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हर दिन 8 किमी पैदल चलकर कोलकाता की सड़कों गुब्बारे बेचते हैं 70 साल के दादा, रुला देगी दर्दभरी कहानी

Thu, 01 Oct 2026 04:56 PM IST
धर्मेंद्र कुमार सिंह फीचर डेस्क, अमर उजाला
फीचर डेस्क, अमर उजाला Published by: धर्मेंद्र कुमार सिंह Updated Thu, 01 Oct 2026 04:56 PM IST
सार

सोशल मीडिया पर हर दिन गुब्बार बेचने वाले एक बुजुर्ग की कहानी वायरल हो रही है, जिसने लोगों को भावुक कर दिया है। सबसे बड़ी बात यह है कि वह हर दिन 8 किमी पैदल चलकर कोलकाता की सड़कों पर गुब्बारा बेचते हैं। 

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70 year old samir kaka walks 8 km daily to sell balloons
हर दिन 8 किमी पैदल चलकर कोलकाता की सड़कों पर गुब्बारे बेचते हैं 70 साल के दादा - फोटो : instagram

विस्तार

सोशल मीडिया पर अक्सर किसी ने किसी व्यक्ति की ऐसी कहानी वायरल होती है, जो लोगों भावुक कर देती हैं। इनमें कई कहानियां ऐसी भी होती हैं, जो लोगों को सोचने पर मजबूर करती हैं। इन दिनों कोलकाता की सड़कों पर रंग-बिरंगे गुब्बारे बेचने वाले बुजुर्ग की कहानी खूब वायरल हो रही है, जिसने लोगों को भावुक कर दिया है। साथ ही उनकी कहानी लोगों के लिए एक प्रेरणा है।

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कोलकाता के ठाकुरपुकुर निवासी 70 साल के समीर काका हर दिन चार किलोमीटर पैदल चलकर उस जगह पर जाते हैं, जहां वो गु्ब्बारा बेचे हैं। वह हर दिन 6 घंटे तक ग्राहकों की राह देखते हैं कि कोई उनका गुब्बारा खरीद ले, क्योंकि फिर उन्हें दिन बीतने पर चार किलोमीटर का रास्ता पैदल तय करना है। हर दिन वो 8 किलोमीटर पैदल चलते हैं, जिसके बदले घंटों इंतजार करने पर करीब 150 रुपये कमाते हैं। 
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कोलकाता की सड़कों पर रंग-बिरंगे गुब्बारें समीर काका को आप आसानी से देख सकते हैं। गुब्बारों के पीछे छिपी उनकी जिंदगी की कहानी शायद पहली नजर में नहीं दिखती है। बीते 26 साल से समीर काका गुब्बारे बेच रहे हैं। इतने लंबे समय में उन्होंने अपनी जिंदगी में कई मुश्किलों का सामना किया है। कुछ साल पहले उन्हें स्ट्रोक आया था, जिसके बाद वो कई साल लकवे से जूझते रहे। उनकी गर्दन ठीक से सीधी नहीं हो पाती है। 
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उनको पैरों के त्वचा की भी गंभीर बीमारी है। इसके कारण उनके लिए चलना दर्दनाक और कठिन होता है। इसके बाद भी वह हर सुबह गुब्बारों का गुच्छा उठाकर उसी रास्ते पर निकल पड़ते हैं, क्योंकि उनके पीछे एक परिवार है। सबसे बड़ी बात यह है कि उनके परिवार में पां सदस्य हैं और कमाने वाले वह अकेले हैं। उनकी हर दिन की 150 रुपये की कमाई उनके परिवार का सहारा है। 

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सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इंस्टाग्राम पर कंटेंट क्रिएटर ने उनका वीडियो शेयर किया है, जिसका बाद उनकी कहानी सामने आई है। उन्होंने कहा कि एक बुजुर्ग व्यक्ति को सड़कों पर धीरे-धीरे चलते और लंगड़ाते देखा, जिनको हाथों में गुब्बारे थे। वह लगातार ग्राहकों की तलाश में थे। 70 साल की उम्र, पैरों में तकलीफ और रास्त मुश्किल, लेकिन परिवार की जिम्मेदारियों के आग समीर काका का सफर अभी भी जारी है। 

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