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कार मालिकों के लिए अलर्ट: मीटर पीछे करने से लेकर गाड़ी चोरी तक, जानें कैसे हो रही है लोगों से लाखों की ठगी
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Jagriti
Updated Tue, 17 Mar 2026 06:10 PM IST
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सार
GPS Tracker Car Theft Scam: क्या आप भी पुरानी कार खरीदने की सोच रहे हैं या अपनी कार मैकेनिक के पास छोड़ते हैं? तो सावधान हो जाइए। ओडोमीटर टेंपरिंग से लेकर जीपीएस ट्रैकिंग के जरिए कार चोरी तक, जालसाजों ने ठगी के ऐसे रास्ते निकाल लिए हैं कि आपकी आंखों के सामने स्कैम हो जाएगा और आपको पता भी नहीं चलेगा। जानिए इन शातिर तरीकों को और खुद को सुरक्षित रखने के अचूक उपाय।
old car borrow new
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
आजकल कार खरीदना और बेचना जितना डिजिटल और आसान हुआ है, जालसाजों के हौसले उतने ही बुलंद हो गए हैं। खासकर सेकंड-हैंड मार्केट और ऑनलाइन क्लासिफाइड पोर्टल्स पर ठगों की सक्रियता बढ़ गई है। ये लोग साइकोलॉजी का इस्तेमाल करके आपको जल्दबाजी में फैसला लेने पर मजबूर करते हैं।
ये हैं वो बड़े स्कैम जिनसे आपको बचना है:
1. ओडोमीटर बैक स्कैम
यह सबसे पुराना और आम स्कैम है। ठग डिजिटल मीटर के साथ छेड़छाड़ कर एक लाख किमी चली कार को मात्र 30-40 हजार किमी दिखा देते हैं। इससे पुरानी और घिसी हुई गाड़ी की कीमत लाखों में बढ़ जाती है। इसके लिए हमेशा गाड़ी की सर्विस हिस्ट्री चेक करें। अगर कार 3 साल पुरानी है और टायर पूरी तरह घिसे हुए हैं लेकिन मीटर में रीडिंग कम है, तो समझ लीजिए दाल में कुछ काला है।
2. फ्लड डैमेज या एक्सीडेंटल कार का मेकओवर
बाढ़ में डूबी या बड़े हादसे का शिकार हुई गाड़ियों को बाहर से चमका कर मिंट कंडीशन बताकर बेचा जाता है। ऐसी गाड़ियों के इंजन और इलेक्ट्रिकल सिस्टम में अंदर जंग (Corrosion) होती है जो कुछ महीनों बाद सामने आती है।
3. जीपीएस ट्रैकर और कार चोरी का नया तरीका
यह सबसे डरावना स्कैम है। कुछ शातिर डीलर या प्राइवेट सेलर गाड़ी बेचने से पहले उसमें एक गुप्त जीपीएस ट्रैकर लगा देते हैं। गाड़ी बेचने के कुछ दिनों बाद, वे डुप्लीकेट चाबी की मदद से लोकेशन ट्रैक करते हैं और आपकी गाड़ी रात के अंधेरे में गायब कर देते हैं।
4. कागजों की बाजीगरी
चोरी की गाड़ियों के इंजन और चेसिस नंबर (VIN) बदलकर उन्हें क्लीन डॉक्यूमेंट्स के साथ बेचा जाता है। कई बार टोटल लॉस घोषित गाड़ियों की आरसी पर दूसरी गाड़ी चला दी जाती है। बाद में पुलिस चेकिंग या इंश्योरेंस क्लेम के समय असली मालिक फंस जाता है।
5. बेट एंड स्विच तकनीक
ऑनलाइन बहुत कम दाम में शानदार कार का विज्ञापन दिया जाता है। जब आप वहां पहुंचते हैं, तो कहा जाता है कि वह गाड़ी बिक गई और फिर आपको महंगी या खराब गाड़ी लेने के लिए मजबूर किया जाता है।
बचने के लिए ये तरीके अपनाए
ऑटो एक्सपर्ट्स के अनुसार अगर आप इन स्कैम्स से बचना चाहते हैं, तो ये तरीके अपनाएं:
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ये हैं वो बड़े स्कैम जिनसे आपको बचना है:
1. ओडोमीटर बैक स्कैम
यह सबसे पुराना और आम स्कैम है। ठग डिजिटल मीटर के साथ छेड़छाड़ कर एक लाख किमी चली कार को मात्र 30-40 हजार किमी दिखा देते हैं। इससे पुरानी और घिसी हुई गाड़ी की कीमत लाखों में बढ़ जाती है। इसके लिए हमेशा गाड़ी की सर्विस हिस्ट्री चेक करें। अगर कार 3 साल पुरानी है और टायर पूरी तरह घिसे हुए हैं लेकिन मीटर में रीडिंग कम है, तो समझ लीजिए दाल में कुछ काला है।
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2. फ्लड डैमेज या एक्सीडेंटल कार का मेकओवर
बाढ़ में डूबी या बड़े हादसे का शिकार हुई गाड़ियों को बाहर से चमका कर मिंट कंडीशन बताकर बेचा जाता है। ऐसी गाड़ियों के इंजन और इलेक्ट्रिकल सिस्टम में अंदर जंग (Corrosion) होती है जो कुछ महीनों बाद सामने आती है।
3. जीपीएस ट्रैकर और कार चोरी का नया तरीका
यह सबसे डरावना स्कैम है। कुछ शातिर डीलर या प्राइवेट सेलर गाड़ी बेचने से पहले उसमें एक गुप्त जीपीएस ट्रैकर लगा देते हैं। गाड़ी बेचने के कुछ दिनों बाद, वे डुप्लीकेट चाबी की मदद से लोकेशन ट्रैक करते हैं और आपकी गाड़ी रात के अंधेरे में गायब कर देते हैं।
4. कागजों की बाजीगरी
चोरी की गाड़ियों के इंजन और चेसिस नंबर (VIN) बदलकर उन्हें क्लीन डॉक्यूमेंट्स के साथ बेचा जाता है। कई बार टोटल लॉस घोषित गाड़ियों की आरसी पर दूसरी गाड़ी चला दी जाती है। बाद में पुलिस चेकिंग या इंश्योरेंस क्लेम के समय असली मालिक फंस जाता है।
5. बेट एंड स्विच तकनीक
ऑनलाइन बहुत कम दाम में शानदार कार का विज्ञापन दिया जाता है। जब आप वहां पहुंचते हैं, तो कहा जाता है कि वह गाड़ी बिक गई और फिर आपको महंगी या खराब गाड़ी लेने के लिए मजबूर किया जाता है।
बचने के लिए ये तरीके अपनाए
ऑटो एक्सपर्ट्स के अनुसार अगर आप इन स्कैम्स से बचना चाहते हैं, तो ये तरीके अपनाएं:
- मैकेनिक की राय है जरूरी: गाड़ी फाइनल करने से पहले अपने भरोसेमंद मैकेनिक को साथ ले जाएं। वह पेंट की गहराई (Repaint check) और इंजन की आवाज से असलियत पकड़ लेगा।
- दस्तावेजों का डिजिटल वेरिफिकेशन: सिर्फ हार्ड कॉपी पर भरोसा न करें। एम परिवहन एप या वाहन पोर्टल पर गाड़ी का नंबर डालकर मालिक का नाम, चालान और इंश्योरेंस की वैधता खुद चेक करें।
- टेस्ट ड्राइव और इंस्पेक्शन: गाड़ी को कम से कम 5-10 किमी चलाकर देखें। ब्रेक, सस्पेंशन और एसी की आवाज पर ध्यान दें।
- पेमेंट में जल्दबाजी न करें: कभी भी टोकन अमाउंट या पूरा पैसा तब तक न दें जब तक कि एनओसी (NOC) और ट्रांसफर के कागजात आपके हाथ में न आ जाएं।