EV: बैटरी रीसाइक्लिंग और ACC इकोसिस्टम को मजबूत करने की तैयारी, MHI नई नीति और प्रोत्साहन पर कर रहा विचार
भारत में घरेलू बैटरी निर्माण को मजबूत बनाने की दिशा में भारी उद्योग मंत्रालय नई नीतिगत पहल पर काम कर रहा है। 'इंडिया एनर्जी स्टोरेज वीक 2026' बैटरी और एनर्जी स्टोरेज पर चर्चा करने के लिए नीति-निर्माताओं और इंडस्ट्री लीडर्स को एक साथ लेकर आया।
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विस्तार
भारत को इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) और एनर्जी स्टोरेज के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए केंद्र सरकार अब एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। भारी उद्योग मंत्रालय देश के भीतर बैटरी मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए 'बैटरी रिसाइक्लिंग' (बैटरी के पुनर्चक्रण) और 'एडवांस केमिस्ट्री सेल्स' (ACC) के लिए नीतिगत सहायता का दायरा बढ़ाने पर काम कर रहा है। इसके साथ ही, भविष्य की नई और खास बैटरी तकनीकों के लिए भी नए इंसेंटिव्स (प्रोत्साहन) देने पर विचार किया जा रहा है।
'इंडिया एनर्जी स्टोरेज एलायंस' द्वारा आयोजित तीन दिवसीय 12वें इंडिया एनर्जी स्टोरेज वीक (IESW) 2026 के दौरान भारी उद्योग मंत्रालय के संयुक्त सचिव विजय मित्तल ने इस बड़े प्लान की घोषणा की। आइए जानते हैं कि सरकार की इस नई रणनीति में क्या खास बाते हैं।
एडवांस केमिस्ट्री सेल्स (ACC) और नई बैटरी तकनीकों को लेकर सरकार का क्या प्लान है?
संयुक्त सचिव विजय मित्तल ने कार्यक्रम में स्पष्ट किया कि मंत्रालय का उद्देश्य अब इस क्षेत्र में काम करने वाले दायरे को और बड़ा करना है। ये हैं इसकी अहम बातें:
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इंसेंटिव फ्रेमवर्क का विस्तार:
सरकार एसीसी (ACC) के लिए मौजूदा इंसेंटिव सिस्टम को और बड़ा करने पर विचार कर रही है। इसका उद्देश्य यह है कि इंडस्ट्री के अधिक से अधिक ऑपरेटरों, साझेदारों और नए खिलाड़ियों को इस योजना के तहत कवर किया जा सके और उन्हें सरकारी मदद मिल सके। -
नीश बैटरी टेक्नोलॉजीज के लिए नीतियां: उद्योग जगत की तरफ से लगातार यह मांग की जा रही थी कि खास और उभरती हुई बैटरी तकनीकों के लिए विशिष्ट नीतियां बनाई जाएं। सरकार ने इस मांग को स्वीकार करते हुए अब इन उभरती तकनीकों के लिए नए इंसेंटिव देने का मूल्यांकन शुरू कर दिया है।
सरकार का फोकस केवल इलेक्ट्रिक वाहनों से हटकर अब किस ओर बढ़ा है?
विजय मित्तल के अनुसार, सरकार की सोच में अब एक बड़ा और सकारात्मक बदलाव आया है। सरकार अब केवल गाड़ियों तक सीमित नहीं है:
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पूरी वैल्यू चेन का विकास:
अब सरकार का ध्यान केवल इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने से आगे बढ़कर पूरी 'बैटरी वैल्यू चेन' को भारत में ही विकसित करने पर केंद्रित हो गया है। इसमें निम्नलिखित महत्वपूर्ण कड़ियों को शामिल किया गया है और उन्हें मजबूत किया जा रहा है:-
सेल मैन्युफैक्चरिंग: बैटरी के मुख्य सेल का भारत में ही निर्माण।
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कंपोनेंट्स: बैटरी बनाने में इस्तेमाल होने वाले कल-पुर्जे।
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क्रिटिकल मिनरल्स: बैटरी के लिए आवश्यक महत्वपूर्ण खनिज।
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रिसाइक्लिंग और फाइनेंसिंग: पुरानी बैटरियों का दोबारा इस्तेमाल और इस पूरे सेक्टर के लिए वित्तीय मदद (लोन आदि) की व्यवस्था।
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बैटरी रिसाइक्लिंग और कच्चे माल के लिए क्या नए कदम उठाए जा रहे हैं?
बैटरी के कचरे को रोकने और भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए मंत्रालय ने कई नए सहयोग और पहलों की घोषणा की है:
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यूरोपीय संघ के साथ पायलट प्रोजेक्ट्स:
संयुक्त सचिव ने एलान किया कि भारी उद्योग मंत्रालय, 'प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के कार्यालय' और 'यूरोपीय संघ' के साथ मिलकर भारत में बैटरी रिसाइक्लिंग इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए कुछ पायलट प्रोजेक्ट्स (प्रायोगिक परियोजनाएं) शुरू कर रहा है। -
कंपोनेंट-लेवल सपोर्ट और ALBM फ्रेमवर्क:
मंत्रालय इस समय कल-पुर्जों के स्तर पर सहायता तंत्र के प्रस्तावों का मूल्यांकन कर रहा है। इसके तहत 'बैटरी निर्माताओं की स्वीकृत सूची' जैसा एक रेगुलेटरी फ्रेमवर्क तैयार करने पर विचार हो रहा है। -
घरेलू रिफाइनिंग को बढ़ावा:
बैटरी उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले महत्वपूर्ण खनिजों की देश के भीतर ही रिफाइनिंग (को बढ़ावा देने के लिए खान मंत्रालय ने कई नई योजनाएं शुरू की हैं।
इन सभी नीतिगत बदलावों से देश को भविष्य में क्या फायदा होगा?
आयात पर घटेगी निर्भरता: इन सभी कदमों और नीतियों का अंतिम लक्ष्य भारत की विदेशी देशों पर निर्भरता को कम करना है। विजय मित्तल ने भरोसा जताया कि जैसे-जैसे भारत की घरेलू विनिर्माण क्षमता का विस्तार होगा, वैसे-वैसे विदेशों से आयात होने वाली बैटरियों पर भारत की निर्भरता काफी कम हो जाएगी। मंत्रालय नीतिगत हस्तक्षेपों के जरिए इस पूरे सेक्टर की ग्रोथ को लगातार सपोर्ट करता रहेगा।