Bihar News: गया में निकली भव्य जगन्नाथ रथयात्रा, हरिनाम संकीर्तन और जयघोष से गूंजा पूरा शहर
गया में इस्कॉन की ओर से भगवान जगन्नाथ, बलदेव, सुभद्रा और सुदर्शन की भव्य रथयात्रा निकाली गई, जिसमें हजारों श्रद्धालु शामिल हुए। बिहार विधानसभा अध्यक्ष ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच रथयात्रा का शुभारंभ किया।
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गयाजी में रविवार को भक्ति और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। इस्कॉन गया की ओर से भगवान जगन्नाथ, बलदेव, सुभद्रा और सुदर्शन की भव्य रथयात्रा निकाली गई, जिसमें हजारों श्रद्धालु शामिल हुए। शहर की प्रमुख सड़कों से गुजरती इस यात्रा के दौरान हरिनाम संकीर्तन, पुष्पवर्षा और जय जगन्नाथ के जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। रथयात्रा का शुभारंभ बिहार विधानसभा अध्यक्ष ने किया।
वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हुआ शुभारंभ
इस्कॉन गया परिसर से रथयात्रा की शुरुआत वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हुई। बिहार विधानसभा अध्यक्ष ने रथ को खींचकर यात्रा का शुभारंभ किया। इस अवसर पर अनुप केड़िया, कौशलेंद्र प्रताप और डॉ. रंजीत प्रकाश भी मौजूद रहे। रंग-बिरंगे फूलों और आकर्षक विद्युत सज्जा से सजे रथ पर भगवान जगन्नाथ, बलदेव, सुभद्रा और सुदर्शन को विधिवत विराजमान कराया गया। इसके बाद भगवान को छप्पन भोग अर्पित कर भव्य आरती की गई।
शहर की सड़कों पर उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब
रथयात्रा इस्कॉन मंदिर से निकलकर जयप्रकाश झरना, काशीनाथ मोड़, सिविल लाइंस, जीबी रोड, गोल पत्थर, टेकारी रोड, बाटा मोड़, स्वराजपुरी रोड, महारानी बस स्टैंड और गेवाल बिगहा होते हुए वापस मंदिर पहुंची। पूरे मार्ग में श्रद्धालुओं ने जगह-जगह पुष्पवर्षा कर भगवान का स्वागत किया। हरिनाम संकीर्तन और जय जगन्नाथ के उद्घोष से पूरा शहर भक्तिरस में डूबा रहा।
रथयात्रा का बताया आध्यात्मिक महत्व
इस्कॉन गया के मंदिर अध्यक्ष ने बताया कि जगन्नाथ रथयात्रा केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि भगवान श्रीकृष्ण की उस दिव्य लीला की स्मृति है, जब राधारानी और वृंदावन की गोपियों ने कुरुक्षेत्र से भगवान श्रीकृष्ण को पुनः वृंदावन लाने की भावना से उनके रथ को खींचा था। उसी परंपरा को आज विश्वभर में श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।
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पांच हजार श्रद्धालुओं ने ग्रहण किया महाप्रसाद
रथयात्रा के मंदिर लौटने के बाद भगवान को पुनः छप्पन भोग अर्पित किया गया और आरती के बाद महाप्रसाद का वितरण हुआ। आयोजन समिति के अनुसार करीब पांच हजार श्रद्धालुओं ने चावल, छोले और हलवे के रूप में महाप्रसाद ग्रहण कर भगवान का आशीर्वाद लिया।
भक्ति और सेवा का बना अनूठा संगम
पूरे आयोजन में बड़ी संख्या में स्वयंसेवकों ने व्यवस्थाएं संभालीं। महिलाओं, युवाओं, बच्चों और बुजुर्गों की उत्साहपूर्ण भागीदारी से रथयात्रा यादगार बन गई। शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित आयोजन ने न सिर्फ धार्मिक आस्था को मजबूत किया, बल्कि सामाजिक समरसता और सामूहिक सहभागिता का संदेश भी दिया।