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Science News: 20 हजार साल पुराने जीवाश्म में मिली ये अनोखी चीज, वैज्ञानिकों के खुलासे से दुनिया हैरान

Tue, 07 Jul 2026 02:43 PM IST
धर्मेंद्र कुमार सिंह फीचर डेस्क, अमर उजाला
फीचर डेस्क, अमर उजाला Published by: धर्मेंद्र कुमार सिंह Updated Tue, 07 Jul 2026 02:43 PM IST
सार

Science News: वैज्ञानिकों ने खुलासा किया है कि  प्राचीन काल में मधुमक्खियां जानवरों की हड्डियों के भीतर घोंसले बनाती थीं। इस खुलासे ने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है। आइए जानते हैं कि शोध में क्या पता चला है?

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Ancient bees turned tooth sockets into tiny nurseries 20,000 years ago
20 हजार साल पुराने जीवाश्म में मिली ये अनोखी चीज - फोटो : Lazaro Viñola López

विस्तार

Science News: वैज्ञानिकों की खोज ने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है। एक शोध में खुलासा हुआ है कि प्राचीन काल में मधुमक्खियां जानवरों की हड्डियों के भीतर घोंसले बनाती थीं। रॉयल सोसाइटी ओपन साइंस पत्रिका में यह शोध प्रकाशित किया गया है। यह खुलासा वर्ष 2025 में प्रकाशित एक शोध में हुआ है। शोधकर्ताओं ने कैरिबियाई द्वीप हिस्पानियोला (हैती और डोमिनिकन गणराज्य) की एक चूना-पत्थर की गुफा से एक जीवाश्म खोजा था, जो 20 हजार साल पुराना था। वैज्ञानिकों को इस जीवाश्म के जबड़े के हड्डियों के भीतर मधुमक्खियों के घोंसले बनाने के प्रमाण मिले हैं। इन जबड़ों के खाली दांतों के गड्ढों में मधुमक्खियों के बनाए गए घोंसलों के स्पष्ट निशान मिले हैं। 

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इस शोध के प्रमुख लेखक और  शिकागो स्थित फील्ड म्यूजियम के शोधकर्ता लाजारो विन्योला लोपेज ने बताया कि जीवाश्मों की जांच की गई। इस दौरान कई जबड़ों के दांतों की खाली कोटरों में असामान्य, चिकनी और कटोरी जैसी सतह देखी गई। जांच की गई, तो पता चला कि यह सामान्य मिट्टी के जमाव नहीं थे, बल्कि एकाकी (सोलिटरी) मधुमक्खियों द्वारा बनाए गए घोंसले थे। इस शोध के मुताबिक, मधुमक्खियां गुफा की मुलायम और चिकनी मिट्टी में सुरंग बनाने के दौरान जीवाश्म बने जबड़ों तक पहुंचीं और आगे खुदाई करने की जगह खाली दांतों की कोटरों को ही अपना घोंसला बना लिया और इस्तेमाल करने लगीं। उन्होंने उन कोटरों को जलरोधी परत से सील कर दिया और उनमें अंडे देने लगीं। 
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वैज्ञानिकों मानते हैं कि इस गुफा में काफी लंबे समय तक उल्लुओं का बसेरा रहा होगा। उल्लू अपने शिकार को पूरी तरह निगलने के बाद अपाच्य अवशेषों को पेलेट्स के रूप में बाहर निकालते हैं। सदियों तक गुफा में ये पेलेट्स जमा होती गईं और फर्श पर जीवाश्म बनने की प्रक्रिया हुई। इससे 50 से ज्यादा प्रजातियों के जानवरों की हड्डियां सुरक्षित रह गईं। हालांक, घोसलों में किसी भी मधुमक्खी का जीवाश्म नहीं मिला है। लेकिन उनकी विशिष्ट संरचना के आधार पर वैज्ञानिकों ने इन्हें एक नए प्रकार के ट्रेस फॉसिल  (व्यवहार संबंधी जीवाश्म)  के तौर पर वर्गीकृत किया है। वैज्ञानिकों ने इस जीवाश्म का नाम ओस्निडम अल्मोंटेई रखा है।
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शोधकर्ताओं का कहना है कि दुनिया की 90 फीसदी से ज्यादा मधुमक्खी की प्रजातियां अकेले रहती हैं और सामान्यतः मिट्टी में घोंसले बनाती हैं। अभी तक न तो जीवाश्म रिकॉर्ड में और न ही वर्तमान समय की मधुमक्खियों में हड्डियों के भीतर घोंसला बनाने का कोई उदाहरण सामने आया था। इसलिए इस खोज को बेहद दुर्लभ और अहम माना जा रहा है। 

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वैज्ञानिकों  ने बताया कि हिस्पानियोला की अन्य चूना-पत्थर की गुफाओं और पहले से संग्रहित जीवाश्मों में भी इस तरह के घोसले हो सकते हैं। इन पर अभी तक ध्यान नहीं गया है। इस अध्ययन से इस बात के भी संकेत मिलते हैं कि जीवाश्मों का बारीकी से अध्ययन करने पर अतीत के जीवों के व्यवहार से रहस्यों को खुलासा हो सकता है। 

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