Bihar News: पैट मेरिट लिस्ट विवाद पर फिर भड़के छात्र, BRABU में अनिश्चितकालीन अनशन का एलान
बीआरएबीयू में PAT 2023-24 की मेरिट लिस्ट में गड़बड़ी और रोस्टर नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए छात्र संगठनों ने आंदोलन तेज कर दिया है। गोल्ड मेडलिस्ट छात्रों ने गुरुवार से अनिश्चितकालीन अनशन का ऐलान किया, जबकि छात्र नेताओं पर एफआईआर भी दर्ज हुई है।
बीआरएबीयू में PAT 2023-24 की मेरिट लिस्ट में गड़बड़ी और रोस्टर नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए छात्र संगठनों ने आंदोलन तेज कर दिया है। गोल्ड मेडलिस्ट छात्रों ने गुरुवार से अनिश्चितकालीन अनशन का ऐलान किया, जबकि छात्र नेताओं पर एफआईआर भी दर्ज हुई है।
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बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय (बीआरएबीयू) में PAT 2023-24 की मेरिट लिस्ट को लेकर विवाद एक बार फिर गहरा गया है। 3 जुलाई को जारी मेरिट लिस्ट में कथित गड़बड़ी, रोस्टर नियमों के उल्लंघन और मेधावी छात्रों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए संयुक्त छात्र संगठनों ने बुधवार को विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ आंदोलन तेज करने का ऐलान किया। छात्र नेताओं ने कुलपति पर तानाशाही रवैया अपनाने का आरोप लगाया। साथ ही गोल्ड मेडलिस्ट छात्रों ने गुरुवार दोपहर 12 बजे से विश्वविद्यालय परिसर में अनिश्चितकालीन अनशन शुरू करने की घोषणा की है।
दरअसल, PAT मेरिट लिस्ट जारी होने के बाद से ही छात्र संगठन लगातार विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। हाल ही में संयुक्त छात्र संगठनों के प्रतिनिधि कुलपति से मिलने विश्वविद्यालय पहुंचे थे। इस दौरान हुए विवाद के बाद कुलसचिव के लिखित आवेदन पर छात्र नेता डॉ. चंदन कुमार यादव समेत अन्य लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई।
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एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि छात्र नेताओं ने बिना अनुमति कुलपति आवास परिसर में प्रवेश किया और कुलपति से अमर्यादित भाषा में बातचीत की। एफआईआर दर्ज होने के बाद छात्र संगठनों ने इसे आंदोलन को दबाने की कोशिश बताते हुए विरोध और तेज करने का फैसला लिया है।
छात्र नेता डॉ. चंदन कुमार यादव ने आरोप लगाया कि PAT 2023-24 की मेरिट लिस्ट तैयार करने में रोस्टर नियमों का पालन नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि कई गोल्ड मेडलिस्ट और टॉपर छात्रों को मेरिट लिस्ट से बाहर कर दिया गया, जबकि विश्वविद्यालय प्रशासन ने अपने चहेते अभ्यर्थियों को सूची में शामिल किया है।
उन्होंने कहा कि यह मामला केवल छात्रों के भविष्य से जुड़ा नहीं है, बल्कि पूरी चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। छात्र संगठनों ने शुरू से ही इस मेरिट लिस्ट का विरोध और बहिष्कार किया है। उनका कहना है कि यदि विश्वविद्यालय प्रशासन ने जल्द उचित कार्रवाई नहीं की, तो आंदोलन को और व्यापक एवं उग्र किया जाएगा।