{"_id":"6a7752f63a176650ca05539e","slug":"balochistan-forced-disappearances-four-youths-pakistan-security-forces-extrajudicially-killing-2026-08-08","type":"story","status":"publish","title_hn":"बलूचिस्तान: चार नागरिकों की गुमशुदगी पर उठे सवाल, मानवाधिकार संगठन ने पाकिस्तानी बलों पर लगाए क्या आरोप?","category":{"title":"World","title_hn":"दुनिया","slug":"world"}}
बलूचिस्तान: चार नागरिकों की गुमशुदगी पर उठे सवाल, मानवाधिकार संगठन ने पाकिस्तानी बलों पर लगाए क्या आरोप?
Sat, 08 Aug 2026 09:32 PM IST
Devesh Tripathi
आईएएनएस, क्वेटा
आईएएनएस, क्वेटा
Published by: Devesh Tripathi
Updated Sat, 08 Aug 2026 09:32 PM IST
सार
बलूचिस्तान में जबरन गुमशुदगी के नए मामलों ने मानवाधिकारों को लेकर चिंता बढ़ाई है। एक संगठन के अनुसार केच जिले में छापेमारी के बाद चार युवकों को सुरक्षा बलों ने हिरासत में लिया और तब से उनके बारे में जानकारी नहीं मिली है। संगठन ने उनकी सुरक्षा और कानूनी प्रक्रिया सुनिश्चित करने की मांग की है।
विज्ञापन
बलूचिस्तान में चार युवकों को सेना ने किया जबरन गायब
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स/IANS
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
पाकिस्तान के बलूचिस्तान में चार और बलूच नागरिकों को पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा जबरन गायब किए जाने का आरोप लगाया गया है। एक प्रमुख मानवाधिकार संगठन ने शनिवार को यह दावा किया। बलूच नेशनल मूवमेंट के मानवाधिकार विभाग पांक ने घटना की निंदा करते हुए कहा कि चारों लोगों को पाकिस्तान के फ्रंटियर कॉर्प्स और सैन्य खुफिया विभाग के जवानों ने अगवा किया।
संगठन के अनुसार, 6 अगस्त को केच जिले के बिट बुलेदा इलाके में उनके घरों पर छापेमारी के दौरान चारों को हिरासत में लिया गया और इसके बाद से उनका कोई पता नहीं है। पीड़ितों की पहचान 18 वर्षीय यासिर, 21 वर्षीय शम्स उर रहमान, 24 वर्षीय सैफुल्लाह और 20 वर्षीय शे हक के रूप में हुई है।
बलूचिस्तान में कौन कर रहा लोगों को अगवा?
पांक ने कहा, "उनके अपहरण के बाद से उनके ठिकाने का पता नहीं चल पाया है। इससे उनके परिवारों को भारी परेशानी और चिंता का सामना करना पड़ रहा है।" मानवाधिकार संगठन ने बलूचिस्तान में जबरन गुमशुदगी के लगातार सामने आ रहे मामलों पर गंभीर चिंता जताई। संगठन के अनुसार, लोगों को कानूनी प्रक्रिया के बिना हिरासत में लिया जाता है और परिवारों को उनके प्रियजनों की स्थिति और ठिकाने की जानकारी नहीं दी जाती।
विज्ञापन
संगठन ने कहा, "इस तरह की कार्रवाइयां मौलिक मानवाधिकारों और अंतरराष्ट्रीय कानूनी दायित्वों का गंभीर उल्लंघन हैं।" पांक ने पाकिस्तानी अधिकारियों से चारों लापता बलूच युवकों के ठिकाने की तत्काल जानकारी देने और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की। संगठन ने कहा कि उन्हें बिना देरी रिहा किया जाए या उचित कानूनी प्रक्रिया के तहत अदालत में पेश किया जाए।
संयुक्त राष्ट्र से की क्या अपील?
संगठन ने संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार तंत्र समेत राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों से भी मामले का तत्काल संज्ञान लेने की अपील की। उसने बलूचिस्तान में मानवाधिकारों के उल्लंघन के बीच इस्लामाबाद से जवाबदेही और न्याय सुनिश्चित करने के लिए दबाव बनाने का आग्रह किया।
पाकिस्तानी सेना पर लगा हत्या का भी आरोप
इस बीच, बलूचिस्तान में नागरिकों के खिलाफ कथित अत्याचारों का जिक्र करते हुए बलूच छात्र संगठन (बीएसओ)-आजाद ने एक अन्य घटना का दावा किया। संगठन के अनुसार, शनिवार को प्रांत के हब चौकी इलाके में सकुरान रोड पर गरीबाबाद के पास 80 वर्षीय हैबतां बलूच का क्षत-विक्षत शव मिला।
बीएसओ ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा, "80 वर्षीय बुजुर्ग हैबतां बलूच, मालो मर्री के बेटे और बेला के निवासी थे। उन्हें 9 जुलाई 2026 को बेला क्रॉस से जबरन गायब कर दिया गया था। करीब एक महीने बाद उनका क्षत-विक्षत शव हब चौकी के सकुरान रोड पर गरीबाबाद के पास फेंका हुआ मिला। पाकिस्तानी राज्य 'मारो और फेंक दो' के जरिए बलूचिस्तान में अपना अपराध जारी रखे हुए है।"
विज्ञापन
संगठन के अनुसार, 6 अगस्त को केच जिले के बिट बुलेदा इलाके में उनके घरों पर छापेमारी के दौरान चारों को हिरासत में लिया गया और इसके बाद से उनका कोई पता नहीं है। पीड़ितों की पहचान 18 वर्षीय यासिर, 21 वर्षीय शम्स उर रहमान, 24 वर्षीय सैफुल्लाह और 20 वर्षीय शे हक के रूप में हुई है।
विज्ञापन
बलूचिस्तान में कौन कर रहा लोगों को अगवा?
पांक ने कहा, "उनके अपहरण के बाद से उनके ठिकाने का पता नहीं चल पाया है। इससे उनके परिवारों को भारी परेशानी और चिंता का सामना करना पड़ रहा है।" मानवाधिकार संगठन ने बलूचिस्तान में जबरन गुमशुदगी के लगातार सामने आ रहे मामलों पर गंभीर चिंता जताई। संगठन के अनुसार, लोगों को कानूनी प्रक्रिया के बिना हिरासत में लिया जाता है और परिवारों को उनके प्रियजनों की स्थिति और ठिकाने की जानकारी नहीं दी जाती।
विज्ञापन
संगठन ने कहा, "इस तरह की कार्रवाइयां मौलिक मानवाधिकारों और अंतरराष्ट्रीय कानूनी दायित्वों का गंभीर उल्लंघन हैं।" पांक ने पाकिस्तानी अधिकारियों से चारों लापता बलूच युवकों के ठिकाने की तत्काल जानकारी देने और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की। संगठन ने कहा कि उन्हें बिना देरी रिहा किया जाए या उचित कानूनी प्रक्रिया के तहत अदालत में पेश किया जाए।
संयुक्त राष्ट्र से की क्या अपील?
संगठन ने संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार तंत्र समेत राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों से भी मामले का तत्काल संज्ञान लेने की अपील की। उसने बलूचिस्तान में मानवाधिकारों के उल्लंघन के बीच इस्लामाबाद से जवाबदेही और न्याय सुनिश्चित करने के लिए दबाव बनाने का आग्रह किया।
पाकिस्तानी सेना पर लगा हत्या का भी आरोप
इस बीच, बलूचिस्तान में नागरिकों के खिलाफ कथित अत्याचारों का जिक्र करते हुए बलूच छात्र संगठन (बीएसओ)-आजाद ने एक अन्य घटना का दावा किया। संगठन के अनुसार, शनिवार को प्रांत के हब चौकी इलाके में सकुरान रोड पर गरीबाबाद के पास 80 वर्षीय हैबतां बलूच का क्षत-विक्षत शव मिला।
बीएसओ ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा, "80 वर्षीय बुजुर्ग हैबतां बलूच, मालो मर्री के बेटे और बेला के निवासी थे। उन्हें 9 जुलाई 2026 को बेला क्रॉस से जबरन गायब कर दिया गया था। करीब एक महीने बाद उनका क्षत-विक्षत शव हब चौकी के सकुरान रोड पर गरीबाबाद के पास फेंका हुआ मिला। पाकिस्तानी राज्य 'मारो और फेंक दो' के जरिए बलूचिस्तान में अपना अपराध जारी रखे हुए है।"