फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   Trump Gains Leverage India 100pc Tariff Threat Oil Purchases from Russia and Iran know Plan of US Lawmakers

ट्रंप को मिली ताकत: रूस-ईरान से तेल खरीद पर भारत पर 100% टैरिफ का खतरा, क्या है US के सांसदों की नई रणनीति?

Sat, 08 Aug 2026 05:38 AM IST
ज्योति भास्कर एजेंसी, वॉशिंगटन।
एजेंसी, वॉशिंगटन। Published by: ज्योति भास्कर Updated Sat, 08 Aug 2026 05:38 AM IST
सार

कई देशों पर टैरिफ लगाने को लेकर अपने दूसरे कार्यकाल में लगातार चर्चा में रहे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर सुर्खियों में हैं। दरअसल, सीनेट से पारित एक विधेयक के बाद ट्रंप को नई ताकत मिलने का अनुमान है। अगर अमेरिकी संसद के दूसरे सदन- कांग्रेस से भी इस बिल को मंजूरी मिल जाती है तो अमेरिका रूस-ईरान से तेल खरीद पर भारत पर 100% टैरिफ लगा सकता है। खास बात है कि इस विधेयक पर रिपब्लिकन और डेमोक्रेट खेमा एकमत दिखा। क्या है US के सांसदों की नई रणनीति? जानिए इस खबर में

विज्ञापन
Trump Gains Leverage India 100pc Tariff Threat Oil Purchases from Russia and Iran know Plan of US Lawmakers
अमेरिका में ही ट्रंप की टैरिफ नीति का विरोध (फाइल) - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

अमेरिकी सीनेट ने रूस और ईरान से तेल खरीदने वाले देशों पर 100 टैरिफ लगाने का अमेरिकी राष्ट्रपति को अधिकार देने वाला बिल शुक्रवार को पास कर दिया। सीनेट ने बिल पर 11 के मुकाबले 86 मतों से मुहर लगाई। अब इसे अमेरिकी हाउस (कांग्रेस) में पेश किया जाएगा। मंजूरी मिलने के बाद ट्रंप को भारत, चीन जैसे देशों के खिलाफ 100 फीसदी टैरिफ लगाने का अधिकार मिल जाएगा। कानून बनने के बाद इसके तहत रूसी अधिकारियों पर प्रतिबंध लगाए जाएंगे।

विज्ञापन


क्या है ऐसे विधेयक का मकसद, क्या बदलेंगे भू-राजनीतिक समीकरण?
खास बात यह है कि इस बिल को रिपब्लिकन व डेमोक्रेट दोनों पार्टियों का समर्थन मिला। इसका मकसद मॉस्को व तेहरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाना है। साथ ही, यह उन देशों को भी निशाना बनाता है, जो तेल-गैस खरीद के जरिये रूस के युद्ध प्रयासों को आर्थिक मदद जारी रखे हुए हैं।
विज्ञापन


सीनेट से पारित विधेयक कितना असरदार?
  • रूसी सरकार के शीर्ष अधिकारियों पर अनिवार्य प्रतिबंध लगाए जाएंगे। इनमें रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी शामिल हैं।
  • रूसी वित्तीय संस्थानों और रूसी ऊर्जा परियोजनाओं पर प्रतिबंध लगाने की तैयारी।
  • रूसी कुलीन वर्ग, सरकारी उद्यम और रूस के रक्षा उद्योग का समर्थन करने वाली विदेशी कंपनियां भी दायरे में होंगी।
  • रूस से कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस खरीदने वाले शीर्ष पांच देशों पर 100 फीसदी तक का शुल्क लगाएगा। इन देशों में चीन और भारत भी शामिल हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
  • शुल्क का स्तर अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर तय करेंगे।
  • विधेयक में राष्ट्रपति के लिए छूट देने का अधिकार भी शामिल, इसके तहत व्हाइट हाउस के पास प्रतिबंधों या पाबंदियों को माफ करने का अधिकार।
  • माफी के लिए राष्ट्रपति को कांग्रेस में प्रमाणित करना होगा कि छूट राष्ट्रीय हित में है।
  • उन देशों को छूट मिलेगी जो रूस के कुल प्राकृतिक गैस निर्यात का 15 फीसदी से कम आयात करते हैं। उन्हें भी छूट मिलेगी जो देश जो रूसी प्राकृतिक गैस के उपयोग को कम करने के लिए काम कर रहे हैं।
क्यों खास है ग्राहम के नाम से जुड़ा विधेयक, निधन के बाद सफलता!
बिल का नाम दिवंगत रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम के सम्मान में रखा गया है, जो इस कानून को बनाने वाले मुख्य लोगों में से एक थे। बिल को सबसे पहले एक अप्रैल 2025 को पेश किया गया था। जुलाई के दूसरे सप्ताह में ग्राहम का 71 साल की आयु में निधन हो गया। अब इसे उनके संघर्ष की जीत की तरह भी पेश किया जा रहा है।


ये भी पढ़ें- रूस पर US लगाएगा प्रतिबंध: सीनेट में ग्राहम को बड़ी सफलता, बिल 86-11 के बहुमत से मंजूर; यूक्रेन को क्या लाभ?

ट्रंप ने शुरुआत में किया था विरोध, अब क्या करेंगे?
सीनेट के रिपब्लिकन नेताओं ने इस बिल को वोटिंग के लिए पेश नहीं किया था क्योंकि ट्रंप ने शुरू में इसका विरोध किया था। ट्रंप ने जनवरी, 2025 में अपना दूसरा कार्यकाल शुरू होने के बाद से ही प्रतिबंधों से जुड़े फैसले कांग्रेस के बजाय व्हाइट हाउस में बैठकर किए थे।

कांग्रेस से मंजूरी की राह आसान नहीं...कुछ सांसद विरोध में 
रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाने के लिए बड़े पैमाने पर समर्थन होने के बावजूद, हो सकता है कि इसे हाउस से मंजूरी न मिल पाए। कुछ सांसदों को चिंता है कि ट्रंप को टैरिफ से जुड़े नए अधिकार मिलने से अमेरिकी आयातकों और ग्राहकों के लिए लागत बढ़ सकती है, साथ ही रिपब्लिकन पार्टी को राजनीतिक नुकसान भी उठाना पड़ सकता है। न्यूयॉर्क के ग्रेगरी मीक्स और वर्जीनिया के डॉन बेयर ने एक बयान में कहा, मुझे ट्रंप को टैरिफ से जुड़े अधिकार देने को लेकर अब भी बुनियादी चिंताएं हैं। ट्रंप ने इन अधिकारों को विदेश नीति के अपने अमेरिका फर्स्ट नजरिए का अहम हिस्सा बनाया है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed