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How Airbags Work: हादसे के वक्त पलक झपकते ही कैसे खुल जाता है कार का एयरबैग? जानिए इसके काम करने का पूरा तरीका

ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Jagriti Updated Wed, 24 Jun 2026 06:00 PM IST
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सार

Car Safety Features: हम अक्सर सुनते हैं कि कार में सुरक्षा के लिए चार एयरबैग दिया गया है और एक्सीडेंट होते ही कार का एयरबैग कुछ मिलीसेकंड में खुल जाता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि यह कैसे खुलता है? क्या अंदर साधारण हवा भरी होती है या कोई खास तकनीक काम करती है? आइए जानते हैं इसके बारे में विस्तार से...
 

What’s Inside Car Airbag? Know Science Behind Technology
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : एआई जनरेटेड
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विस्तार

Car Airbag Technology: आज की आधुनिक कारों में एयरबैग सबसे महत्वपूर्ण सुरक्षा फीचर्स में से एक बन चुका है। सड़क दुर्घटना के दौरान यह ड्राइवर और यात्रियों को गंभीर चोटों से बचाने का काम करता है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि टक्कर लगते ही एयरबैग इतनी तेजी से कैसे खुल जाता है? दिलचस्प बात यह है कि इसके अंदर सामान्य हवा नहीं होती, बल्कि एक खास तकनीक और रासायनिक प्रक्रिया काम करती है जो कुछ ही मिलीसेकंड में एयरबैग को फुला देती है।


पलक झपकने से भी तेज खुलता है एयरबैग
किसी भी एयरबैग को दुर्घटना के समय लगभग 10 से 30 मिलीसेकंड के भीतर खुलना पड़ता है। यह समय इंसान की एक पलक झपकने से भी कम होता है। अगर एयरबैग इस गति से न खुले तो वह यात्रियों को पर्याप्त सुरक्षा नहीं दे पाएगा। यही वजह है कि कार निर्माता एयरबैग सिस्टम को बेहद तेज और सटीक तरीके से डिजाइन करते हैं।
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एयरबैग के अंदर हवा नहीं, खास गैस होती है
  • नाम भले ही एयरबैग हो, लेकिन आपको बता दें कि इसके अंदर सामान्य हवा नहीं भरी होती। आधुनिक कारों में एयरबैग को फुलाने के लिए गुआनिडिनियम नाइट्रेट (Guanidinium Nitrate) और कॉपर नाइट्रेट जैसे रासायनिक पदार्थों का इस्तेमाल किया जाता है। जैसे ही कार में गंभीर टक्कर होती है, इन रसायनों के भीतर एक नियंत्रित रासायनिक प्रतिक्रिया होती है।
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  • इस प्रक्रिया से बेहद तेजी से नाइट्रोजन गैस बनती है, जो एयरबैग को फुलाकर यात्रियों और कार के इंटीरियर के बीच एक सुरक्षा कुशन तैयार कर देती है।

पुरानी तकनीक क्यों मानी गई खतरनाक?
  • पहले कई एयरबैग सिस्टम में अमोनियम नाइट्रेट का इस्तेमाल किया जाता था। हालांकि समय के साथ यह पाया गया कि यह पदार्थ नमी के संपर्क में आने पर अस्थिर हो सकता है और कुछ मामलों में जरूरत से ज्यादा दबाव पैदा कर सकता है।
  • इसी वजह से आधुनिक एयरबैग सिस्टम में अधिक सुरक्षित और स्थिर रसायनों का उपयोग किया जाने लगा। नई तकनीक नमी से प्रभावित नहीं होती और लंबे समय तक सुरक्षित रहती है।

एयरबैग खुलने पर धुआं जैसा क्यों दिखता है?
  • अगर आपने कभी गौर किया हो, या किसी वीडियो में देखा हो, एयरबैग खुलने के बाद सफेद धुएं जैसा कुछ दिखाई देता है। असल में एयरबैग नायलॉन के कपड़े से बना होता है।
  • कपड़ा आपस में चिपके नहीं, इसके लिए उस पर टैल्कम पाउडर लगाया जाता है। जब एयरबैग तेजी से खुलता है तो यही पाउडर हवा में फैल जाता है और धुएं जैसा दिखाई देता है।
  • यह सामान्य प्रक्रिया है और किसी आग या विस्फोट का संकेत नहीं होती।

सीट बेल्ट पहनने पर अलग तरह से काम करता है सिस्टम
  • आधुनिक कारों के फ्रंट एयरबैग केवल टक्कर को ही नहीं देखते, बल्कि यह भी समझते हैं कि ड्राइवर या यात्री ने सीट बेल्ट पहनी है या नहीं।
  • कार में लगे MEMS सेंसर वाहन की गति में अचानक आई कमी और टक्कर की तीव्रता को मापते हैं। अगर सीट बेल्ट लगी हुई है, तो सिस्टम आमतौर पर तब एयरबैग खोलता है जब टक्कर की गति लगभग 25 किमी/घंटा या उससे अधिक हो।
  • लेकिन अगर सीट बेल्ट नहीं लगी हो, तो खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में एयरबैग 16 से 19 किमी प्रति घंटा जैसी कम गति वाली टक्कर में भी खुल सकता है। कुछ परिस्थितियों में यह 13 किमी प्रति की स्पीड पर भी सक्रिय हो सकता है।

साइड एयरबैग अलग तकनीक से काम करते हैं
  • कार के आगे और पीछे की तरफ इंजन और डिक्की जैसे हिस्से टक्कर की ऊर्जा को कुछ हद तक सोख लेते हैं। इन्हें क्रंपल जोन कहा जाता है।
  • लेकिन साइड से टक्कर होने पर ऐसी सुरक्षा जगह लगभग नहीं होती। इसलिए कार के दरवाजों में एक अलग प्रेशर सेंसर लगाए जाते हैं।
  • जैसे ही किसी वाहन की साइड पर जोरदार टक्कर होती है और दरवाजे अंदर की तरफ दबते हैं, सेंसर तुरंत दबाव में बदलाव को पहचान लेते हैं और लगभग 20 मिलीसेकंड के भीतर साइड कर्टेन एयरबैग खोल देते हैं।

गाड़ी पलटने पर भी सक्रिय हो जाते हैं एयरबैग
  • आधुनिक वाहनों में रोलओवर सेंसर भी लगाए जाते हैं, जो वाहन के झुकाव और संतुलन की निगरानी करते हैं। अगर सिस्टम को लगता है कि वाहन पलट सकता है, तो साइड एयरबैग और कर्टेन एयरबैग तुरंत खुल जाते हैं।
  • खास बात यह है कि ये एयरबैग सामान्य एयरबैग्स की तुलना में अधिक समय तक फूले रहते हैं ताकि यात्रियों के सिर और गर्दन को अतिरिक्त सुरक्षा मिल सके।

एयरबैग तभी प्रभावी हैं जब सीट बेल्ट भी लगी हो
  • एक्सपर्ट्स  के अनुसार एयरबैग को कभी भी सीट बेल्ट का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। दोनों सिस्टम एक-दूसरे के पूरक हैं।
  • सीट बेल्ट शरीर को नियंत्रित रखती है और एयरबैग टक्कर के प्रभाव को कम करता है। अगर सीट बेल्ट न लगी हो तो एयरबैग से चोट लगने का जोखिम भी बढ़ सकता है।
  • कार का एयरबैग केवल एक फुलने वाला बैग नहीं, बल्कि सेंसर, कंप्यूटर और रासायनिक तकनीक का बेहद उन्नत सुरक्षा सिस्टम है।
  • टक्कर के कुछ मिलीसेकंड के भीतर सक्रिय होकर यह यात्रियों और कार के कठोर हिस्सों के बीच सुरक्षा कवच तैयार करता है।
  • यही वजह है कि आधुनिक वाहन सुरक्षा में एयरबैग और सीट बेल्ट दोनों को जीवन रक्षक तकनीक माना जाता है।
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