अब नामित पोर्टल पर जाकर अपनी गाड़ी के सभी बकाया टोल, ई-नोटिस की स्थिति और शिकायतों का स्टेटस चेक कर सकेंगे। इससे टोल प्लाजा पर होने वाली बहस और मैन्युअल गलतियां खत्म हो सकेंगी।