Bihar News: मुंबई में बुझी मजदूर की जिंदगी, गांव में मचा कोहराम; तीन बच्चों के सिर से उठा पिता का साया
समस्तीपुर के विभूतिपुर थाना क्षेत्र के आलमपुर कोदरिया गांव निवासी मजदूर रवि शंकर गिरी की मुंबई में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। परिवार के भरण-पोषण के लिए करीब दो महीने पहले मुंबई गए रवि शंकर निर्माण स्थल पर शटरिंग का काम करते थे।
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समस्तीपुर के विभूतिपुर थाना क्षेत्र के आलमपुर कोदरिया गांव निवासी मजदूर रवि शंकर गिरी की मुंबई में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। परिवार के भरण-पोषण के लिए करीब दो महीने पहले मुंबई गए रवि शंकर वहां निर्माण स्थल पर मकान की शटरिंग का काम करते थे। बुधवार को उनकी अचानक मौत की खबर गांव पहुंची तो परिवार में कोहराम मच गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। परिवार ने शव को मुंबई से पैतृक गांव लाने के लिए प्रशासन और सरकार से आर्थिक मदद की गुहार लगाई है।
परिवार के भरण-पोषण के लिए मुंबई गए थे रवि शंकर
रवि शंकर विभूतिपुर थाना क्षेत्र के आलमपुर कोदरिया गांव के वार्ड संख्या सात निवासी नन्हकू गिरी के पुत्र थे। परिजनों के मुताबिक, परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। ऐसे में वह करीब दो महीने पहले गांव के कुछ लोगों के साथ मजदूरी करने मुंबई गए थे। वहां निर्माण स्थलों पर मकान की शटरिंग का काम कर परिवार का खर्च चलाते थे। इसी दौरान परिजनों को फोन पर उनकी अचानक और संदिग्ध परिस्थितियों में मौत की सूचना मिली। मौत की खबर मिलते ही गांव में मातम पसर गया। परिवार के लोग मौत की वजह को लेकर परेशान हैं और पूरी जानकारी मिलने का इंतजार कर रहे हैं।
रवि शंकर की कमाई से चलता था घर
रवि शंकर परिवार के मुख्य कमाऊ सदस्य थे। उनकी कमाई से ही घर का खर्च और बच्चों की जरूरतें पूरी होती थीं। अचानक उनकी मौत से परिवार के सामने बड़ा आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। पत्नी निर्मला देवी और मां आरती देवी का रो-रोकर बुरा हाल है। परिजनों के विलाप से गांव का माहौल गमगीन है।रवि शंकर अपने पीछे दो पुत्र महेश कुमार गिरी और अभिचंद गिरी तथा एक पुत्री निधि कुमारी को छोड़ गए हैं। पिता की मौत के बाद तीनों बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया है। परिवार को अब बच्चों की पढ़ाई, परवरिश और भविष्य की चिंता सता रही है। मृतक के भाई शिव शंकर गिरी, राम शंकर गिरी, जयशंकर गिरी और मनीष गिरी समेत अन्य परिजनों का भी रो-रोकर बुरा हाल है।
मौत की परिस्थितियों को लेकर परिवार में चिंता
परिजनों को रवि शंकर की मौत की सूचना फोन के जरिए मिली। परिवार ने उनकी मौत को संदिग्ध परिस्थितियों में बताया है। हालांकि, अभी तक मौत के वास्तविक कारणों का स्पष्ट पता नहीं चल सका है। परिजन मुंबई से पूरी जानकारी मिलने का इंतजार कर रहे हैं। मुंबई में आवश्यक कानूनी और अन्य प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही रवि शंकर का पार्थिव शरीर गांव लाने की तैयारी की जाएगी। परिवार चाहता है कि सभी जरूरी प्रक्रियाएं जल्द पूरी हों, ताकि अंतिम संस्कार पैतृक गांव में किया जा सके।
शव गांव लाने के लिए श्रम अधीक्षक से मांगी मदद
मृतक के पिता नन्हकू गिरी ने समस्तीपुर के श्रम अधीक्षक को आवेदन देकर बेटे का पार्थिव शरीर मुंबई से पैतृक गांव लाने के लिए सरकारी सहयोग की मांग की है। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण मुंबई से शव गांव लाना उनके लिए बड़ी चुनौती है। परिजन पटना से हवाई मार्ग से मुंबई के लिए रवाना हो चुके हैं। उनका प्रयास है कि वहां जरूरी प्रक्रिया पूरी होने के बाद रवि शंकर का पार्थिव शरीर जल्द से जल्द गांव लाया जाए और पैतृक गांव में अंतिम संस्कार किया जा सके।
ग्रामीणों ने सरकार से आर्थिक सहायता और मुआवजे की मांग की
रवि शंकर की मौत की खबर फैलने के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण उनके घर पहुंचे और शोकाकुल परिवार को ढांढस बंधाया। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और राज्य सरकार से परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए तत्काल सहायता और उचित मुआवजा देने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि रवि शंकर परिवार के प्रमुख कमाऊ सदस्य थे। उनकी मौत से परिवार की आर्थिक रीढ़ टूट गई है। ऐसे में सरकार और प्रशासन को संवेदनशीलता दिखाते हुए परिवार की मदद करनी चाहिए। खासकर बच्चों की पढ़ाई, परवरिश और परिवार के भरण-पोषण के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना जरूरी है। फिलहाल परिवार की सबसे बड़ी चिंता रवि शंकर का पार्थिव शरीर सम्मानपूर्वक गांव लाना और अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी करना है। परिजनों और ग्रामीणों को अब प्रशासन और सरकार से मदद की उम्मीद है।