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अपहरण, भूख और मौत: नाइजीरिया में छह महीने बाद आतंकियों की कैद से छूटे 163 लोग, आपबीती सुन कांप जाएगी रूह
Sat, 08 Aug 2026 05:58 PM IST
Devesh Tripathi
पीटीआई, इलोरिन
पीटीआई, इलोरिन
Published by: Devesh Tripathi
Updated Sat, 08 Aug 2026 05:58 PM IST
सार
नाइजीरिया में सुरक्षा बलों ने लंबे समय से जिहादी समूहों के कब्जे में रहे सैकड़ों लोगों को मुक्त कराया है। इनमें बड़ी संख्या महिलाओं और बच्चों की है, जिन्होंने कैद के दौरान भूख, बीमारी, हिंसा और मौत का सामना किया। कुछ पीड़ितों ने बताया कि उन्हें मृत बंधकों को दफनाने के लिए मजबूर किया जाता था।
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नाइजीरिया में कई बंधक हुए मुक्त
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स/ANI
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विस्तार
नाइजीरिया में जिहादी आतंकियों की कैद से छह महीने बाद मुक्त हुए 163 लोगों ने अपने डर और दर्दनाक अनुभव साझा किए हैं। इनमें ज्यादातर महिलाएं और बच्चे हैं। इस सप्ताह नाइजीरियाई सुरक्षा बलों ने 300 से अधिक अपहृत लोगों को मुक्त कराया है।
मुक्त कराए गए 163 लोगों को शुक्रवार को क्वारा राज्य की राजधानी इलोरिन में सुरक्षा बलों ने अधिकारियों को सौंपा। उन्हें इलाज और जरूरी स्वास्थ्य जांच के लिए अस्पताल ले जाया गया। ये लोग अब अपने परिवारों से मिलने और घर लौटने का इंतजार कर रहे हैं।
बंधकों ने सुनाई आपबीती
44 वर्षीय मैरी इशाया ने बताया कि उन्हें कई दिनों तक खाना नहीं मिला। उन्होंने कहा कि कैद के दौरान उन्हें अन्य बंधकों के साथ उन लोगों को दफनाने के लिए कहा जाता था, जिनकी मौत हो गई थी। उन्होंने कहा, "मैं अब भी यह बताने के लिए सही शब्द नहीं खोज पा रही हूं कि हमारे साथ क्या हुआ। हमने मौत और दर्द देखा।"
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फरवरी में गांव पर हुआ था हमला
इन लोगों का तीन फरवरी को अपहरण किया गया था। उस दिन जिहादी आतंकियों ने वोरो गांव पर हमला कर 160 से अधिक लोगों की हत्या कर दी थी। अस्पताल में इलाज करा रहे मुक्त बंधक बेहद कमजोर नजर आए। कई लोग फर्श पर लेटे थे और मुश्किल से खड़े हो पा रहे थे। कुछ लोगों के शरीर पर चोट के निशान थे, जबकि कई लोग इस घटना के मानसिक असर से जूझ रहे थे।
कुछ महिलाओं को अस्पताल में पता चला कि फरवरी में हुए हमले में उनके पति भी मारे गए थे। कुछ बंधकों ने बताया कि उन्होंने घर लौटने की उम्मीद तक छोड़ दी थी। उन्होंने बताया कि कई लोग बीमार पड़ गए थे। बारिश में उन्हें भीगना पड़ता था। जब नाइजीरियाई सेना के हेलीकॉप्टर जंगल में बने ठिकानों के ऊपर से उड़ते थे तो अपहरणकर्ता उन्हें छिप जाने के लिए कहते थे।
अमेरिका से मिली सैन्य सहायता
फरवरी में हुआ हमला हाल के वर्षों में नाइजीरिया के सबसे घातक हमलों में से एक था। इससे यह भी सामने आया कि पहले उत्तर क्षेत्र तक सीमित रहने वाले जिहादी अब अफ्रीका के सबसे अधिक आबादी वाले देश के दक्षिणी हिस्सों की ओर बढ़ रहे हैं।
ऐसे इलाकों में गिरोह गांवों में क्षेत्र और प्राकृतिक संसाधनों पर नियंत्रण के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं। इन इलाकों में कई बार सशस्त्र समूहों की संख्या देश के सीमित सुरक्षा बलों से अधिक होती है। अमेरिका एक समझौते के तहत नाइजीरिया को सैन्य सहायता दे रहा है। अमेरिका का कहना है कि इसका उद्देश्य नाइजीरियाई ईसाइयों की सुरक्षा में मदद करना है। इस सहायता का बड़ा हिस्सा हिंसा प्रभावित उत्तरी क्षेत्रों में रसद और खुफिया जानकारी जुटाने तक सीमित है।
नाइजीरिया का अब तक का सबसे बड़ा बचाव अभियान
नाइजीरिया में बड़े पैमाने पर अपहरण देश की सुरक्षा समस्याओं की पहचान बन चुके हैं। इनमें स्कूली बच्चों को भी निशाना बनाया जाता है। मुस्लिम बहुल वोरो के इन पीड़ितों को इस सप्ताह मुक्त कराया गया। उनके साथ पड़ोसी नाइजर राज्य से अपहरण किए गए 145 अन्य लोगों को भी बचाया गया।
स्थानीय अधिकारियों ने यह नहीं बताया कि घने और विशाल काइनजी झील राष्ट्रीय उद्यान के जंगल से बंधकों को कैसे बचाया गया। नाइजीरिया के राष्ट्रपति बोला टिनूबू ने इसे एक दिन में चलाया गया "अब तक का सबसे बड़ा बचाव अभियान" बताया। उन्होंने सशस्त्र गिरोहों के खिलाफ अभियान और तेज करने का वादा किया।
सेना में भर्ती और वेतन बढ़ाने की तैयारी
नाइजीरिया में कुछ जिहादी समूह उन इलाकों में खुद को सरकार के विकल्प के रूप में पेश करते हैं, जहां सरकारी और सुरक्षा बलों की मौजूदगी सीमित है। देश की एक बड़ी समस्या सुरक्षा बलों की खराब स्थिति भी है। सुरक्षा बलों पर काम का दबाव अधिक है और उन्हें कम वेतन मिलता है। राष्ट्रपति टिनूबू ने हाल में सैन्यकर्मियों के वेतन में बढ़ोतरी और सेना में बड़े पैमाने पर भर्ती की घोषणा कर इस समस्या को दूर करने की कोशिश की है।
वैश्विक जोखिम सलाहकार कंपनी अफ्रीका प्रैक्टिस की वरिष्ठ विश्लेषक सेकनात ओजेनियी के अनुसार, सरकार को केवल हमलों के बाद कार्रवाई करने के बजाय खुफिया जानकारी के आधार पर हमलों को रोकने के तरीके तलाशने चाहिए। ओजेनियी ने कहा, "अब समय आ गया है कि हम फिर से जांचें कि हमारा सुरक्षा तंत्र हमलों को रोकने के लिए कितना काम कर रहा है।"
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मुक्त कराए गए 163 लोगों को शुक्रवार को क्वारा राज्य की राजधानी इलोरिन में सुरक्षा बलों ने अधिकारियों को सौंपा। उन्हें इलाज और जरूरी स्वास्थ्य जांच के लिए अस्पताल ले जाया गया। ये लोग अब अपने परिवारों से मिलने और घर लौटने का इंतजार कर रहे हैं।
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बंधकों ने सुनाई आपबीती
44 वर्षीय मैरी इशाया ने बताया कि उन्हें कई दिनों तक खाना नहीं मिला। उन्होंने कहा कि कैद के दौरान उन्हें अन्य बंधकों के साथ उन लोगों को दफनाने के लिए कहा जाता था, जिनकी मौत हो गई थी। उन्होंने कहा, "मैं अब भी यह बताने के लिए सही शब्द नहीं खोज पा रही हूं कि हमारे साथ क्या हुआ। हमने मौत और दर्द देखा।"
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फरवरी में गांव पर हुआ था हमला
इन लोगों का तीन फरवरी को अपहरण किया गया था। उस दिन जिहादी आतंकियों ने वोरो गांव पर हमला कर 160 से अधिक लोगों की हत्या कर दी थी। अस्पताल में इलाज करा रहे मुक्त बंधक बेहद कमजोर नजर आए। कई लोग फर्श पर लेटे थे और मुश्किल से खड़े हो पा रहे थे। कुछ लोगों के शरीर पर चोट के निशान थे, जबकि कई लोग इस घटना के मानसिक असर से जूझ रहे थे।
कुछ महिलाओं को अस्पताल में पता चला कि फरवरी में हुए हमले में उनके पति भी मारे गए थे। कुछ बंधकों ने बताया कि उन्होंने घर लौटने की उम्मीद तक छोड़ दी थी। उन्होंने बताया कि कई लोग बीमार पड़ गए थे। बारिश में उन्हें भीगना पड़ता था। जब नाइजीरियाई सेना के हेलीकॉप्टर जंगल में बने ठिकानों के ऊपर से उड़ते थे तो अपहरणकर्ता उन्हें छिप जाने के लिए कहते थे।
अमेरिका से मिली सैन्य सहायता
फरवरी में हुआ हमला हाल के वर्षों में नाइजीरिया के सबसे घातक हमलों में से एक था। इससे यह भी सामने आया कि पहले उत्तर क्षेत्र तक सीमित रहने वाले जिहादी अब अफ्रीका के सबसे अधिक आबादी वाले देश के दक्षिणी हिस्सों की ओर बढ़ रहे हैं।
ऐसे इलाकों में गिरोह गांवों में क्षेत्र और प्राकृतिक संसाधनों पर नियंत्रण के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं। इन इलाकों में कई बार सशस्त्र समूहों की संख्या देश के सीमित सुरक्षा बलों से अधिक होती है। अमेरिका एक समझौते के तहत नाइजीरिया को सैन्य सहायता दे रहा है। अमेरिका का कहना है कि इसका उद्देश्य नाइजीरियाई ईसाइयों की सुरक्षा में मदद करना है। इस सहायता का बड़ा हिस्सा हिंसा प्रभावित उत्तरी क्षेत्रों में रसद और खुफिया जानकारी जुटाने तक सीमित है।
नाइजीरिया का अब तक का सबसे बड़ा बचाव अभियान
नाइजीरिया में बड़े पैमाने पर अपहरण देश की सुरक्षा समस्याओं की पहचान बन चुके हैं। इनमें स्कूली बच्चों को भी निशाना बनाया जाता है। मुस्लिम बहुल वोरो के इन पीड़ितों को इस सप्ताह मुक्त कराया गया। उनके साथ पड़ोसी नाइजर राज्य से अपहरण किए गए 145 अन्य लोगों को भी बचाया गया।
स्थानीय अधिकारियों ने यह नहीं बताया कि घने और विशाल काइनजी झील राष्ट्रीय उद्यान के जंगल से बंधकों को कैसे बचाया गया। नाइजीरिया के राष्ट्रपति बोला टिनूबू ने इसे एक दिन में चलाया गया "अब तक का सबसे बड़ा बचाव अभियान" बताया। उन्होंने सशस्त्र गिरोहों के खिलाफ अभियान और तेज करने का वादा किया।
सेना में भर्ती और वेतन बढ़ाने की तैयारी
नाइजीरिया में कुछ जिहादी समूह उन इलाकों में खुद को सरकार के विकल्प के रूप में पेश करते हैं, जहां सरकारी और सुरक्षा बलों की मौजूदगी सीमित है। देश की एक बड़ी समस्या सुरक्षा बलों की खराब स्थिति भी है। सुरक्षा बलों पर काम का दबाव अधिक है और उन्हें कम वेतन मिलता है। राष्ट्रपति टिनूबू ने हाल में सैन्यकर्मियों के वेतन में बढ़ोतरी और सेना में बड़े पैमाने पर भर्ती की घोषणा कर इस समस्या को दूर करने की कोशिश की है।
वैश्विक जोखिम सलाहकार कंपनी अफ्रीका प्रैक्टिस की वरिष्ठ विश्लेषक सेकनात ओजेनियी के अनुसार, सरकार को केवल हमलों के बाद कार्रवाई करने के बजाय खुफिया जानकारी के आधार पर हमलों को रोकने के तरीके तलाशने चाहिए। ओजेनियी ने कहा, "अब समय आ गया है कि हम फिर से जांचें कि हमारा सुरक्षा तंत्र हमलों को रोकने के लिए कितना काम कर रहा है।"