Modified SUV: केरल में बाढ़ राहत में जुटी मॉडिफाइड एसयूवी का कटा चालान, जानें इस पर क्यों छिड़ गया विवाद
केरल के पथानामथिट्टा जिले में बाढ़ राहत कार्य में जुटी एक मॉडिफाइड महिंद्रा थार पर मोटर वाहन विभाग ने कार्रवाई की है। इस घटना के बाद स्थानीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है और कई लोगों ने इस पर सवाल भी उठाए हैं।
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विस्तार
केरल के पथानामथिट्टा जिले के अरनमुला इलाके में भारी बारिश और अचानक आई बाढ़ के कारण जनजीवन अस्त-व्यस्त है। ऐसे संकट के समय में स्थानीय निवासी अमल अपनी महिंद्रा थार (Mahindra Thar) के जरिए राहत और बचाव कार्यों में प्रशासन और कार्यकर्ताओं की मदद कर रहे थे।
हालांकि, जब वह अपनी गाड़ी के लिए स्पेयर पार्ट्स खरीदने अडूर जा रहे थे। तभी मोटर वाहन विभाग की टीम ने उनकी गाड़ी को रोक लिया और नियमों के उल्लंघन के आरोप में चालान काट दिया। इस घटना के सामने आते ही सोशल मीडिया से लेकर स्थानीय स्तर पर मोटर वाहन विभाग की कार्रवाई की तीखी आलोचना होने लगी।
मोटर वाहन विभाग ने थार का चालान क्यों और कितना काटा?
मेझुवेली के रहने वाले थार मालिक अमल पर कुल 7,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया है। एमवीडी द्वारा की गई इस कार्रवाई के मुख्य कारण ये हैं:
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आफ्टरमार्केट लाइट्स:
गाड़ी में नियम विरुद्ध तरीके से अतिरिक्त (आफ्टरमार्केट) लाइट्स लगाने के लिए 5,000 रुपये का चालान काटा गया। -
प्रदूषण प्रमाण पत्र न होना:
वैध पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल (PUC) सर्टिफिकेट न होने के कारण 2,000 रुपये की अतिरिक्त पेनल्टी लगाई गई।
गाड़ी मालिक का पक्ष:
थार मालिक अमल ने स्वीकार किया कि यातायात के नियम सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू होते हैं और वे जुर्माना भरने को तैयार हैं। हालांकि, उन्होंने इस बात पर दुख जताया कि जिस समय उनकी गाड़ी का उपयोग बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए किया जा रहा था, उस वक्त यह कार्रवाई की गई। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि चेकिंग के दौरान गाड़ी में लगी अतिरिक्त लाइट्स चालू नहीं थीं।
बाढ़ और आपात स्थिति में मॉडिफाइड ऑफ-रोड वाहनों की क्या भूमिका होती है?
केरल के बाढ़ प्रभावित इलाकों में ऐसी मॉडिफाइड ऑफ-रोड गाड़ियां और उनके उत्साही मालिक रेस्क्यू टीमों के लिए रीढ़ की हड्डी साबित हो रहे हैं:
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जलभराव और कठिन रास्तों में आवाजाही:
उच्च ग्राउंड क्लीयरेंस और मजबूत टायरों के कारण ये वाहन पानी से भरी सड़कों और दलदली रास्तों पर आसानी से निकल जाते हैं। -
राहत सामग्री का वितरण:
इन गाड़ियों का उपयोग फंसे हुए लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने, भोजन के पैकेट, पीने का पानी और जरूरी दवाइयां पहुंचाने में किया जा रहा है। -
बेहतर दृश्यता:
बारिश, धुंध और अंधेरे में रास्ता साफ देखने के लिए अतिरिक्त लाइट्स लगाई जाती हैं। हालांकि, सार्वजनिक सड़कों पर बिना अनुमति ऐसी लाइट्स का उपयोग मोटर वाहन अधिनियम के तहत प्रतिबंधित है। और केरल सरकार अनधिकृत संशोधनों पर काफी सख्त रुख अपनाती है।
इस मामले में क्या राजनीतिक हस्तक्षेप हुआ है और क्या नया विवाद खड़ा हुआ है?
आपदा के समय में मदद कर रहे वाहन पर कार्रवाई होने से राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर नई बहस छिड़ गई है:
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मुख्यमंत्री का आश्वासन:
केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने वाहन मालिक अमल से फोन पर बात की और इस पूरे मामले में हस्तक्षेप करने और मदद करने का आश्वासन दिया। -
नियम बनाम आपदा राहत की बहस:
इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आपातकालीन स्थितियों के दौरान अधिकारियों को मॉडिफाइड वाहनों के साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए।
जहां एक ओर सड़क सुरक्षा के लिए मोटर वाहन नियमों का पालन जरूरी है। वहीं दूसरी ओर वाहन मालिकों और ऑटो-उत्साहियों का तर्क है कि प्राकृतिक आपदाओं में बचाव कार्य के लिए तैनात किए जाने वाले वाहनों के लिए एक स्पष्ट और अस्थायी छूट का दायरा बनाया जाना चाहिए।
यह मामला अब इस सवाल को भी सामने ला रहा है कि प्राकृतिक आपदाओं के दौरान राहत कार्य में जुटे मॉडिफाइड वाहनों के लिए नियमों और मानवीय जरूरतों के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।