Mutual Fund: म्यूचुअल फंड में लावारिस पड़े हैं ₹3,811 करोड़, क्या आपका पैसा भी तो नहीं फंसा है? जानिए सबकुछ
म्यूचुअल फंड में पड़ा लावारिस पैसा बढ़ता जा रहा है। सेबी की वार्षिक रिपोर्ट 2025-26 के अनुसार अनक्लेम्ड डिविडेंड 15.7% बढ़कर ₹2,689 करोड़ हुआ। जानिए अपना फंसा पैसा वापस पाने के लिए सेबी और सरकार के बड़े कदम।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
भारतीय शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड में निवेश का क्रेज देश में तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन इसके साथ ही एक बड़ी चिंताजनक तस्वीर भी सामने आई है। देश के लाखों निवेशकों का करोड़ों रुपया म्यूचुअल फंड कंपनियों के पास लावारिस पड़ा है। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) की वार्षिक रिपोर्ट 2025-26 के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 के अंत तक म्यूचुअल फंडों के पास लावारिस पड़े लाभांश की राशि में 15.7 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह आंकड़ा अब बढ़कर ₹2,689 करोड़ पर पहुंच गया है। जब देश में निवेश की इतनी मजबूत लहर चल रही हो, तब निवेशकों की गाढ़ी कमाई का इस तरह लावारिस पड़े रहना भारतीय वित्तीय साक्षरता और निवेशकों की सजगता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
आंकड़े क्या कहते हैं और कितनी बढ़ी है यह लावारिस रकम?
सेबी की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024-25 के अंत में म्यूचुअल फंडों के पास कुल ₹2,324 करोड़ का लाभांश लावारिस था, जो अब ₹365 करोड़ की बढ़ोतरी के साथ ₹2,689 करोड़ हो गया है। हालांकि, इस दौरान लावारिस रिडेम्पशन यानी मैच्योरिटी के बाद वापस ली जाने वाली राशि में मामूली कमी जरूर आई है। यह राशि 0.5 प्रतिशत की मामूली गिरावट के साथ ₹1,128 करोड़ से घटकर ₹1,122 करोड़ रह गई है। यदि हम लावारिस लाभांश और लावारिस रिडेम्पशन दोनों को मिला दें, तो 31 मार्च 2026 तक म्यूचुअल फंड में कुल लावारिस पड़ी रकम ₹3,811 करोड़ दर्ज की गई है, जो इससे पिछले वित्त वर्ष में ₹3,452 करोड़ थी।
लावारिस पड़े पैसों को निवेशकों तक पहुंचाने के लिए सेबी क्या कदम उठा रहा है?
इतनी बड़ी रकम को उसके असली मालिकों तक पहुंचाने के लिए नियामक संस्था सेबी ने अपनी सक्रियता काफी बढ़ा दी है। सेबी अब उन तकनीकों और नियमों पर काम कर रहा है जिससे निवेशक या उनके नामांकित व्यक्ति आसानी से अपनी होल्डिंग तक पहुंच सकें। सेबी ने इसके लिए दो प्रमुख डिजिटल सुधार किए हैं:
- डिजिलॉकर एकीकरण: सेबी ने म्यूचुअल फंड और डीमैट होल्डिंग्स को डिजिलॉकर के साथ जोड़ने की सुविधा दी है। इससे निवेशक अपनी सभी म्यूचुअल फंड और डीमैट से जुड़ी जानकारी एक ही प्लेटफॉर्म पर देख सकते हैं।
- नामांकित व्यक्ति के लिए केंद्रीय तंत्र: यदि किसी निवेशक की मृत्यु हो जाती है, तो उनके नामांकित व्यक्ति को अब अलग-अलग फंड हाउस के चक्कर नहीं काटने होंगे। वे केवाईसी पंजीकरण एजेंसी के पास सिर्फ एक बार मृत्यु की सूचना दर्ज कराएंगे, और यह जानकारी सभी मध्यस्थों के पास अपने आप अपडेट हो जाएगी।
क्या है 'निवेशक शिविर' और आम लोगों को इससे क्या मदद मिल रही है?
वित्तीय साक्षरता बढ़ाने और निवेशकों को उनका हक दिलाने के लिए सेबी और इन्वेस्टर एजुकेशन एंड प्रोटेक्शन फंड अथॉरिटी (आईईपीएफए) ने मिलकर 'निवेशक शिविर' पहल की शुरुआत की है. इसके तहत निवेशकों को निम्नलिखित व्यावहारिक सहायता दी जा रही है:
- IEPF-5 फॉर्म भरना: इस फॉर्म को भरकर निवेशक कंपनियों से अपने अनक्लेम्ड शेयर और लाभांश वापस पा सकते हैं।
- सिक्योरिटीज का डिमैटेरियलाइजेशन: फिजिकल सर्टिफिकेट्स को डिजिटल (डीमैट) में बदलने में मदद की जा रही है।
- केवाईसी और नामांकन विवरण: निवेशकों के केवाईसी और नॉमिनी विवरणों को अपडेट करने की प्रक्रिया को आसान बनाया जा रहा है।
वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान पुणे, हैदराबाद, अमृतसर, जयपुर, बेंगलुरु और भुवनेश्वर जैसे छह बड़े शहरों में इन निवेशक शिविरों का आयोजन किया गया। इसके अतिरिक्त, छह राज्यों में समर्पित सेवा केंद्र भी चालू किए गए हैं ताकि निवेशकों को स्थानीय स्तर पर मदद मिल सके।
म्यूचुअल फंड में लावारिस पड़े ये ₹2,689 करोड़ सिर्फ म्यूचुअल फंड लाभांश से जुड़े हैं, न कि लिस्टेड कंपनियों के कुल लावारिस लाभांश से। यह रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि डिजिटल बदलावों के बावजूद निवेशकों के स्तर पर केवाईसी और नॉमिनेशन डिटेल्स को अपडेट रखने की सुस्ती बनी हुई है। निवेशकों को चाहिए कि वे अपने निवेश पोर्टफोलियो को लगातार ट्रैक करें और नॉमिनी का नाम दर्ज करना न भूलें, ताकि उनकी गाढ़ी कमाई उनके परिवार के सुरक्षित भविष्य के काम आ सके।