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Bihar: 7 घंटे की जंग के बाद जीती जिंदगी! 30 फीट गहरे बोरवेल से सुरक्षित निकला आयुष, गांव में गूंजी तालियां
Fri, 17 Jul 2026 09:56 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गया जी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गया जी
Published by: अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 17 Jul 2026 09:56 AM IST
सार
Borewell Rescue News: करीब सात घंटे तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद गया के फतेहपुर में 30 फीट गहरे बोरवेल में गिरा तीन वर्षीय आयुष सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। परिजनों और ग्रामीणों में खुशी की लहर दौड़ गई।
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मासूम आयुष का अस्पताल में इलाज कराते परिजन
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
गया जिले के फतेहपुर प्रखंड के रंगून नगर में गुरुवार को तीन वर्षीय आयुष कुमार खेलते-खेलते 30 फीट गहरे खुले बोरवेल में गिर गया। करीब सात घंटे तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद उसे सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। जैसे ही मासूम को बाहर निकाला गया, पूरे गांव में तालियों की गड़गड़ाहट और खुशी की लहर दौड़ गई। परिजनों की आंखों में राहत के आंसू थे, जबकि प्रशासन और रेस्क्यू टीम की लोगों ने सराहना की।
खेलते-खेलते खुले बोरवेल में गिर गया आयुष
गुरपा थाना क्षेत्र के रंगून नगर गांव निवासी दिनेश मांझी का तीन वर्षीय पुत्र आयुष कुमार घर के पास खेल रहा था। इसी दौरान वह खुले पड़े बोरवेल के पास पहुंच गया और अचानक लगभग 30 फीट गहरे बोरवेल में गिर गया। घटना की सूचना मिलते ही ग्रामीण मौके पर पहुंचे और प्रशासन को जानकारी दी। देखते ही देखते घटनास्थल पर लोगों की भारी भीड़ जुट गई। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था और हर कोई बच्चे की सलामती की दुआ कर रहा था।
युद्धस्तर पर चला सात घंटे का रेस्क्यू ऑपरेशन
सूचना मिलते ही गुरपा थाना पुलिस, स्थानीय प्रशासन और बचाव दल मौके पर पहुंच गया। बाद में एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमों ने भी रेस्क्यू की कमान संभाली। विशेषज्ञों की निगरानी में वैज्ञानिक तरीके से अभियान चलाया गया। रेस्क्यू के दौरान बच्चे तक लगातार पाइप के माध्यम से ऑक्सीजन पहुंचाई जाती रही, ताकि उसे सांस लेने में कोई परेशानी न हो। कई घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद टीम ने आयुष को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
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मासूम के बाहर आते ही गूंज उठीं तालियां
जैसे ही बचाव दल ने बच्चे को सुरक्षित बाहर निकाला, पूरे इलाके में खुशी की लहर दौड़ गई। मौके पर मौजूद लोगों ने तालियां बजाकर रेस्क्यू टीम का उत्साह बढ़ाया। परिजनों ने राहत की सांस ली और कई लोगों की आंखें खुशी से नम हो गईं।
अस्पताल भेजकर शुरू कराया गया इलाज
बोरवेल से बाहर निकालने के तुरंत बाद आयुष को चिकित्सकीय जांच और इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया। डॉक्टरों की निगरानी में उसका स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। प्रशासन ने बताया कि बच्चे को सुरक्षित निकालना सबसे बड़ी प्राथमिकता थी, जिसके लिए सभी एजेंसियों ने समन्वय के साथ काम किया।
यह भी पढ़ें: आज दिल्ली वाले आवास पर गृह प्रवेश करेंगे नीतीश कुमार, कुछ देर में पटना से होंगे रवाना
प्रशासन और ग्रामीणों के सहयोग से सफल हुआ अभियान
जिला प्रशासन, पुलिस, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और स्थानीय ग्रामीणों के संयुक्त प्रयास से यह कठिन रेस्क्यू अभियान सफल रहा। प्रशासन ने अभियान में सहयोग करने वाले सभी लोगों का आभार जताया और लोगों से अपील की कि खुले बोरवेल को तत्काल बंद कराएं, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
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खेलते-खेलते खुले बोरवेल में गिर गया आयुष
गुरपा थाना क्षेत्र के रंगून नगर गांव निवासी दिनेश मांझी का तीन वर्षीय पुत्र आयुष कुमार घर के पास खेल रहा था। इसी दौरान वह खुले पड़े बोरवेल के पास पहुंच गया और अचानक लगभग 30 फीट गहरे बोरवेल में गिर गया। घटना की सूचना मिलते ही ग्रामीण मौके पर पहुंचे और प्रशासन को जानकारी दी। देखते ही देखते घटनास्थल पर लोगों की भारी भीड़ जुट गई। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था और हर कोई बच्चे की सलामती की दुआ कर रहा था।
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युद्धस्तर पर चला सात घंटे का रेस्क्यू ऑपरेशन
सूचना मिलते ही गुरपा थाना पुलिस, स्थानीय प्रशासन और बचाव दल मौके पर पहुंच गया। बाद में एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमों ने भी रेस्क्यू की कमान संभाली। विशेषज्ञों की निगरानी में वैज्ञानिक तरीके से अभियान चलाया गया। रेस्क्यू के दौरान बच्चे तक लगातार पाइप के माध्यम से ऑक्सीजन पहुंचाई जाती रही, ताकि उसे सांस लेने में कोई परेशानी न हो। कई घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद टीम ने आयुष को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
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मासूम के बाहर आते ही गूंज उठीं तालियां
जैसे ही बचाव दल ने बच्चे को सुरक्षित बाहर निकाला, पूरे इलाके में खुशी की लहर दौड़ गई। मौके पर मौजूद लोगों ने तालियां बजाकर रेस्क्यू टीम का उत्साह बढ़ाया। परिजनों ने राहत की सांस ली और कई लोगों की आंखें खुशी से नम हो गईं।
अस्पताल भेजकर शुरू कराया गया इलाज
बोरवेल से बाहर निकालने के तुरंत बाद आयुष को चिकित्सकीय जांच और इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया। डॉक्टरों की निगरानी में उसका स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। प्रशासन ने बताया कि बच्चे को सुरक्षित निकालना सबसे बड़ी प्राथमिकता थी, जिसके लिए सभी एजेंसियों ने समन्वय के साथ काम किया।
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प्रशासन और ग्रामीणों के सहयोग से सफल हुआ अभियान
जिला प्रशासन, पुलिस, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और स्थानीय ग्रामीणों के संयुक्त प्रयास से यह कठिन रेस्क्यू अभियान सफल रहा। प्रशासन ने अभियान में सहयोग करने वाले सभी लोगों का आभार जताया और लोगों से अपील की कि खुले बोरवेल को तत्काल बंद कराएं, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।