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December Car Scheme: साल के आखिरी महीने में कार कंपनियां क्यों देती हैं बंपर छूट, जानें किसे होता है फायदा
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: समीर गोयल
Updated Wed, 07 Dec 2022 01:08 PM IST
सार
साल के आखिरी महीने में वाहन निर्माताओं की ओर से ग्राहकों को बंपर छूट ऑफर की जाती हैं। जानें कि इन स्कीम्स से ग्राहक या कंपनी किसका फायदा होता है।
हर साल दिसंबर महीने की शुरूआत होते ही वाहन निर्माताओं की ओर से अलग-अलग तरह की स्कीम्स की घोषणा की जाती है। इन स्कीम्स के जरिए वह ग्राहकों को रिझाने की कोशिश करती हैं। आखिर किस तरह से इन स्कीम्स के जरिए ग्राहकों को फायदा होता है और कैसे इस तरह की छूट कंपनियों को भी फायदा देती है, आइए जानते हैं।
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दिसंबर महीने में मिलती है बंपर छूट
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टाटा की कारें
- फोटो : सोशल मीडिया
दिसंबर साल का आखिरी महीना होता है। इसलिए लगभग सभी वाहन निर्माताओं की ओर से कंपनी की कारों, बाइक्स और स्कूटर पर छूट की घोषणा की जाती है। इस छूट में एक्सचेंज ऑफर्स, कॉर्पोरेट डिस्काउंट, रूरल डिस्काउंट, कैश डिस्काउंट, मेंटिनेंस पैकेज और एक्सेसरीज पर छूट, क्रेडिट कार्ड्स पर अतिरिक्त लाभ, लो इंटरेस्ट रेट्स जैसे ऑफर दिए जाते हैं।
कंपनियों की ओर से साल के आखिरी महीने में मिलने वाले ऐसे डिस्काउंट्स पर ग्राहक भी आकर्षित होते हैं। कुछ मामलों में ग्राहकों को भी ऐसी छूट का फायदा होता है। दरअसल, भारत में बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं जो कार या बाइक को कुछ समय के लिए नहीं बल्कि सात से दस साल जैसी लंबी अवधि के लिए खरीदते हैं। इन ग्राहकों को दिसंबर महीने में मिलने वाले ऑफर्स का सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि वाहन की कीमत में कई तरह की छूट मिल जाती हैं। जिससे काफी कम कीमत, आसानी से मिलने वाले लोन ऑफर्स के साथ कम पैसे देकर वाहन मिल जाता है।
दिसंबर महीने में मिलने वाली बंपर छूट का सबसे ज्यादा फायदा ग्राहकों को नहीं बल्कि वाहन निर्माताओं को होता है। भारत में नवरात्रि से शुरू होने वाले फेस्टिव सीजन से ही वाहनों की बिक्री होने लगती है। जो दिवाली तक जारी रहती है। ऐसे में कंपनियां बड़ी संख्या में स्टॉक तैयार कर लेती हैं। साल के आखिरी महीनों में नवरात्रि और दिवाली आने के कारण कंपनियों के पास तैयार हुए स्टॉक को खत्म करने के लिए काफी कम समय रह जाता है। अगर यह स्टॉक नए साल तक खत्म ना हो तो फिर उन्हें अपडेट करने में कंपनियों को समय, मेहनत और पैसा ज्यादा खर्च करना पड़ता है। जो कंपनियों के लिए फायदे का सौदा नहीं होता। इसलिए कंपनियों की कोशिश होती है कि जो भी स्टॉक बच गया है उसे दिसंबर महीने में ऑफर देकर खत्म कर दिया जाए।
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