Ajab-Gajab: दुनिया में जीवों के रहस्यों को जानने के लिए वैज्ञानिक लगातार शोध कर रहे हैं। अब इस बीच वैज्ञानिकों ने व्हेल, डॉल्फिन और सील जैसे समुद्री स्तनधारी जीवों पर शोध किया है। इस शोध ने वैज्ञानिकों को भी हैरत में डाल दिया है। यह समुद्री स्तनधारी अत्यंत सामाजिक जीव होते हैं और समूहों में रहते हैं। वर्षों तक संबंध बनाते हैं और कभी तो दशकों तक उन्हीं साथियों के संपर्क में रहते हैं। इस सामाजिक जीवन से उन्हें कई फायदे मिलते हैं। हालांकि, एक नए अध्ययन में खुलासा हुआ है कि सामाजिक संबंध संक्रामक रोगों के प्रसार में भी अहम भूमिका निभाते हैं।
Weird News: समंदर में मच रही है हलचल, क्यों समुद्री जीवों में फैल रहा संक्रमण? शोध में हुआ चौंकाने वाला खुलासा
Ajab-Gajab: वैज्ञानिकों ने एक महत्वपूर्ण शोध किया है। इसमें बेहद हैरान करने वाले खुलासा हुए हैं। शोध में पता चला है कि व्हेल, डॉल्फिन और सील जैसे समुद्री स्तनधारी जीवों की शक्ति ही उनकी कमजोर बन गई है।
अध्ययन में एक और बड़ा खुलासा
अध्ययन में यह भी बताया गया है कि कुछ वर्षों तक इन जीवों की आबादी पूरी तरह स्वस्थ दिखती है, लेकिन अगले ही वर्ष बड़ी संख्या में जानवर बीमार या मृत पाए जाते हैं। खसरे से संबंधित मोर्बिलिवायरस जैसे अत्यधिक संक्रामक वायरस यूरोप, उत्तरी अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया में डॉल्फि और सील की सामूहिक मौतों की वजह बन चुकी हैं, जबकि लोबोमाइकोसिस जैसी त्वचा संबंधी बीमारियां भी डॉल्फिन में फैलकर उनकी त्वचा में दीर्घकालिक घाव और कमजोर स्वास्थ्य की स्थिति पैदा कर रही हैं।
क्यों कठिन है वैज्ञानिकों के लिए निगरानी करना
शोधकर्ताओं की तरफ से बताया गया है कि समुद्र में निगरानी की सीमाओं की वजह से रोग के प्रसार को समझना और भी कठिन हो जाता है। वैज्ञानिक न तो हर सामाजिक संपर्क को देख पाते हैं और न ही समय रहते बीमार जानवरों को अलग कर पाते हैं। इसके साथ ही रोग किसी किसी आबादी में समान रूप से नहीं फैलते, बल्कि सामाजिक रिश्तों और व्यवहार के मुताबिक, विशेष रास्तों से आगे बढ़ते रहते हैं।
World Largest Gold Mine: किस देश में है दुनिया की सबसे बड़ी सोने की खदान? जहां से हर साल निकलता है 48 टन सोना
14 वैज्ञानिक अध्ययनों की समीक्षा की गई है
शोधकर्ताओं ने इस अध्ययन के लिए सामाजिक नेटवर्क विश्लेषण का इस्तेमाल करने वाले 14 वैज्ञानिक अध्ययनों की समीक्षा की, जो मुख्य रूप से उत्तरी अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया पर केंद्रित थे। इसमें यह पता चला कि किसी जानवर के कितने साथी हैं, वह कितनी बार दूसरों के संपर्क में आता है और क्या वह सामाजिक नेटवर्क के केंद्र में है।
सबसे अहम एक निष्कर्ष निकला है कि ज्यादा संपर्क में रहने वाले कुछ जानवर, जिन्हें सुपर-स्प्रेडर कह सकते हैं, वो रोग फैलाने में असामान्य रूप से बड़ी भूमिका निभाते हैं। डॉल्फिन में ऐसे जानवरों से संक्रमण तेजी से फैल सकता है। कुछ मामलों में रोग सिर्फ कुछ सामाजिक रूप से केंद्रीय व्यक्तियों पर निर्भर पाया गया।
Bactrian Camel: क्या है मंगोलियाई ऊंट की खासियत? जानकर हो जाएंगे हैरान, गणतंत्र दिवस की परेड में होंगे शामिल
समूहों की संरचना भी काफी महत्वपूर्ण
अध्ययन में यह भी बताया गया है कि समूहों की संरचना भी काफी महत्वपूर्ण है। कुछ जीवों में उपसमूह रोग प्रसार को धीमा कर सकते हैं, तो वहीं अन्य स्थितियों में यही उपसमूह संक्रमण को लंबे समय तक बनाए रखते हैं। शोधकर्ताओं की तरफ से चेतावनी दी गई है कि सिर्फ जानवरों की संख्या गिनना पर्याप्त नहीं है। सामाजिक संबंधों को समझना, समय रहते रोग की पहचान करने और रोगों की या संक्रमण की रोकथाम के लिए जरूरी है। शोध के मुताबिक, बदलते पर्यावरण में समुद्री स्तनधारियों के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए सामाजिक जीवन और रोगजनकों को समझना बेहद जरूरी है।