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Bihar: जमीन रिकॉर्ड में फर्जीवाड़े का आरोप, पूर्व सीओ समेत 55 लोगों पर केस; पुश्तैनी जमीन कब्जाने का दावा

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अररिया Published by: पूर्णिया ब्यूरो Updated Tue, 23 Jun 2026 10:08 AM IST
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सार

अररिया के फुलकाहा में एक किसान ने भूमि रिकॉर्ड में कथित फर्जीवाड़े और जमीन कब्जाने की साजिश का आरोप लगाते हुए पूर्व सीओ समेत 55 लोगों के खिलाफ केस दर्ज कराया है। शिकायत में ऑनलाइन रिकॉर्ड से छेड़छाड़, धमकी और फायरिंग तक के आरोप लगाए गए हैं।

Bihar Former CO and 54 Others Booked Over Ancestral Land Grabbing Claims
सांकेतिक फोटो - फोटो : AI
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विस्तार

अररिया जिले में भूमि अभिलेखों में कथित हेरफेर और जमीन कब्जाने के प्रयास का एक बड़ा मामला सामने आया है। फुलकाहा थाना क्षेत्र के डुमरिया गांव निवासी 66 वर्षीय किसान बैद्यनाथ बहरदार की शिकायत पर पुलिस ने पूर्व अंचलाधिकारी (सीओ) सहित 55 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। मामला सामने आने के बाद राजस्व और प्रशासनिक महकमे में हलचल तेज हो गई है।


फुलकाहा थाना कांड संख्या 148/26 के तहत दर्ज प्राथमिकी में तत्कालीन सीओ शंभू प्रकाश, अंचलाधिकारी उत्तम राहुल, राजस्व कर्मचारी जितेंद्र कुमार राय, जमीउर रहमान, रेणु कुमारी समेत कुल 55 लोगों को नामजद किया गया है।
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जमीन के रिकॉर्ड में अवैध बदलाव का आरोप
शिकायतकर्ता बैद्यनाथ बहरदार का आरोप है कि उनकी खतियानी जमाबंदी संख्या 270, 270A और 1665 से जुड़ी करीब 2 एकड़ 26 डिसमिल जमीन के ऑनलाइन रिकॉर्ड में अवैध रूप से बदलाव किया गया। उनका दावा है कि बिना किसी सक्षम न्यायालय या वरीय प्रशासनिक अधिकारी के आदेश के भूमि अभिलेखों में संशोधन कर खेसरा संख्या 1798, 1799 और 1207 से संबंधित विवरण बदल दिए गए। किसान का आरोप है कि सरकारी डिजिटल हस्ताक्षर (डोंगल) का उपयोग कर कुछ व्यक्तियों के नाम ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज कर दिए गए, जबकि अंचल कार्यालय के मूल अभिलेखों में ऐसा कोई वैध आधार मौजूद नहीं है।
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कोर्ट से आदेश मिलने के बाद भी नहीं रुका विवाद
बैद्यनाथ बहरदार के अनुसार, उन्होंने मामले को लेकर कानूनी लड़ाई लड़ी और फारबिसगंज के डीसीएलआर न्यायालय से अपने पक्ष में आदेश भी प्राप्त किया। इसके बावजूद विवाद खत्म नहीं हुआ और जमीन पर कब्जे की कोशिशें जारी रहीं। प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि बड़ी संख्या में लोग खेत पर पहुंचे और जबरन कब्जा करने का प्रयास किया। शिकायतकर्ता के मुताबिक ट्रैक्टर चलाकर खेत जोता गया और तैयार फसल को नुकसान पहुंचाया गया।

धमकी और फायरिंग का भी आरोप
एफआईआर में यह भी उल्लेख किया गया है कि विरोध करने पर शिकायतकर्ता को हथियार दिखाकर धमकाया गया। साथ ही फायरिंग किए जाने का भी आरोप लगाया गया है। पीड़ित किसान ने घटना से जुड़े वीडियो, न्यायालय के आदेश, खतियान की प्रतियां, जमाबंदी रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेज पुलिस को सौंपे हैं।

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पुलिस ने शुरू की जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए अररिया पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि भूमि अभिलेखों में कथित हेरफेर, सरकारी रिकॉर्ड से छेड़छाड़ और अवैध कब्जे के आरोपों की सभी पहलुओं से जांच की जा रही है। जांच के दौरान दस्तावेजों की सत्यता, ऑनलाइन रिकॉर्ड में हुए बदलाव, डिजिटल हस्ताक्षरों के उपयोग और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी पड़ताल की जाएगी।

भूमि प्रबंधन व्यवस्था पर उठे सवाल
इस मामले ने जिले में भूमि प्रबंधन प्रणाली और ऑनलाइन रिकॉर्ड की पारदर्शिता को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह हाल के वर्षों में सामने आए सबसे चर्चित भूमि विवाद मामलों में से एक साबित हो सकता है।

फिलहाल पीड़ित किसान न्याय और अपनी पुश्तैनी जमीन की सुरक्षा की मांग कर रहे हैं, जबकि पूरे मामले पर प्रशासन और पुलिस की कार्रवाई पर लोगों की नजर बनी हुई है।
 
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