फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Bizarre News ›   Astronomers say they have discovered the first green star

अंतरिक्ष में दिखा चौंकाने वाला नजारा! ग्रहों को निगल गया तारा, फिर अचानक हो गया हरा, देखकर वैज्ञानिक भी हैरान

Wed, 21 Oct 2026 02:46 PM IST
धर्मेंद्र कुमार सिंह फीचर डेस्क, अमर उजाला
फीचर डेस्क, अमर उजाला Published by: धर्मेंद्र कुमार सिंह Updated Wed, 21 Oct 2026 02:46 PM IST
सार

वैज्ञानिकों ने अंतरिक्ष में एक हैरान करने वाली खोज की है। उन्होंने पहली हरा तारा देखा है, जिसका नाम WD J1330+6435 है। उन्होंने इसे लेकर चौंकाने वाला खुलासा किया है।  

विज्ञापन
Astronomers say they have discovered the first green star
अंतरिक्ष में दिखा चौंकाने वाला नजारा! ग्रहों को निगल गया तारा, फिर अचानक हो गया हरा - फोटो : AI

विस्तार

वैज्ञानिकों ने अंतरिक्ष में पहली बार कुछ ऐसा देखा जिसने उनको हैरान कर दिया है। उन्होंने अंतरिक्ष में एक हरे रंग की तारे की खोज की है, जिसका नाम WD J1330+6435 है। यह हरे रंग का तारा 280 प्रकाश वर्ष दूर मिल्की वे गैलेक्सी के ड्रेको तारामंडल में स्थित है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह एक सफेद बौना तारा है। इसके अंदर उन ग्रहों के टूटे हिस्से समा गए, जो कभी इसके आसपास परिक्रमा करते थे। उन्होंने इन इलाकों में आए सोडियम औप तारे में मौजूद हीलियम के बीच होने वाली प्रक्रिया ने कारण यह तारा हरे रंग का नजर आता है। 

विज्ञापन


आमतौर पर तारों का रंग उनके तापमान पर निर्भर होता है। ठंडे तारा नारंगी दिखाई देता है, सूरज जैसे तारे सफेद और ज्यादा गर्म तारे हल्के नीले रंग नजर आ सकते हैं। लेकिन यह तारा इन सभी से अलग है। वैज्ञानिकों ने एक ऐसा बोना तारा खोजा है, जिसका रंग हल्का गुलाबी है। इस खोजों से खुलासा हुआ है कि तारों में मौजूद अलग-अलग तत्व उनके रंग को प्रभावित कर सकते हैं।
विज्ञापन


वैज्ञानिकों ने WD J1330+6435 पर शोध किया है। इसके बाहरी हिस्से में कैल्शियम, लिथियम और सोडियम जैसे तत्व पाए गए। यह तत्व उन ग्रहों के टूटे हिस्सों से आए हैं, जो इस तारे के आसपास घूमते थे। समय के साथ इन ग्रहों के हिस्से तारे में समा गए। इस तारे के हरे रंग में  सोडियम की अहम भूमिका है। आमतौर पर सोडियम नारंगी रंग की रोशनी को सोख लेता है, जिसके कारण सोडियम वाली स्ट्रीट लाइट नारंगी रंग की नजर आती हैं। लेकिन इस तारे में सोडियम के साथ कुछ अलग हो रहा है। 
विज्ञापन
विज्ञापन


अब घर बैठे वीडियो कॉल पर पक्का हो रहा रिश्ता, शादी की रस्म का ये नया अंदाज देख लोग बोले- तलाक भी ऑनलाइन होगा!


कैसे रंग को सोडियम और हीलियम ने किया प्रभावित? 

वैज्ञानिकों का कहना है कि इस तारे में घनत्व बहुत अधिक है। यहां पर लगातार सोडियम के परमाणु की हीलियम के परमाणुओं से टक्कर होती है। इनकी वजह से सोडियम के काम करने का तरीका बदल जाता है, जिसके बाद वह पीले, नारंगी और लाल रंग की रोशनी के कुछ हिस्सों को भी सोखने लगता है, जिसका तारे से निकलने वाली रोशनी प्रभावित होती है। रोशनी में अलग-अलग रंगों का संतुलन बदलता है, तो यह तारा हरे रंग का नजर आता है। 

वायरल: शांत बैल को लट्ठ मारना चाचा को पड़ा भारी, पलटकर ऐसे लिया बदला कि देखते रह गए लोग

वैज्ञानिकों का कहना है कि सूरज जैसे सामान्य तारों में ऐसा रंग नहीं दिखाई देता है। सफेस बौने तारे पृथ्वी के आकार के हो सकते हैं। यह किसी तारे के जीवन के आखिरी चरण में बनते हैं। इनमें बहुत अधिक पदार्थ भरे होते हैं। आमतौर पर एक सफेद बौने तारे में सूरज के करीब आधे हिस्से बराबर द्रव्यमान हो सकता है। WD J1330+6435 में भी सोडियम के कारण नारंगी रोशनी का बड़ा हिस्सा सोखा जाता है, जिससेतारे का रंग हरा नजर आने लगता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all Bizarre News in Hindi related to Weird News - Bizarre, Strange Stories, Odd and funny stories in Hindi etc. Stay updated with us for all breaking news from Bizarre and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed