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NH Projects: क्यों नहीं बन पा रहे देश के 85 बड़े नेशनल हाइवे? जमीन से लेकर कानून तक, नितिन गडकरी ने बताई वजह
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Jagriti
Updated Thu, 19 Mar 2026 10:54 AM IST
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सार
85 National Highway Projects Delayed by Over 3 Years: देशभर में 85 राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाएं तीन साल से ज्यादा देरी का सामना कर रही हैं, जिससे लागत बढ़ रही है और कनेक्टिविटी प्रभावित हो रही है। सरकार ने अब इस समस्या को सुलझाने के लिए डिजिटल पोर्टल, तेज मंजूरी सिस्टम और मॉनिटरिंग मैकेनिज्म जैसे कई बड़े सुधार लागू किए हैं, जिससे आगे ये प्रोजेक्ट्स समय पर पूरा हाे सकें। जानिए इसके बारे में विस्तार से...
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : freepik
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विस्तार
देश में सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की कोशिशों के बीच एक बड़ी चुनौती सामने आई है, कई हाईवे प्रोजेक्ट समय पर पूरे नहीं हो पा रहे हैं। ये जानकारी सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने संसद में दी। उन्होंने कहा कि 85 नेशनल हाइवे प्रोजेक्ट अभी तीन साल की देरी से चल रहे हैं। जिसके मुख्य कुछ प्रमुख वजहें सामने आई हैं। जैसे की:
देरी का असर क्या पड़ता है?
योजनाओं के समय पर पूरा न होने पर:
सरकार ने देरी को कम करने और लागत बढ़ने से रोकने के लिए कई डिजिटल और प्रशासनिक सुधार पर काम कर रही है।
डिजिटल पोर्टल का दम
1. भूमि राशि पोर्टल
2. ऑनलाइन अप्रूवल
रेलवे लाइनों के ऊपर या नीचे बनने वाले पुलों के ड्राइंग्स (GAD) के लिए अब ऑनलाइन अप्रूवल सिस्टम शुरू किया गया है, जिससे कागजी कार्रवाई का समय कम हो गया है।
3. नियमित समीक्षा
चल रही परियोजनाओं में आने वाली रुकावटों को तुरंत सुलझाने के लिए एक खास मैकेनिज्म बनाया गया है, जो हर बाधा की बारीकी से जांच और समाधान करता है।
भारत का हाईवे मिशन
भारत सरकार भारतमाला परियोजना जैसे बड़े प्रोग्राम के तहत हजारों किलोमीटर नए हाइवे बना रही है। जिसमें लॉजिस्टिक्स कॉस्ट कम करने का लक्ष्य है और एक्सप्रेसवे नेटवर्क तेजी से बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। लेकिन इन देरी से यह साफ है कि सिर्फ बजट नहीं, ग्राउंड एक्सीक्यूशन सबसे बड़ी चुनौती है।
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- भूमि और कानून: भूमि अधिग्रहण में आने वाली बाधाएं और कई क्षेत्रों में कानून-व्यवस्था यानी लॉ एंड ऑर्डर की समस्याएं काम में देरी का सबसे बड़ा कारण हैं।
- मंजूरियों का इंतजार: वैधानिक मंजूरियां, वन विभाग की अनुमतियां और उपयोगिता स्थानांतरण जैसे बिजली के खंभे या पाइपलाइन हटाना समय ले रहा है।
- ठेकेदारों की हालत: कई मामलों में ठेकेदारों की खराब वित्तीय स्थिति और उनके लचर प्रदर्शन ने प्रोजेक्ट्स को अधर में लटका दिया है।
- अतिक्रमण हटाना: हाईवे के रास्ते में आने वाले अवैध निर्माणों और अतिक्रमण को हटाना भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
- अनपेक्षित घटनाएं: कोविड-19 महामारी जैसी फोर्स मेज्योर घटनाएं और कानूनों में हुए बदलावों ने भी प्रोजेक्ट्स की लागत और समय दोनों बढ़ा दिए हैं।
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देरी का असर क्या पड़ता है?
योजनाओं के समय पर पूरा न होने पर:
- प्रोजेक्ट की लागत कई गुना बढ़ जाती है।
- जनता को मिलने वाली सुविधाएं देर से मिलती हैं।
- लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्ट महंगा होता है।
- आर्थिक गतिविधियों पर असर पड़ता है।
सरकार ने देरी को कम करने और लागत बढ़ने से रोकने के लिए कई डिजिटल और प्रशासनिक सुधार पर काम कर रही है।
डिजिटल पोर्टल का दम
1. भूमि राशि पोर्टल
- सरकार इस पोर्टल के जरिए भूमि अधिग्रहण और मुआवजे की प्रक्रिया को तेज कर रही है। यह अब PFMS (पब्लिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम) और GIS (ज्योग्राफिक इंफॉर्मेशन सिस्टम) सिस्टम से जुड़ा है, जिससे पारदर्शिता बढ़ी है।
- परिवेश: वन और पर्यावरण संबंधी मंजूरियों को आसान बनाने के लिए इस पोर्टल को अपडेट किया गया है, जिससे फाइलें वर्षों तक न अटकी रहें।
2. ऑनलाइन अप्रूवल
रेलवे लाइनों के ऊपर या नीचे बनने वाले पुलों के ड्राइंग्स (GAD) के लिए अब ऑनलाइन अप्रूवल सिस्टम शुरू किया गया है, जिससे कागजी कार्रवाई का समय कम हो गया है।
3. नियमित समीक्षा
चल रही परियोजनाओं में आने वाली रुकावटों को तुरंत सुलझाने के लिए एक खास मैकेनिज्म बनाया गया है, जो हर बाधा की बारीकी से जांच और समाधान करता है।
भारत का हाईवे मिशन
भारत सरकार भारतमाला परियोजना जैसे बड़े प्रोग्राम के तहत हजारों किलोमीटर नए हाइवे बना रही है। जिसमें लॉजिस्टिक्स कॉस्ट कम करने का लक्ष्य है और एक्सप्रेसवे नेटवर्क तेजी से बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। लेकिन इन देरी से यह साफ है कि सिर्फ बजट नहीं, ग्राउंड एक्सीक्यूशन सबसे बड़ी चुनौती है।