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Hydrogen Cars: न धुआं, न प्रदूषण! इस कार के साइलेंसर से निकलता है शुद्ध पानी, जिसे आप पी भी सकते हैं

ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Suyash Pandey Updated Tue, 19 May 2026 10:18 PM IST
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सार

Hydrogen Car: इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) के बाद अब दुनिया भर में हाइड्रोजन कारों की चर्चा जोरों पर है। ये ऐसी एडवांस कारें हैं जिन्हें घंटों चार्ज करने का झंझट नहीं होता और इनके साइलेंसर से जहरीले धुएं के बजाय शुद्ध पानी निकलता है। इस लेख में हम जानेंगे कि हाइड्रोजन तकनीक कैसे काम करती है, बाजार में कौन-से मॉडल मौजूद हैं और ये शानदार कारें अब तक हमारी पहुंच से दूर क्यों हैं।

No Smoke, No Pollution: Hydrogen Car Emits Only Pure Water From Its Exhaust
Toyota Hydrogen fuel-cell car Mirai - फोटो : Toyota
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विस्तार

हाइड्रोजन कारें काफी हद तक इलेक्ट्रिक कारों (ईवी) जैसी ही होती हैं। लेकिन, इलेक्ट्रिक कारों की तरह इन्हें बार-बार किसी बाहरी चार्जर से चार्ज करने का झंझट नहीं होता। ये कारें अपनी मोटर को चलाने के लिए खुद ही बिजली बनाती हैं।

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क्या है इन कारों की खासियत?

हाइड्रोजन कार के साइलेंसर से कोई धुआं, हानिकारक गैस या बदबू नहीं निकलती। ये पूरी तरह से हाइड्रोजन फ्यूल पर चलती हैं और बिजली बनाने के लिए एडवांस तकनीक का इस्तेमाल करती हैं। सबसे दिलचस्प बात यह है कि इसके साइलेंसर से सिर्फ पानी की बूंदें या भाप निकलती है। कुछ मामलों में तो यह पानी इतना साफ होता है कि आप इसे पी भी सकते हैं।

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यह कार काम कैसे करती है?

हाइड्रोजन कारें काफी हद तक इलेक्ट्रिक वाहनों की तरह ही काम करती हैं। लेकिन इनका सबसे बड़ा फायदा यह है कि इनमें किसी बड़ी बैटरी को प्लग लगाकर चार्ज करने का कोई झंझट नहीं होता। दरअसल, यह कार बिजली खुद ही पैदा करती है। इसकी कार्यप्रणाली बेहद सरल है। इसमें लगे फ्यूल सेल के अंदर हाइड्रोजन गैस हवा में मौजूद ऑक्सीजन के साथ मिलकर एक रासायनिक प्रक्रिया करती है। इस प्रक्रिया से जो बिजली उत्पन्न होती है, वह सीधे कार की इलेक्ट्रिक मोटर को पावर देती है। इससे कार सड़कों पर दौड़ने के लिए तैयार हो जाती है।

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साइलेंसर से पानी क्यों निकलता है?

पेट्रोल या डीजल कारों की तरह, हाइड्रोजन कारों के इंजन में ईंधन को जलाया नहीं जाता। इसलिए, इनमें से कार्बन डाइऑक्साइड, काला धुआं या प्रदूषण फैलाने वाली कोई भी गैस नहीं निकलती। फ्यूल सेल के अंदर होने वाले रिएक्शन से सिर्फ पानी और गर्मी पैदा होती है। यही वजह है कि इन कारों के साइलेंसर से सिर्फ पानी की बूंदें टपकती हैं और यह पानी पीने लायक शुद्ध होता है।


क्या ये कारें सड़कों पर आ चुकी हैं?

यह तकनीक अब केवल कल्पना नहीं रही, बल्कि हकीकत बन चुकी है। दुनिया की कई दिग्गज ऑटोमोबाइल कंपनियां इस पर काम कर रही हैं और कुछ बेहतरीन मॉडल्स बाजार में उतारे भी जा चुके हैं। इसका सबसे लोकप्रिय उदाहरण टोयोटा मिराई है, जो दुनिया के कई देशों की सड़कों पर दौड़ रही है। दिलचस्प बात यह है कि भारत में भी इस तकनीक की चर्चा तब तेज हुई जब केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने इसे अपनी निजी गाड़ी के तौर पर अपनाया। इसके अलावा, ह्यूंदै की नेक्सो भी हाइड्रोजन से चलने वाली दुनिया की एक और बेहद सफल और मशहूर कार है।


फिर ये कारें अभी तक आम क्यों नहीं हुई हैं?

हालांकि हाइड्रोजन कारें तकनीक के लिहाज से काफी उन्नत हैं, लेकिन इन्हें सड़कों पर आम होने में अभी कुछ समय लगेगा। इसके पीछे सबसे बड़ी चुनौती बुनियादी ढांचे की कमी है। पेट्रोल पंपों की तरह भारत समेत दुनिया के ज्यादातर देशों में हाइड्रोजन रिफिलिंग स्टेशन अभी न के बराबर हैं। इसके अलावा, इन कारों की निर्माण लागत पेट्रोल, डीजल या पारंपरिक इलेक्ट्रिक कारों की तुलना में काफी ज्यादा होती है।

इससे ये आम ग्राहकों के लिए महंगी साबित होती हैं। साथ ही, हाइड्रोजन एक अत्यधिक ज्वलनशील गैस है। इसके कारण इसे सुरक्षित रूप से स्टोर करना और एक जगह से दूसरी जगह ट्रांसपोर्ट करना तकनीकी रूप से काफी कठिन और खर्चीला काम है।

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