{"_id":"6a7c8bf3421411317904dd5b","slug":"rbi-s-big-move-harmonised-interest-rate-rules-for-banks-and-nbfcs-2026-08-12","type":"story","status":"publish","title_hn":"RBI: बैंक और एनबीएफसी के लिए ब्याज दरें होंगी एक समान, जानिए रिजर्व बैंक ने क्या कदम उठाया?","category":{"title":"Business Diary","title_hn":"बिज़नेस डायरी","slug":"business-diary"}}
RBI: बैंक और एनबीएफसी के लिए ब्याज दरें होंगी एक समान, जानिए रिजर्व बैंक ने क्या कदम उठाया?
Wed, 12 Aug 2026 08:36 PM IST
कुमार विवेक
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: कुमार विवेक
Updated Wed, 12 Aug 2026 08:36 PM IST
सार
भारतीय रिजर्व बैंक ने बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के लिए ब्याज दर निर्धारण के सामंजस्य हेतु मसौदा नियम जारी किए हैं। ये नए दिशानिर्देश ऋणों के मूल्य निर्धारण में पारदर्शिता लाएंगे और 1 अप्रैल 2027 से प्रभावी होंगे। आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं।
विज्ञापन
भारतीय रिजर्व बैंक
- फोटो : एएनआई (फाइल)
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बुधवार, 12 अगस्त 2026 को बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के बीच ब्याज दर निर्धारण नीतियों में सामंजस्य स्थापित करने के लिए मसौदा नियम जारी किए। इन नए दिशानिर्देशों का उद्देश्य दोनों प्रकार की वित्तीय संस्थाओं के लिए एक समान नियामक ढांचा तैयार करना है। वर्तमान में, अग्रिमों पर ब्याज दरों से संबंधित नियामक ढांचा केवल वाणिज्यिक बैंकों पर लागू होता है। वहीं, एनबीएफसी मुख्य रूप से आचरण-संबंधी पहलुओं से शासित होते हैं, जैसा कि आरबीआई की अधिसूचना में बताया गया है।
आरबीआई का प्रस्ताव है कि सभी विनियमित संस्थाओं के लिए सामंजस्यपूर्ण दिशानिर्देश जारी किए जाएं। ये दिशानिर्देश निश्चित दर और परिवर्तनशील दर वाले ऋणों दोनों पर ब्याज दरों के निर्धारण के लिए एक व्यापक, सिद्धांतों पर आधारित ढांचा निर्धारित करेंगे। यह ढांचा विनियमित संस्था के परिचालन की प्रकृति, जटिलता और पैमाने के अनुरूप होगा, जिससे सभी के लिए निष्पक्षता सुनिश्चित होगी। इन दिशानिर्देशों को "भारतीय रिजर्व बैंक (ऋणों और अग्रिमों पर ब्याज दरें) दिशानिर्देश, 2026" कहा जाएगा। इनके अगले साल 1 अप्रैल 2027 से प्रभावी होने का प्रस्ताव है। यह मसौदा गवर्नर संजय मल्होत्रा द्वारा 5 अगस्त को विनियमों के सामंजस्य की घोषणा के बाद जारी किया गया है। जनता को बुधवार को जारी मसौदे पर 11 सितंबर तक अपनी प्रतिक्रिया देने का समय दिया गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
आरबीआई का प्रस्ताव है कि सभी विनियमित संस्थाओं के लिए सामंजस्यपूर्ण दिशानिर्देश जारी किए जाएं। ये दिशानिर्देश निश्चित दर और परिवर्तनशील दर वाले ऋणों दोनों पर ब्याज दरों के निर्धारण के लिए एक व्यापक, सिद्धांतों पर आधारित ढांचा निर्धारित करेंगे। यह ढांचा विनियमित संस्था के परिचालन की प्रकृति, जटिलता और पैमाने के अनुरूप होगा, जिससे सभी के लिए निष्पक्षता सुनिश्चित होगी। इन दिशानिर्देशों को "भारतीय रिजर्व बैंक (ऋणों और अग्रिमों पर ब्याज दरें) दिशानिर्देश, 2026" कहा जाएगा। इनके अगले साल 1 अप्रैल 2027 से प्रभावी होने का प्रस्ताव है। यह मसौदा गवर्नर संजय मल्होत्रा द्वारा 5 अगस्त को विनियमों के सामंजस्य की घोषणा के बाद जारी किया गया है। जनता को बुधवार को जारी मसौदे पर 11 सितंबर तक अपनी प्रतिक्रिया देने का समय दिया गया है।
विज्ञापन
नए नियम क्या हैं और किसे प्रभावित करेंगे?
ये दिशानिर्देश केवल विनियमित संस्थाओं के घरेलू परिचालन पर लागू होंगे, जिससे भारत के भीतर वित्तीय स्थिरता बढ़ेगी। सभी विनियमित संस्थाओं को ऋणों और अग्रिमों पर ब्याज दरों से संबंधित बोर्ड-अनुमोदित नीतियां बनानी होंगी। इन नीतियों की समीक्षा कम से कम साल में एक बार की जानी चाहिए ताकि वे बाजार की बदलती परिस्थितियों के अनुकूल रहें। यह वार्षिक समीक्षा सुनिश्चित करेगी कि ब्याज दरें हमेशा उचित और पारदर्शी हों। यह नीति ऋणों के मूल्य निर्धारण से संबंधित विभिन्न पहलुओं को निर्धारित करेगी। इसमें सूक्ष्म वित्त ऋण भी शामिल होंगे, जो छोटे कर्जदारों के लिए महत्वपूर्ण हैं।
विज्ञापन