आरक्षण पर संग्राम: चिराग पासवान ने मांझी और उनके बेटे का क्यों मांगा इस्तीफा, क्या एनडीए गठबंधन में सब ठीक है?
Reservation: आरक्षण की समीक्षा पर बवाल थामे नहीं थम रहा है। केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के अपने साथी मंत्री जीतन राम मांझी और उनके बेटे से सीधे तौर पर इस्तीफे की मांग की है। पढ़ें पूरी खबर
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बिहार में आरक्षण को लेकर जारी विवाद के बीच चिराग पासवान ने बड़ा बयान दिया है। चिराग पासवान ने केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी और उनके पुत्र संतोष कुमार सुमन से इस्तीफे की मांग की है।
चिराग पासवान ने कहा कि जब संविधान में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के आरक्षण का आधार आर्थिक नहीं, बल्कि सामाजिक है, तो फिर ये लोग ऐसी बात क्यों कर रहे हैं? उन्होंने कहा, "अगर यही करना है तो संसद में हिम्मत है तो दोनों पिता-पुत्र, जो मंत्री हैं एक केंद्र में और एक बिहार में पहले इस्तीफा देकर आएं और उसके बाद चर्चा की बात करें।
उन्होंने कहा कि संविधान में आर्थिक आधार पर आरक्षण की कोई व्यवस्था नहीं है। उन्होंने कहा कि आज भी समाज में छुआछूत कितनी है, यह सभी जानते हैं। कांग्रेस के बड़े नेता भी इस मुद्दे पर बयान दे चुके हैं। आज भी समाज में क्या स्थिति है? यह सबको पता है।
संविधान में अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षण केवल अवसर का प्रावधान नहीं, बल्कि सदियों से चले आ रहे सामाजिक भेदभाव, छुआछूत और असमानता के विरुद्ध सामाजिक न्याय का सुरक्षा कवच है।
ऐसे में SC/ST आरक्षण में ‘क्रीमी लेयर’ या उप-वर्गीकरण (Sub-classification) की… pic.twitter.com/TixE8YE6VY — Office Of Chirag Paswan (@officeofchirag) August 29, 2026
'आरक्षण केवल सामाजिक आधार पर ही रहना चाहिए'
चिराग पासवान ने कहा कि अगर आज हम लोग आरक्षण के मुद्दे पर पीछे हट गए तो हमें कोई पूछने वाला नहीं होगा। इसलिए अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षण केवल सामाजिक आधार पर ही रहना चाहिए। उन्होंने कहा, "मैं इसकी बात हमेशा करता हूं और हमेशा करता रहूंगा।"
चिराग ने आरक्षण को बताया सामाजिक न्याय का सुरक्षा कवच
चिराग पासवान ने एक्स पोस्ट पर लिखा है कि संविधान में अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षण केवल अवसर का प्रावधान नहीं, बल्कि सदियों से चले आ रहे सामाजिक भेदभाव, छुआछूत और असमानता के विरुद्ध सामाजिक न्याय का सुरक्षा कवच है।
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ऐसे में एससी/एसटी आरक्षण में ‘क्रीमी लेयर’ या उप-वर्गीकरण की मांग सामाजिक न्याय के मूल उद्देश्य को कमजोर करने वाली है। जो लोग इसका समर्थन करते हैं, उन्हें पहले स्वयं आरक्षण का लाभ छोड़कर एक नैतिक उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए। जब तक समाज में भेदभाव और असमानता कायम है, तब तक वंचित एवं शोषित वर्गों के अधिकार, सम्मान और स्वाभिमान की रक्षा की हमारी लड़ाई पूरी मजबूती से जारी रहेगी :