Bihar: बाबा धाम की राह में भोले के फरिश्ते! 15 साल से कांवरियों की निशुल्क सेवा, भोजन से इलाज तक हर सुविधा
सुल्तानगंज से बाबा बैद्यनाथ धाम तक की कांवड़ यात्रा में सेवा और मानवता की अनूठी मिसाल पेश करते हुए बांका के इनारावरण स्थित महारानी कांवरिया सेवा संघ पिछले 15 वर्षों से शिवभक्तों की नि:शुल्क सेवा कर रहा है। यहां कांवरियों को भोजन, पेयजल, चाय, ओआरएस, गर्म पानी, विश्राम और प्राथमिक चिकित्सा जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।
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सुल्तानगंज से बाबा बैद्यनाथ धाम तक की कांवड़ यात्रा केवल आस्था की यात्रा नहीं, बल्कि सेवा, समर्पण और मानवता का भी अद्भुत संगम है। बांका जिले के इनारावरण स्थित कांवड़ पथ पर पिछले 15 वर्षों से महारानी कांवरिया सेवा संघ हजारों शिवभक्तों की निस्वार्थ सेवा कर रहा है। यहां कांवरियों को भोजन, पेयजल, चाय, ओआरएस, गर्म पानी, विश्राम और प्राथमिक चिकित्सा जैसी सभी सुविधाएं पूरी तरह नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाती हैं।
15 वर्षों से लगातार लग रहा सेवा शिविर
इनारावरण स्थित कांवड़ पथ पर सावन के महीने में हर ओर 'बोल बम' के जयघोष गूंजते हैं। इसी पवित्र मार्ग पर महारानी कांवरिया सेवा संघ का सेवा शिविर भी श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। संघ पिछले 15 वर्षों से लगातार इस शिविर का संचालन कर रहा है। यहां आने वाले प्रत्येक कांवरिये को बिना किसी भेदभाव के भोजन, पेयजल, चाय, ओआरएस, गर्म पानी, विश्राम और प्राथमिक चिकित्सा की सुविधा नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाती है।
एक प्रेरणा ने बदल दी जिंदगी
महारानी कांवरिया सेवा संघ के संस्थापक शशि शंकर सिंह उर्फ पप्पू सिंह बताते हैं कि वर्ष 2009 की कांवड़ यात्रा के दौरान एक अजनबी की कही गई बात ने उनकी सोच बदल दी। उस व्यक्ति ने उनसे कहा था कि यदि स्वयं बाबा धाम की यात्रा पूरी नहीं कर सकते, तो कांवरियों की सेवा करें। भगवान शिव इससे भी प्रसन्न होते हैं। यही प्रेरणा उनके जीवन का उद्देश्य बन गई और वर्ष 2010 में महारानी कांवरिया सेवा संघ की स्थापना की गई। तब से हर सावन में यहां सेवा शिविर लगाया जा रहा है।
दिन-रात सेवा में जुटे रहते हैं स्वयंसेवक
शिविर में स्वयंसेवक दिन-रात पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ सेवा में लगे रहते हैं। कोई कांवरियों को भोजन परोसता है, कोई पानी पिलाता है तो कोई प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराता है। लंबी यात्रा से थक चुके श्रद्धालुओं के लिए आराम करने की भी समुचित व्यवस्था की गई है, ताकि वे कुछ देर विश्राम करने के बाद अपनी यात्रा फिर से शुरू कर सकें।
'कांवरियों की सेवा ही भोलेनाथ की सबसे बड़ी पूजा'
संघ के संजय कुमार सिन्हा, रवि सिंह और अन्य सदस्यों का कहना है कि उनके लिए कांवरियों की सेवा ही भगवान शिव की सबसे बड़ी पूजा है। उन्होंने बताया कि इसी भावना के कारण हर वर्ष समाज के अधिक से अधिक लोग इस सेवा अभियान से जुड़ रहे हैं और अपना योगदान दे रहे हैं।
भक्ति, सेवा और समर्पण का बना प्रतीक
महारानी कांवरिया सेवा संघ का यह शिविर केवल सुविधाएं उपलब्ध कराने का केंद्र नहीं, बल्कि भक्ति, सेवा और समर्पण का जीवंत उदाहरण बन चुका है। यहां हर शिवभक्त का स्वागत श्रद्धा, सम्मान और अपनत्व के साथ किया जाता है। यही सेवा भावना इस शिविर को कांवड़ यात्रा की एक अलग और प्रेरणादायी पहचान देती है।