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जर्मनी के सैन्य ठिकाने पर मंडराए ड्रोन: रची जा रही बड़े हमले की साजिश, या निशाने पर है नाटो का आपूर्ति मार्ग?
Sat, 08 Aug 2026 08:59 PM IST
राकेश कुमार
पीटीआई, बर्लिन।
पीटीआई, बर्लिन।
Published by: राकेश कुमार
Updated Sat, 08 Aug 2026 08:59 PM IST
सार
जर्मनी के प्रमुख कारगो एयरपोर्ट पर विस्फोटक से लदा ड्रोन मिलने के बाद अब सैन्य बेस के ऊपर दो संदिग्ध ड्रोन मंडराते देखे गए हैं। नाटो के रणनीतिक एयर बेस और यूक्रेन के आपूर्ति मार्ग के पास हुई इन घटनाओं से सुरक्षा एजेंसियां बेहद चौकस हो गई हैं। पुलिस और सेना ने मामले की गहन जांच शुरू कर दी है।
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जर्मनी में देखे गए संदिग्ध ड्रोन
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
जर्मनी में एक बार फिर संदिग्ध ड्रोन उड़ने से हड़कंप मच गया है। कारगो एयरपोर्ट पर विस्फोटकों से भरा ड्रोन मिलने के महज दो दिन बाद अब देश के एक प्रमुख सैन्य ठिकाने के ऊपर दो संदिग्ध ड्रोन उड़ते देखे गए हैं। जर्मन सशस्त्र बलों ने शनिवार को इस पूरी घटना की आधिकारिक जानकारी दी है।
क्या जर्मन सैन्य ठिकाने की हो रही थी जासूसी?
जर्मन जॉइंट फोर्स कमांड के बयान के अनुसार, पश्चिमी जर्मनी के मेचेरनिच में स्थित बुंडेसवेहर (जर्मन सेना) बेस पर सुरक्षा कर्मियों ने गुरुवार रात करीब 10 बजे दो ड्रोन उड़ते देखे। ड्रोनों की मौजूदगी की पुष्टि होते ही तुरंत मौके पर मिलिट्री पुलिस की टीमें तैनात कर दी गईं। युसकिरचेन पुलिस विभाग ने इस मामले की आपराधिक जांच शुरू कर दी है। हालांकि, पुलिस और सेना ने अभी तक सुरक्षा कारणों से अधिक जानकारी साझा नहीं की है।
आखिर कितना बड़ा है खतरा?
सैन्य बेस पर ड्रोन दिखने से ठीक दो दिन पहले, मंगलवार देर रात जर्मनी के लीपजिग-हाले हवाई अड्डे पर विस्फोटकों से लदा एक ड्रोन मिला था। सुरक्षा बलों ने उस विस्फोटक को समय रहते निष्क्रिय कर दिया। जर्मनी के गृह मंत्री अलेक्जेंडर डोब्रिंड्ट ने इस घटना को खतरे का एक नया और खतरनाक स्तर करार दिया है। यह हवाई अड्डा अंतरराष्ट्रीय माल ढुलाई और यूक्रेन को सैन्य सहायता भेजने का एक बेहद महत्वपूर्ण केंद्र है। यहां नियमित रूप से भारी-भरकम यूक्रेनी एंटोनोव परिवहन विमान आवाजाही करते हैं।
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यह ठिकाना नाटो के 'स्ट्रैटेजिक एयरलिफ्ट इंटरनेशनल सॉल्यूशन' (एसएएलआईएस) का भी मुख्य सेंटर है। यह फिनलैंड से लेकर रोमानिया तक नाटो के युद्ध समूहों को सैन्य उपकरण पहुंचाने में दिन-रात काम करता है।
यह भी पढ़ें: 'किसी एक पर हमला मानेंगे तीनों पर वार': क्या है PAK-सऊदी-तुर्किये के बीच हुआ 'मक्का रक्षा समझौता', भारत पर इसका क्या असर?
इस घटना से जुड़ी पांच बड़ी बातें
यूक्रेन पर रूस के सैन्य हमले के बाद से ही पश्चिमी देशों में इस तरह की संदिग्ध गतिविधियों की बाढ़ आ गई है। पश्चिमी सुरक्षा अधिकारियों का मानना है कि रूस और उसके सहयोगी यूरोप भर में ऐसे दर्जनों हमलों को अंजाम दे रहे हैं। वहीं, बर्लिन स्थित रूसी दूतावास ने शुक्रवार को इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। रूस ने लीपज़िग की घटना को "जर्मनी में रूस-विरोधी फैलाए जा रहे भ्रम की एक नई लहर" करार दिया है।
जर्मनी के प्रमुख कारगो एयरपोर्ट पर विस्फोटक से लदा ड्रोन मिलने के बाद अब सैन्य बेस के ऊपर दो संदिग्ध ड्रोन मंडराते देखे गए हैं। नाटो के रणनीतिक एयर बेस और यूक्रेन के सप्लाई रूट के पास हुई इन घटनाओं से सुरक्षा एजेंसियां बेहद चौकस हो गई हैं। पुलिस और सेना ने मामले की गहन जांच शुरू कर दी है।
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क्या जर्मन सैन्य ठिकाने की हो रही थी जासूसी?
जर्मन जॉइंट फोर्स कमांड के बयान के अनुसार, पश्चिमी जर्मनी के मेचेरनिच में स्थित बुंडेसवेहर (जर्मन सेना) बेस पर सुरक्षा कर्मियों ने गुरुवार रात करीब 10 बजे दो ड्रोन उड़ते देखे। ड्रोनों की मौजूदगी की पुष्टि होते ही तुरंत मौके पर मिलिट्री पुलिस की टीमें तैनात कर दी गईं। युसकिरचेन पुलिस विभाग ने इस मामले की आपराधिक जांच शुरू कर दी है। हालांकि, पुलिस और सेना ने अभी तक सुरक्षा कारणों से अधिक जानकारी साझा नहीं की है।
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आखिर कितना बड़ा है खतरा?
सैन्य बेस पर ड्रोन दिखने से ठीक दो दिन पहले, मंगलवार देर रात जर्मनी के लीपजिग-हाले हवाई अड्डे पर विस्फोटकों से लदा एक ड्रोन मिला था। सुरक्षा बलों ने उस विस्फोटक को समय रहते निष्क्रिय कर दिया। जर्मनी के गृह मंत्री अलेक्जेंडर डोब्रिंड्ट ने इस घटना को खतरे का एक नया और खतरनाक स्तर करार दिया है। यह हवाई अड्डा अंतरराष्ट्रीय माल ढुलाई और यूक्रेन को सैन्य सहायता भेजने का एक बेहद महत्वपूर्ण केंद्र है। यहां नियमित रूप से भारी-भरकम यूक्रेनी एंटोनोव परिवहन विमान आवाजाही करते हैं।
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यह ठिकाना नाटो के 'स्ट्रैटेजिक एयरलिफ्ट इंटरनेशनल सॉल्यूशन' (एसएएलआईएस) का भी मुख्य सेंटर है। यह फिनलैंड से लेकर रोमानिया तक नाटो के युद्ध समूहों को सैन्य उपकरण पहुंचाने में दिन-रात काम करता है।
यह भी पढ़ें: 'किसी एक पर हमला मानेंगे तीनों पर वार': क्या है PAK-सऊदी-तुर्किये के बीच हुआ 'मक्का रक्षा समझौता', भारत पर इसका क्या असर?
इस घटना से जुड़ी पांच बड़ी बातें
- मेचेरनिच स्थित जर्मन सेना के ठिकाने पर गुरुवार रात 10 बजे दो अज्ञात ड्रोन मंडराते देखे गए।
- मंगलवार रात लीपजिग-हाले एयरपोर्ट पर भारी विस्फोटकों के साथ एक ड्रोन मिला, जिसे निष्क्रिय किया गया।
- जिस हवाई अड्डे पर विस्फोटक ड्रोन मिला, वह यूक्रेन और नाटो के पूर्वी मोर्चे को हथियार भेजने का मुख्य जरिया है।
- 2024 में इसी एयरपोर्ट के लॉजिस्टिक्स सेंटर में आग लगाने वाला उपकरण मिला था, जिसका आरोप पश्चिमी देशों ने रूसी खुफिया तंत्र पर लगाया था।
- पश्चिमी देश रूस पर यूरोप भर में संदिग्ध गतिविधियों के आरोप लगा रहे हैं, जबकि रूसी दूतावास ने इसे केवल 'रूस-विरोधी बयानबाजी' बताया है।
यूक्रेन पर रूस के सैन्य हमले के बाद से ही पश्चिमी देशों में इस तरह की संदिग्ध गतिविधियों की बाढ़ आ गई है। पश्चिमी सुरक्षा अधिकारियों का मानना है कि रूस और उसके सहयोगी यूरोप भर में ऐसे दर्जनों हमलों को अंजाम दे रहे हैं। वहीं, बर्लिन स्थित रूसी दूतावास ने शुक्रवार को इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। रूस ने लीपज़िग की घटना को "जर्मनी में रूस-विरोधी फैलाए जा रहे भ्रम की एक नई लहर" करार दिया है।
जर्मनी के प्रमुख कारगो एयरपोर्ट पर विस्फोटक से लदा ड्रोन मिलने के बाद अब सैन्य बेस के ऊपर दो संदिग्ध ड्रोन मंडराते देखे गए हैं। नाटो के रणनीतिक एयर बेस और यूक्रेन के सप्लाई रूट के पास हुई इन घटनाओं से सुरक्षा एजेंसियां बेहद चौकस हो गई हैं। पुलिस और सेना ने मामले की गहन जांच शुरू कर दी है।