बिहार: चालू होने के चार दिन बाद धंस गया था 26.45 करोड़ का पुल, पांच महीने से बंद इटाढ़ी आरओबी की मरम्मत धीमी
बक्सर में 26.45 करोड़ रुपये की लागत से बना इटाढ़ी आरओबी चालू होने के चार दिन बाद 5 जून को धंस गया था। करीब पांच महीने से बंद पुल की मरम्मत धीमी है। छह माह के लिए खोला गया रेल फाटक भी बंद होने की आशंका है।
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इटाढ़ी रेल ओवर ब्रिज (आरओबी) की मरम्मत का काम काफी धीमी गति से चल रहा है। 26.45 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित यह पुल चालू होने के महज चार दिन बाद ही 5 जून को धंस गया था। इसके बाद सुरक्षा के मद्देनजर पुल से सभी प्रकार के वाहनों का परिचालन बंद कर दिया गया था। करीब पांच महीने से पुल बंद रहने के कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अब पुल की मरम्मत कराई जा रही है, लेकिन काम की धीमी गति को देखते हुए निर्धारित समय में इसके पूरा होने पर सवाल उठने लगे हैं।
पुल की मरम्मत के दौरान लगभग सभी एक्सपेंशन ज्वाइंट के पास स्लैब तोड़कर नए सिरे से सरिया बिछाने और ढलाई का काम किया जा रहा है। तकनीकी खामियों को दूर करने के लिए बड़े स्तर पर मरम्मत की जरूरत पड़ रही है। हालांकि, कार्यस्थल पर काम की धीमी रफ्तार लोगों की चिंता बढ़ा रही है। स्थानीय लोगों को उम्मीद थी कि पुल जल्द दुरुस्त हो जाएगा और आवागमन सामान्य हो सकेगा, लेकिन फिलहाल मरम्मत की गति को देखते हुए ऐसा होता नहीं दिख रहा है।
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छह माह के लिए खोला गया रेल फाटक
आरओबी से वाहनों का परिचालन बंद होने के बाद लोगों की परेशानी को देखते हुए रेलवे की ओर से छह माह के लिए रेल फाटक खोला गया है। इससे लोगों को फिलहाल राहत मिली है, लेकिन यह व्यवस्था सीमित अवधि के लिए ही है। यदि निर्धारित छह माह के भीतर आरओबी की मरम्मत पूरी नहीं होती है, तो रेल फाटक दोबारा बंद होने की आशंका है। ऐसी स्थिति में लोगों की परेशानी और बढ़ सकती है।
धीमी गति से काम, बढ़ सकती है परेशानी
जिस गति से पुल की मरम्मत कराई जा रही है, उससे निर्धारित समय सीमा के भीतर काम पूरा होने को लेकर संशय बना हुआ है। यदि मरम्मत कार्य में तेजी नहीं लाई गई, तो लोगों को एक बार फिर आवागमन की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में जरूरी है कि मरम्मत कार्य की नियमित निगरानी की जाए और निर्माण एजेंसी काम में तेजी लाए, ताकि रेल फाटक बंद होने से पहले आरओबी को वाहनों के परिचालन के लिए तैयार किया जा सके।