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आर्थिक मंदी के 10 साल पूरेः ऐसे हुए थे पूरे विश्व में हालात बेकाबू, भारत में भी खतरा है बरकरार

Fri, 14 Sep 2018 12:01 PM IST
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला Updated Fri, 14 Sep 2018 12:01 PM IST
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tenth anniversary of global recession, india still on radar

विश्व प्रसिद्ध आर्थिक मंदी को कल (गुरुवार) 10 साल पूरे हो जाएंगे। 15 सितंबर 2008 को अमेरिका में इसी दिन लीमैन ब्रदर्स बैंक ने दिवालिया होने की याचिका दायर की थी। इसके बाद ही अगले एक दशक तक पूरे विश्व में इस मंदी का असर देखा गया था। मंदी के दौरान अमेरिका के दो सबसे बड़े बैंक बंद हो गए थे। लेकिन इन 10 सालों में दुनिया पर अभी भी मंदी का संकट बरकरार है। 

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बड़े से बड़े अर्थशास्त्री हुए विफल

लीमैन ब्रदर्स का पतन एक बड़ा सबक है, बड़े से बड़े अर्थशास्त्री भी इसका अनुमान लगाने में विफल रहे। इसमें सुधार के लिए बड़ा घटक है फाइनेंस क्षेत्र में महिला नेतृत्व बढ़ाना। अमेरिका के बड़े बैंक लीमैन ब्रदर्स की विफलता एक अपमानजनक पल था। 10 साल पहले आर्थिक मंदी के दौरान अमेरिका की अर्थव्यवस्था को 6 से 14 ट्रिलियन डॉलर को नुकसान हुआ था इसके साथ ही देश के दो सबसे बड़े बैंक भी पूरी तरह से दिवालिया होकर समाप्त हो गए थे। मेरिल लिंच का बैंक ऑफ अमेरिका ने अधिग्रहण कर लिया था, वहीं लीमैन ब्रदर्स ने अपने बैंकिंग व्यापार को बार्कलेज व नोमुरा को बेच दिया था। 
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ऐसे आई थी मंदी

2002-04 के दौरान अमेरिका में होम लोन सस्ता और आसान होने से प्रॉपर्टी की डिमांड बढ़ रही थी। दाम काफी बढ़ गए थे। तेजी के दौरान लीमैन ने लोन देने वाली 5 कंपनियां खरीदी थीं। ऊंची कीमत पर प्रॉपर्टी की डिमांड कम हुई तो दाम घटने लगे। कर्ज डिफॉल्ट शुरू हो गया। नतीजा, मार्च 2008 में अमेरिका की दूसरी सबसे बड़ी होम लोन कंपनी बियर स्टर्न्स डूब गई। 17 मार्च को लीमैन के शेयर 48% गिरे तो फिर कभी उठ नहीं पाए। कोरिया डेवलपमेंट बैंक द्वारा इसमें निवेश और बार्कलेज में विलय की बात नाकाम रही तो 15 सितंबर 2008 को इसने बैंकरप्सी के लिए आवेदन कर दिया। विशेषज्ञ मानते हैं कि रेगुलेटर्स ने इससे कोई सीख नहीं ली। वे अब भी बैंकों को प्रॉपर्टी लोन के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। 
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इन छह लोगों पर दोष हो पाया था सिद्ध

इतनी बड़ी आर्थिक मंदी का जिम्मेदार करीब एक दर्जन से अधिक लोगों को बताया गया था, लेकिन आरोप केवल 6 पर ही सिद्ध हो पाए थे। इन छह लोगों में एंगलो-आइरिश बैंक के पूर्व सीईओ डेविड ड्रम, गिल्टनिर के पूर्व सीईओ लॉरस वेल्डिंग, लैंड्सबैंकी के सिगुरजोन अरणासन, कोपथिंग के पूर्व चेयरमैन सिगुरडर इनारसन व पूर्व सीईओ हरिडर मार सिगुरडर व क्रेडिट सुसे के पूर्व ग्लोबल चीफ करीम सेराजेलडिन शामिल हैं। 

भारत भी नहीं है अछूता

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भारत में हाल के समय में मंदी का संकट गहराता जा रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि बैंकों पर फंसे कर्ज का संकट (एनपीए) बढ़ता जा रहा है। कई बड़ी कंपनियों ने लोन चुकाया नहीं है, जिससे बैंकों का घाटा लगातार बढ़ता जा रहा है। भारत में भी यही स्थिति है। यहां 2017 में जो संपत्ति बनी उसका 73 फीसदी हिस्सा केवल एक फीसदी लोगों के पास थी। देश की आधी आबादी को सिर्फ 1% हिस्सा मिला। 

अभी भी खतरा है बरकरार

हालांकि इस आर्थिक मंदी के बाद भी खतरा बरकरार है। डाओ जोंस मार्च 2009 के बाद चार गुणा बढ़ चुका है। वहीं रेटिंग एजेंसी के बाजार पर आज भी पूरे विश्व में केवल 3 कंपनियों का कब्जा है। यह तीन कंपनियां ही रेटिंग व्यापार में प्रत्येक 10 डॉलर में से 9 डॉलर कमा रही हैं।

एक साल पहले भी अमेरिका के 10 बड़े बैंकों के पास आधी से ज्यादा संपत्ति थी और वो आज भी है। वहीं राष्ट्रपति ट्रंप भी 2010 में बने उस कानून को खत्म करने पर लगे हैं, जिसको इस मंदी के बाद लागू किया गया था। 

अमेरिका ने शुरू किया व्यापार युद्ध

अमेरिका ने भारत और चीन सहित कई देशों से आयातित होने वाले सामान पर अतिरिक्त ड्यूटी लगाने का फैसला किया है। वहीं ईरान जैसे देश पर आर्थिक प्रतिबंध लगाने से वहां से पेट्रोल भी आयात नहीं हो पाएगा। इससे कई देशों से अमेरिका का व्यापार युद्ध होने की आशंका फिर से दिखने लगी है। अगर व्यापार युद्ध होता है तो यह कुछ-कुछ फिर से विश्व को आर्थिक मंदी की और ले जाएगा। 

अमेरिका को लगा था तब इतना झटका

10 साल पहले आर्थिक मंदी के दौरान अमेरिका की अर्थव्यवस्था को 6 से 14 ट्रिलियन डॉलर को नुकसान हुआ था इसके साथ ही देश के दो सबसे बड़े बैंक भी पूरी तरह से दिवालिया होकर समाप्त हो गए थे। 

बैंकिंग सेक्टर में पुरुषों का वर्चस्व

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अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की एमडी क्रिस्टीन लेगार्ड ने एक चेतावनी भरा ब्लॉग लिखा है। उन्होंने कहा है कि हालत अभी भी सुधरे नहीं हैं क्योंकि बैंकिंग सेक्टर में अभी भी पुरुषों का वर्चस्व है। बैंकिंग सेक्टर में अभी भी बड़े सुधार करने की जरुरत है। इस मंदी की उपज तो अमेरिका में हुई थी, लेकिन इसका असर पूरी दुनिया में 2-3 सालों तक देखने को मिला था। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या 10 साल बाद भी ऐसी आर्थिक मंदी होने का खतरा बरकरार है या नहीं। 

लीमैन सिस्टर्स होती तो न होती मंदी

लेगार्ड ने अपने ब्लॉग में लिखा कि कही 2008 में अगर अमेरिका में लीमैन ब्रदर्स की जगह लीमैन सिस्टर्स होती तो फिर आर्थिक मंदी नहीं होती। अभी भी ब्रिटेन के चार दिग्गज बैंकों के सीईओ पुरुष हैं। वहीं, एफटीएसई में शामिल 100 बड़ी कंपनियों के बोर्ड में महिला डायरेक्टरों का अनुपात गिरता जा रहा है। कॉरपोरेट सेक्टर में भी महिलाओं की लीडरशिप उल्लेखनीय नहीं है। 

फॉर्चून 500 कंपनियों में सिर्फ 24 महिला सीईओ 

फॉर्चून 500 कंपनियों में 2018 तक सिर्फ 24 महिला सीईओ रह गई हैं। 2017 में इनकी संख्या 32 थी यानी इनकी संख्या में 25% की कमी आई है। फॉर्चून 500 कंपनियों में महिला नेतृत्व वाली कंपनियां एक दशक में बढ़कर 6.4% हुई है। 10 साल पहले ऐसी कंपनियों की हिस्सेदारी 2.6% ही थी।

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