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MHA: दिल्ली ट्रैफिक पर बड़ा एक्शन, सरकार की हाई-लेवल कमेटी करेगी जाम-मुक्त राजधानी का कायाकल्प, जानें प्लान
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Jagriti
Updated Fri, 27 Feb 2026 11:01 AM IST
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सार
Delhi Traffic Management MHA Committee: दिल्ली की सड़कों पर ट्रैफिक और पार्किंग की सिरदर्दी को खत्म करने के लिए केंद्र सरकार ने कमर कस ली है। इसके लिए गृह मंत्रालय (MHA) ने एक शक्तिशाली उच्च-स्तरीय समिति का गठन किया है, जो राजधानी के ट्रैफिक सिस्टम का कायाकल्प करेगी। पीक आवर्स के जाम से लेकर पार्किंग के डायनामिक रेट्स तक, यह कमेटी दिल्ली की मोबिलिटी को पूरी तरह बदलने के लिए एक मास्टरप्लान तैयार कर रही है।
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Freepik
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विस्तार
राजधानी दिल्ली में बढ़ते ट्रैफिक जाम, अव्यवस्थित पार्किंग आदि को लेकर केंद्र सरकार ने निर्णायक कदम उठाया है। मिनिस्ट्री ऑफ होम अफेयर्स (MHA) ने एक उच्च-स्तरीय समिति गठित की है, जो लंबे समय और समन्वित रणनीति के जरिए राजधानी की मोबिलिटी को बेहतर बनाने की दिशा में काम करेगी। इनका मुख्य फोकस पीक आवर्स जाम में कमी, मल्टीमॉडल इंटीग्रेशन, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और डायनामिक पार्किंग प्राइसिंग पर रहेगा।
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दिल्ली की सड़कों के लिए मास्टर प्लान
दिल्ली में ट्रैफिक की समस्या अब केवल गाड़ियों की नहीं रही, बल्कि सड़क डिजाइन और प्रबंधन की भी हो गई है। इसके लिए गृह मंत्रालय की इस नई समिति में विभिन्न मंत्रालयों के सचिव शामिल हैं, जो इन मुख्य बिंदुओं पर काम करेंगे:
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पीक आवर्स जाम में कमी
समिति खास तौर पर उन कॉरिडोर और चौराहों की पहचान करेगी जहां रोजाना भारी जाम लगता है। ट्रैफिक फ्लो स्टडी, डेटा एनालिटिक्स और इंजीनियरिंग ऑडिट के आधार पर सुधारात्मक उपाय सुझाए जाएंगे।
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सड़क और स्ट्रीट डिजाइन की समीक्षा
मौजूदा रोड नेटवर्क का तकनीकी मूल्यांकन किया जाएगा। बोतलनेक्स (जाम वाले पॉइंट्स) की पहचान कर स्ट्रक्चरल बदलाव जैसे लेन रीडिजाइन, बेहतर सिग्नलिंग, ग्रेड सेपरेशन और पैदल यात्री सुविधाएं की सिफारिश की जा सकती है।
मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट इंटीग्रेशन
समिति का बड़ा लक्ष्य मेट्रो, बस, पैरा-ट्रांजिट और इंटरमीडिएट पब्लिक ट्रांसपोर्ट के बीच बेहतर समन्वय बनाना है। इससे यात्रियों को एक से दूसरे माध्यम में ट्रांजिशन करने में आसानी होगी और कुल यात्रा समय घटेगा। कहा जा रहा है कि कॉमन टिकटिंग सिस्टम, इंटीग्रेटेड मोबिलिटी कार्ड और रियल-टाइम ट्रैकिंग जैसी सुविधाओं को बढ़ावा दिया जाए।
इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा
दिल्ली पहले से ईवी अपनाने में आगे माना जा रहा है। समिति इलेक्ट्रिक बसों, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और अंतिम-मील कनेक्टिविटी को मजबूत करने पर सुझाव दे सकती है, जिससे प्रदूषण में कमी और ट्रैफिक लोड में संतुलन आए।
डायनामिक पार्किंग प्राइसिंग
राजधानी में अवैध और अनियंत्रित पार्किंग जाम का बड़ा कारण माना जाता है, जिसे देखते हुए समिति पार्किंग के लिए डायनामिक प्राइसिंग मॉडल, जहां मांग के अनुसार शुल्क तय हो पर विचार करेगी। इसका उद्देश्य भीड़भाड़ वाले व्यावसायिक और आवासीय क्षेत्रों में अनावश्यक पार्किंग को कम करना है।
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क्यों जरूरी था यह कदम?
ऑटो एक्सपर्ट्स के अनुसार, दिल्ली में प्रतिदिन लाखों वाहन सड़कों पर उतरते हैं। ट्रैफिक जाम से ईंधन की बर्बादी तो होती ही है, साथ ही वायु प्रदूषण भी बढ़ता है। आर्थिक उत्पादकता पर असर पड़ता है। सयात्रियों का औसत ट्रैवल टाइम लगातार बढ़ रहा है। इनका मानना है कि केवल फ्लाईओवर या नई सड़कें बनाना पर्याप्त नहीं है। समन्वित मोबिलिटी प्लान, डेटा-आधारित नीति और मांग-प्रबंधन (Demand Management) रणनीति ही स्थायी समाधान दे सकती है।
आगे क्या?
अनुमान लगाया जा रहा है कि समिति की सिफारिशों के आधार पर चरणबद्ध तरीके से नीतिगत और बुनियादी ढांचे में बदलाव किए जा सकते हैं। अगर इन उपायों को प्रभावी रूप से लागू किया गया, तो आने वाले वर्षों में दिल्ली की ट्रैफिक स्थिति में ठोस सुधार देखने को मिल सकता है। राजधानी की सड़कों पर जाम कम करने की यह पहल केवल यातायात सुधार नहीं, बल्कि बेहतर शहरी जीवन गुणवत्ता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।