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Bihar Politics: नीतीश-सम्राट की सोशल इंजीनियरिंग अचानक गायब; तेजस्वी यादव मौके पर लगाएंगे चौका?
Sat, 06 Jun 2026 07:46 PM IST
आदित्य आनंद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
Published by: आदित्य आनंद
Updated Sat, 06 Jun 2026 07:46 PM IST
सार
Bihar News: बिहार विधान परिषद् के लिए भाजपा और जदयू ने सीटें बांटीं, लेकिन इसमें नीतीश-सम्राट का सोशल इंजीनियरिंग नहीं दिखा। अब तेजस्वी यादव इस मौके का फायदा उठाते हैं या अपनों को तव्वजो देते हैं, देखना यही बाकी है।
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बिहार विधान परिषद् चुनाव।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
बिहार विधान परिषद् की नौ सीटों पर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने उम्मीदवारों ने नाम की घोषणा कर दी गई है। नीतीश कुमार के नेतृत्व में जनता दल यूनाईटेड ने चार उम्मीदवार उतारे। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में भाजपा ने भी चार उम्मीदवार उतारे हैं। वहीं लोक जनशक्ति पार्टी ने एक सीट पर मुस्लिम उम्मीदवार को टिकट दिया। खास बात यह है कि नीतीश कुमार और सम्राट चौधरी की सोशल इंजीनियरिंग में इस बार दलित समाज से एक भी उम्मीदवार को टिकट नहीं दिया।
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बिहार में दलितों की आबादी 19.65 फीसदी है
वरिष्ठ पत्रकार लव कुमार मिश्रा ने कहा कि अभी एनडीए के सभी दल ओबीसी और ईबीसी पर फोकस कर रहे हैं। क्योंकि, इन्हें लगता है कि बिहार में आगे की राजनीति यही लोग तय करने वाले हैं। अगड़ी जाति पहले ही निर्णायक निभाने वाले वोट बैंक से दूर है। अब दलित को भी खास तवज्जो नहीं दिया जा रहा है। हालांकि, राज्यसभा एक दलित समाज ने नेता शिवेश राम को भाजपा टिकट जरूर दिया था। लेकिन, जदयू का फोकस पिछड़ा और अत्यंत पिछड़ा पर है। जिसकी जितनी भागीदारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी के हिसाब से देखें तो बिहार में दलितों को राजनीति में खास जगह नहीं मिल पाई। जातीय जनगणना के आंकड़ें बता रहे हैं कि बिहार में दलितों की आबादी 19.65 फीसदी है। इस हिसाब से देखें तो राजनीति में महत्वपूर्ण पदों पर उनकी तुलना अधिक होनी चाहिए थी। लेकिन, ऐसा नहीं है।
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तेजस्वी के पास दलितों को लुभाने का बड़ा मौका
वरिष्ठ पत्रकार लव कुमार मिश्रा ने कहा कि कांग्रेस के जमाने दलितों को जितनी तवज्जों मिली, उतनी अब नहीं मिल रही है। लालू प्रसाद ने भी अपनी सोशल इंजीनियरिंग में दलितों को खास जगह दी थी लेकिन अब बिहार की राजनीति में दलितों चेहरों की संख्या कम हो रही है। हालांकि, तेजस्वी यादव विधानसभा चुनाव में हार के बाद अब दलितों पर भी फोकस कर रहे हैं। इसलिए चर्चा है कि वह शिवचंद्र राम को एमएलसी भेजना चाहते हैं। आने वाले दिनों में अगर तेजस्वी यादव लालू प्रसाद के नक्शेकदम पर चलते हुए दलितों की 19.65 फीसदी वोट बैंक पर फोकस करते हैं तो चुनाव में उन्हें काफी फायदा मिलेगा। तेजस्वी के पास दलितों को लुभाने का बड़ा मौका है।
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एनडीए ने किस जाति से किसे टिकट दिया?
भाजपा और जदयू ने अपने उम्मीदवारों की सूची जारी की थी। इसमें भाजपा ने भोजपुरी सुपरस्टार पवन सिंह (राजपूत), संजय मयूख (कायस्थ), शीला पंडित (कुम्हार) और अनिल ठाकुर (नाई, ठाकुर) शामिल हैं। जदयू ने विधान परिषद चुनाव और उपचुनाव के लिए निशांत कुमार (कुर्मी), भारती मेहता (नोनिया), शिवरानी देवी प्रजापति (कुम्हार) और ललन प्रसाद (धानुक) को अपना उम्मीदवार घोषित किया है। लोजपा रामविलास ने अशरफ अंसारी (मुस्लिम) को टिकट दिया।