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Women's Day: इंदिरा से लेकर सोनिया और प्रियंका गांधी तक, कांग्रेस में सशक्त रही है ये महिलाएं 

निलेश कुमार Published by: अनिल पांडेय Updated Fri, 08 Mar 2019 08:31 AM IST
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सार

  • सशक्त रही है राजनीति में महिलाओं की भागीदारी
  • कांग्रेस में इंदिरा गांधी के दौर से रहा है बोलबाला
  • पहली महिला राष्ट्रपति व लोकसभा अध्यक्ष कांग्रेस से
  • सक्रिय राजनीति में आईं प्रियंका गांधी से भी उम्मीदें

Women's Day Special: How Congress got strength from women leaders Indira, Sonia, Priyanka Sheila
कांग्रेस की राजनीति को इन महिलाओं से मिली है मजबूती - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

दिल्ली में भाजपा के मुकाबले लोकसभा चुनाव 2019 के लिए आम आदमी पार्टी और कांग्रेस का गठबंधन नहीं हो सका। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की लाख कोशिशें काम नहीं आई। अहमद पटेल और कांग्रेस के कुछ अन्य नेता भी गठबंधन के पक्ष में थे, लेकिन दिल्ली कांग्रेस की अध्यक्ष शीला दीक्षित का फैसला सब पर भारी पड़ा और राहुल गांधी को भी उनकी बात माननी पड़ी। यह परिघटना राजनीति में महिला की सशक्त भूमिका दिखाती है।

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शुरुआत से देखा जाए तो कांग्रेस में कई ऐसी महिलाएं रही हैं, जिन्होंने अपनी सशक्त भूमिका का निर्वाह किया है। इंदिरा गांधी से लेकर सोनिया गांधी, अंबिका सोनी और अब प्रियंका गांधी, राजनीति में सबके कंधों पर मजबूत जिम्मेदारी दी गई है और सबने निभाया भी है। संयोग देखिए कि पहली महिला राष्ट्रपति और पहली महिला लोकसभा अध्यक्ष भी कांग्रेस के शासनकाल में बनी। 
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अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के बहाने आइए जानते हैं इन महिलाओं की भूमिकाओं के बारे में: 

प्रधानमंत्री से 'आयरन लेडी' और 'इंदिरा इज इंडिया' तक

साल 1959 में जब इंदिरा गांधी कांग्रेस की अध्यक्ष चुनी गईं थीं तो उन्होंने यह सोच लिया था कि कम्यूनिस्ट सरकार को किस तरह से किनारे करना है। 1966 से 1977 तक लगातार तीन बार वह प्रधानमंत्री रहीं। एक बार हारने के बाद वह 1980 में फिर से प्रधानमंत्री बनीं। साल 1984 में उनकी हत्या कर दी गई। वह भारत की पहली और अब तक की एकमात्र महिला प्रधानमंत्री रहीं।


1971 का भारत-पाक युद्ध इतिहास में दर्ज हुई अहम तारीखों में से है। इंदिरा गांधी के प्रधानमंत्री रहते ही भारतीय सेना ने पाकिस्तान को घुटने के बल ला दिया था और पाकिस्तान दो टुकड़ों में बंट गया। 1975 में आपातकाल लगाने पर तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष देवकांत बरुआ ने नारा दिया था- इंडिया इज इंदिरा और इंदिरा इज इंडिया। 

इंदिरा ही थीं, जिसने पंजाब में फैले उग्रवाद को समाप्त करने के लिए ऑपरेशन ब्लू स्टार चलाया। इंदिरा आम चुनाव से पहले पंजाब में शांति चाहती थीं, लेकिन ऑपरेशन ब्लू स्टार से सिक्खों की धार्मिक भावनाएं आहत हुईं। ब्रिटेन की तत्कालीन प्रधानमंत्री मारग्रेट थैचर ने इंदिरा गांधी को ब्रिटेन का पूरा समर्थन दिया था।

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सोनिया गांधी के साथ शीला दीक्षित(File Photo) - फोटो : PTI

सोनिया के नेतृत्व में कांग्रेस ने रचा इतिहास

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी का नाम भारत ही नहीं बल्कि विश्व की ताकतवर महिलाओं में लिया जाता रहा है। 2004 और 2009 के लोकसभा चुनावों में सोनिया गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस ने शानदार सफलता हासिल की थी। सोनिया गांधी 1997 से 2017 तक लगातार 20 साल कांग्रेस अध्यक्ष रहीं। कांग्रेस पार्टी के 125 सालों के इतिहास में सबसे लंबे समय तक अध्यक्ष पद पर बनी रहने वाली वह एकमात्र महिला हैं। सोनिया गांधी वर्तमान में यूपीए अध्यक्ष हैं। 

पहली महिला राष्ट्रपति और पहली महिला लोकसभा अध्यक्ष

प्रतिभा देवी सिंह पाटिल भारत की राष्ट्रपति रह चुकी हैं। साल 2007 में वह भारत की पहली महिला राष्ट्रपति बनीं थी। राजनीति के सर्वोच्च पदों में से एक ऐसे पद का उन्होंने बखूबी निर्वाह किया, जहां से देश की नीति निर्णायक मुद्दे निर्धारित होते हैं। वहीं, दूसरी ओर कांग्रेस ने एससी समुदाय से आनेवाले पहले उप प्रधानमंत्री जगजीवन राम की बेटी मीरा कुमार को लोकसभा अध्यक्ष बनाया गया। मीरा कुमार ने भारतीय संसद में लोकसभा की पहली महिला अध्यक्ष बनकर एक नई इबारत लिखी। संसद में चल रही जोरदार बहसों के बीच भी मीरा कुमार की विनम्रता उनकी मीठी बोली और मुस्कुराहट दिखती थी

80 बसंत पार कर चुकीं शीला अब भी सशक्त

शीला दीक्षित तीन बार दिल्ली की मुख्यमंत्री रह चुकी हैं और इस चुनावी महासमर में एक बार फिर उन्हें पार्टी ने दिल्ली की कमान सौंप दी। शीला दीक्षित के कांग्रेस अध्यक्ष रहते दिल्ली की सातों लोकसभा सीटों पर कांग्रेस का कब्जा रहा था। 80 बसंत पार कर चुकीं शीला दीक्षित पर विरोधियों ने सवाल भी उठाए, लेकिन आप—कांग्रेस गठबंधन पर उनकी 'ना' ने साबित किया कि पार्टी में उनकी धाक है। 

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Priyanka Gandhi - फोटो : PTI

युवा कांग्रेस से सशक्त नेत्री के रूप में उभरीं अंबिका

कांग्रेस की सशक्त नेत्री रहीं अंबिका सोनी को साल 1969 में इंदिरा गांधी ही राजनीति में लेकर आईं थीं। 1975 में वह भारतीय युवा कांग्रेस की अध्यक्ष चुनी गईं और संजय गांधी के साथ काम किया। 1998 में अखिल भारतीय महिला कांग्रेस की अध्यक्ष बनीं। फिर अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिव भी रहीं। राज्यसभा सदस्य रहते हुए वह साल 2006 में उन्हें पर्यटन और संस्कृति मंत्री रहीं। साल 2009 से 2012 तक  सूचना और प्रसारण मंत्री रहीं। उन्होंने प्रेस की स्वतंत्रता और उसकी स्वायत्तता पर बल दिया। उन्हें जम्मू-कश्मीर में लोकसभा चुनाव के लिए संयोजन समिति प्रमुख बनाया गया है।

प्रियंका गांधी के कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी

प्रियंका का राजनीति में प्रवेश वैसे तो साल 1999 के लोकसभा चुनावों में हो गया था, जब वह अमेठी में अपनी मां सोनिया गांधी के लिए प्रचार में जुटीं थीं, लेकिन हाल ही में वह सक्रिय राजनीति में आईं हैं। पार्टी ने उन्हें महासचिव पद के साथ पूर्वी उत्तर प्रदेश की कमान सौंपी है। उनके अंतर्गत 40 लोकसभा सीटें आती हैं, जिनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का संसदीय क्षेत्र भी आता है। 

कांग्रेस समर्थक प्रियंका में उनकी दादी इंदिरा गांधी की छवि देखती है। प्रचार अभियानों में प्रियंका की मौजूदगी का असर अक्सर देखा गया है। हालांकि इस बार लोकसभा चुनाव में वह क्या कमाल कर पाती हैं, यह देखना दिलचस्प होगा, लेकिन उन्हें कांग्रेस का ट्रंप कार्ड माना जा रहा है। 

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